Vitamin D की कमी से हड्डियों के अलावा शरीर पर क्या असर पड़ता है? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे इग्नोर
Vitamin D Deficiency: क्या आप भी Vitamin D की कमी को मामूली समझते हैं? आइए NIH से जाने हड्डियों की सेहत के अलावा शरीर पर कैसा असर डालती है इस पोषक तत्व की कमी.
विटामिन D की कमी को पूरा करना क्यों जरूरी है? (Image: AI/Pexels)
खबर की मुख्य बातें:
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विटामिन डी शरीर को कैल्शियम अवशोषित करने में मदद करता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है.
विटामिन डी की कमी से बच्चों में रिकेट्स और युवाओं में ऑस्टियोमलेशिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं.
धूप विटामिन डी का एक प्राकृतिक स्रोत है, लेकिन बादल, प्रदूषण और बढ़ती उम्र इसके उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं.
फैटी फिश, फिश लिवर ऑयल, अंडे की जर्दी, बीफ लिवर, चीज और कुछ मशरूम विटामिन डी के प्राकृतिक स्रोत हैं.
अच्छी सेहत पर किसी को चाहिए लेकिन इसके लिए शरीर में मौजूद पोषक तत्वों का ख्याल रखना काफी जरूरी है. अक्सर देखा जाता है कि लोग शरीर में हो रही तत्वों की कमी पर ध्यान नहीं देते हैं और जिंदगी गुजारते रहते हैं. ऐसे में जब उन तत्वों की कमी के कारण शरीर प्रतिक्रिया देने लगती है, तो व्यक्ति परेशान हो जाता है और तरह-तरह की दवाओं का सेवन करने लगता है. ऐसा ही कुछ विटामिन डी (Vitamin D) के साथ है, दरअसल, विटामिन डी की कमी अक्सर लोगों में देखी जाती है, लेकिन लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं होती है कि वह इस कमी से जूझ रहे हैं और अगर उन्हें इसका मालूम चलता भी है, तो वह इस खास तत्व की कमी को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और सोचते हैं क्या हुआ बाहर निकलूंगा, तो कमी पूरी हो जाएगी. लेकिन ये जानना जरूरी है कि विटामिन डी की कमी सिर्फ हड्डियों के लिए समस्या नहीं बल्कि शरीर में कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकती हैं, आइए जानते हैं इस स्टोरी में.
NIH के अनुसार, विटामिन D हमारे शरीर के अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है. यह शरीर को कैल्शियम अवशोषित करने में मदद करता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है. विटामिन D और कैल्शियम मिलकर हड्डियों को पतला और कमजोर होने से बचाते हैं, इससे ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) जैसी बीमारी का खतरा भी कम करने में मदद मिलती है, जिसमें हड्डियां कमजोर होकर आसानी से टूट सकती हैं. इसके अलावा, विटामिन D मांसपेशियों को सही तरीके से काम करने और शरीर को चलाने में मदद करता है. इतना ही नहीं, यह नसों को दिमाग और शरीर के बीच संदेश पहुंचाने में भी मददगार है. साथ ही, विटामिन D इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने और बैक्टीरिया व वायरस से लड़ने में अहम भूमिका निभाती है. इसलिए अच्छी सेहत के लिए विटामिन D जरूरी है और इसकी कमी होने पर सही कदम उठाना जरूरी है.
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शरीर में विटामिन D की कमी होने पर क्या होता है?
अब सवाल उठता है कि विटामिन डी की कमी से क्या सिर्फ हड्डियां कमजोर होती है या सेहत पर कुछ और असर भी पड़ता है? NIH के अनुसार, शरीर में विटामिन D की कमी होने से हड्डियों और मांसपेशियों पर बुरा असर पड़ सकता है. बच्चों में इसकी कमी से रिकेट्स (Rickets) नामक बीमारी हो सकती है, जिसमें हड्डियां नरम, कमजोर, टेढ़ी और दर्द हो होने लगता है. वहीं, युवाओं में विटामिन D की कमी से ऑस्टियोमलेशिया (Osteomalacia) हो सकता है, जिससे हड्डियों में दर्द और मांसपेशियों में कमजोरी होती है. लंबे समय तक विटामिन D और कैल्शियम की कमी रहने से ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा भी बढ़ सकता है, इसके अलावा, विटामिन D की भूमिका दिल, दिमाग, इम्यून सिस्टम और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी महत्वपूर्ण है.
स्वास्थ्य पर इसका असर
हड्डियों की कमजोरी: विटामिन D और कैल्शियम की लंबे समय तक कमी से हड्डियां कमजोर और नाजुक हो सकती हैं.
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कैंसर: विटामिन D सप्लीमेंट लेने से ब्रेस्ट, कोलन, रेक्टम या फेफड़ों के कैंसर का खतरा कम होने का प्रमाण नहीं मिला है.
दिल से जुड़ी बीमारी: विटामिन D दिल और खून वाहिकाओं के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है, लेकिन इसके सप्लीमेंट दिल के रोग का खतरा कम नहीं करते.
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डिप्रेशन: शरीर में विटामिन D का कम स्तर डिप्रेशन के बढ़ते खतरे से जुड़ा हो सकता है.
मल्टीपल स्केलेरोसिस (MS): कम विटामिन D का स्तर इस बीमारी के खतरे से जुड़ा पाया गया है.
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टाइप 2 डायबिटीज: विटामिन D ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है, लेकिन इसके सप्लीमेंट डायबिटीज को रोकने में प्रभावी साबित नहीं हुए हैं.
वजन कम करना: विटामिन D सप्लीमेंट या इससे भरपूर खाद्य पदार्थ वजन घटाने में मदद करते हैं ऐसा अक्सर कहा जाता है, लेकिन इस बात का कोई पक्का प्रमाण नहीं मिलता है.
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क्या खाने से पूरी हो सकती है विटामिन D की कमी?
विटामिन D शरीर के लिए एक जरूरी पोषक तत्व है, लेकिन बहुत कम खाद्य पदार्थों में यह प्राकृतिक रूप से पाया जाता है. विटामिन D की कमी को पूरा करने के लिए आप अपनी डाइट में कुछ खास खाद्य पदार्थ शामिल कर सकते हैं. कई खाद्य पदार्थों में विटामिन D अलग से मिलाया जाता है, जिन्हें फोर्टिफाइड फूड्स कहा जाता है. दूध, सोया मिल्क, बादाम मिल्क और ओट मिल्क इसके अच्छे विकल्प हो सकते हैं. इसके अलावा, कुछ ब्रांड के संतरे के जूस, दही, मार्जरीन और ब्रेकफास्ट सीरियल्स में भी विटामिन D मिलाया जाता है. अपनी डाइट में विटामिन D की सही मात्रा जानने के लिए खाद्य पदार्थों का न्यूट्रिशन फैक्ट्स लेबल जरूर देखें और साथ ही, डॉक्टर से सलाह जरूर लें कि आपके लिए वह चीज सही है या नहीं.
विटामिन D से भरपूर खाद्य पदार्थ
फैटी फिश: सैल्मन, टूना, ट्राउट और मैकेरल मछली विटामिन D के अच्छे प्राकृतिक स्रोत हैं.
फिश लिवर ऑयल: इसमें विटामिन D अच्छी मात्रा में पाया जाता है.
अंडे की जर्दी: इसमें थोड़ी मात्रा में विटामिन D होता है.
मशरूम: कुछ मशरूम में प्राकृतिक रूप से विटामिन D होता है. अल्ट्रावायलेट (UV) लाइट के संपर्क में आने से इनमें इसकी मात्रा बढ़ सकती है.
फोर्टिफाइड फूड्स: दूध, प्लांट बेस्ड मिल्क, कुछ दही, संतरे का जूस और ब्रेकफास्ट सीरियल्स विटामिन D के अच्छे विकल्प हैं.
क्या धूप से विटामिन D मिल सकता है?
हां, NIH के अनुसार, धूप विटामिन D का एक प्राकृतिक स्रोत है, जब आपकी त्वचा सीधे सूरज की रोशनी के संपर्क में आती है, तो शरीर खुद विटामिन D बनाता है. हालांकि, कुछ कारणों से शरीर में विटामिन D बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिसमें बादल, प्रदूषण (Smog), बढ़ती उम्र और गहरे रंग की त्वचा के कारण शरीर कम विटामिन D बना पाता है. ध्यान रखें कि खिड़की के शीशे से आने वाली धूप में बैठने से त्वचा विटामिन D नहीं बना पाती, आपको खुले में बैठना होगा और डायरेक्ट धूप लेनी होगी. इसके अलावा, सूरज की अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें त्वचा के कैंसर का खतरा बढ़ा सकती हैं, इसलिए ज्यादा देर तक धूप में रहने से बचना जरूरी है. अगर आप कुछ मिनटों से ज्यादा समय धूप में बिताते हैं, तो त्वचा की सुरक्षा के लिए SPF 15 या उससे ज्यादा वाला सनस्क्रीन लगाएं, ताकि स्किन से जुड़ी समस्या से बचा जा सके.