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पैरों पर लाल-हरी धारियां क्यों दिखती हैं? जानिए किस कंडीशन में दिखते हैं ऐसे लक्षण, ठीक कैसे होगी यह दिक्कत

What Is Varicose Veins: हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग ने बताया पैरों पर नीली, हरी या बैंगनी धारियां दिखना और उनका सूज जाना कौन सी दिक्कत है, यह किन्हें ज्यादा होती है और इसका क्या इलाज होता है. अगर आप भी ऐसी ही दिक्कत से दो-चार होते हैं तो जानिए क्या है यह कंडीशन.

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नसों का मुड़ना और उभरा हुआ दिखना किस समस्या का लक्षण होता है? Image Credits- AI

Swollen Veins Problem: क्या आपके पैरों पर भी नीली-हरी या बैंगनी धारियां दिखती हैं, नसें उभरी हुई नजर आती हैं और ऐसा लगता है जैसे नसें मकड़ी के जाल की तरह उलझ गई हैं? अगर हां, तो यह दिक्कत वेरिकोज वेन्स हो सकती हैं. वेरिकोज वेन्स ऐसी दिक्कत है जिसमें स्किन की सतह पर नसें उभरी हुई दिखाई देती हैं. हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग के अनुसार, वेरिकोज वेन्स ज्यादातर पैरों में होती हैं. 50% मामलों में यह दिक्कत परिवारों में दिखती हैं जहां नसों की कमजोरी परिवार में जेनेटिकली नजर आती है. इसके अलावा प्रेग्नेंसी के दौरान भी वेरिकोज वेन्स की दिक्कत दिखती है जिसमें ब्लड वॉल्यूम बढ़ता है और नसें चौड़ी होने लगती हैं. ऐसे में यहां जानिए हार्वर्ड के अनुसार, वेरिकोज वेन्स के क्या लक्षण (Varicose Veins Symptoms) होते हैं और इसे किस तरह मैनेज किया जा सकता है.

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वेरिकोज वेन्स के क्या लक्षण होते हैं

पैरों में वेरिकोज वेन्स ज्यादातर पैरों के एंकल्स पर या काल्फ के पीछे नजर आती हैं. इस दिक्कतें में नसें फूली हुई, सूजी हुई, नीली, बैंगनी और मुड़ी-तुड़ी नजर आती हैं. कुछ लोगों को वेरिकोज वेन्स में ज्यादा दिक्कत नहीं होती है लेकिन कुछ लोगों को ये लक्षण महसूस हो सकते हैं-

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  • पैरों में हल्का दर्द रहना
  • पैरों में दबाव महसूस होना, पैरों का भारी महसूस होना
  • पैरों का सूजन जाना
  • डैमेज्ड नसों के पास खुजली होना

नसों की क्रोनिक वीनस इनसफिशिएंसी में नसों में खून का प्रवाह धीमा हो सकता है, त्वचा रूखी हो सकती है, रैशेज पड़ सकते हैं, त्वचा भूरी हो सकती है या खुला घाव बन सकता है. इसके अलावा, प्रभावित नसों के अंदर खून का थक्का बन सकता है. इस कंडीशन को थ्रोमबॉसिस कहते हैं.

सामान्यतौर पर कहा जा सकता है कि दिन के अंत तक वेरिकोज वेन्स के लक्षण बिगड़ने लगते हैं, खासकर अगर दिनभर खड़ा रहा जाए, पीरियड्स हो रहे हों या महिला प्रेग्नेंट हो.

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वेरिकोज वेन्स कबतक रहती हैं

वेरिकोज वेन्स एक लॉन्ग टर्म दिक्कत है लेकिन इसके लक्षण आते-जाते रहते हैं. अगर आप प्रेग्नेंट हैं तो वेरिकोज वेन्स की दिक्कत डिलीवरी के बाद कम हो सकती है, लेकिन यह दिक्कत पूरी तरह जाती नहीं है. इसके अलावा, भविष्य में होने वाली प्रेग्नेंसी में भी यह दिक्कत लौट सकती है.

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वेरिकोज वेन्स का इलाज कैसे होता है

  • अगर वेरिकोज वेन्स की थोड़ी ही दिक्कत है तो दिनभर पैरों को ऊपर उठाना और उन्हें सहारा देना फायदेमंद हो सकता है. इसके अलावा कंप्रेशन स्टॉकिंग पहनने की लिए दी जा सकती हैं.
  • अगर वेरिकोज वेन्स स्किन के बहुत पास चिपकी हैं तो डर्मेटोलॉजिस्ट या वेस्कुरल सर्जन स्क्लेरोथेरैपी या लेजर थेरैपी की सलाह दे सकते हैं.
  • जिन लोगों की नसों में खून का थक्का बार-बार जमता है और स्किन पर फोड़े बनते हैं उनकी सर्जरी की जा सकती है.
  • कुछ और थेरैपी दी जा सकती हैं, जैसे एंडोवेनस थर्मल एब्लेशन और ट्रांसइलुमिनेटेड पावर फ्लेबोटोमी. इन प्रक्रियाओं में निशान कम बनते हैं.

वेरिकोज वेन्स की दिक्कत से कैसे बचें

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वेरिकोज वेन्स की दिक्कत से बचने के लिए नॉर्मल वजन मेंटेन करना जरूरी होता है. लंबे समय तक खड़े रहने से बचना जरूरी है. इसके अलावा, घर में अगर किसी को यह दिक्कत है तो व्यक्ति को समय-समय पर जांच कराते रहनी चाहिए. कई बार डॉक्टर चलते या खड़े होते समय स्पेशलाइज्ड स्टॉकिंग पहनने की सलाह भी देते हैं. इन स्टॉकिंग से खून का थक्का नहीं जमता है और नसों पर दबाव भी कम पड़ता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source - Harvard

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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