किन लोगों को हो सकती है नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर की बीमारी? जानिए क्या हैं इसके रिस्क फैक्टर्स

Non Alcoholic Fatty Liver Disease: स्वास्थ्य मंत्रालय से जानिए नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज क्या है, यह किन लोगों को हो सकती है और इसे किस तरह मैनेज किया जा सकता है. समय रहते इस बीमारी का पता चल जाए तो इसे बढ़ने से रोकने में मदद मिलती है.

Fatty Liver Disease

क्या है फैटी लिवर डिजीज, जानिए यहां. AI Generated Image

NAFLD Risk Factors: नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) लिवर की लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है जो अनेक लोगों को अपना शिकार बनाती है. यह बीमारी मोटापे, टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, मेटाबॉलिक सिंड्रोम और कई कैंसर से जड़ी है. समय रहते नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज का इलाज ना किया जाए तो यह लिवर सिरोसिस और कैंसर (Liver Cancer) के खतरे को बढ़ा देती है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि किन लोगों को यह बीमारी हो सकती है या इसके रिस्क फैक्टर्स क्या हैं जिनसे बचकर रहा जरूरी है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज किन स्थितियों में हो सकती है.

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किन्हें हो सकती है नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज

मोटापा या मेटाबॉलिक सिंड्रोम – मोटापे या मेटाबॉलिक सिंड्रोम से दो-चार हो रहे लोगों में नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज होने की संभावना रहती है. पेट के आस-पास जमा फैट इंसुलिन रेजिस्टेंस और लिवर इंफ्लेमेशन की वजह बन सकता है. मेटाबॉलिक सिंड्रोम से ग्रस्त लोगों में भी NAFLD देखा जाता है.

डायबिटीज – इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप 2 डायबिटीज मेलाइटिस के मरीजों में लिवर की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में डायबिटीज के मरीज लिवर की बीमारी से ग्रस्त हो सकते हैं.

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लाइफस्टाइल का एक्टिव ना होना – सिडेंटरी लाइफस्टाइल भी फैटी लिवर डिजीज की एक बड़ी वजह है. सिडेंटरी लाइफस्टाइल का मतलब है कि ज्यादा एक्टिव ना होना, हमेशा बैठे या लेटे रहना और किसी तरह की एक्सरसाइज ना करना. ऐसे में रेगुलर एक्सरसाइज करना, साइक्लिंग करना और स्विमिंग वगैरह करना बीमारियों को दूर रखने में मददगार होता है.

खानपान की गलतियां – खानपान का खराब होना भी लिवर की बीमारी को बढ़ा सकता है. अनहेल्दी फैट्स और शुगर से भरपूर डाइट लेने पर नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज हो सकती है. ऐसे में जरूरी है कि खानपान हेल्दी हो, डाइट में पूर्ण अनाज, फल और सब्जियां वगैरह ज्यादा लिए जाएं.

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अन्य रिस्क फैक्टर्स – उम्र बढ़ने पर, अधिकतर पुरुषों में, कुछ दवाओं के चलते, कुछ कंडीशंस जैसे पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या स्लीप एपनिया नॉन फैटी लिवर डिजीज के रिस्क को बढ़ा सकते हैं.

नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज कैसे ठीक होता है

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  • लाइफस्टाइल में बदलाव करके नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज को ठीक किया जा सकता है. डॉक्टर से जांच कराने के बाद उनके कहेनुसार ही लाइफस्टाइल की आदतें बदली जाती हैं.
  • हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाने पर लिवर की दिक्कतों (Liver Problems) का खतरा कम होता है.
  • एल्कोहल का सेवन पूरी तरह से बंद करना जरूरी है.
  • शरीर की अन्य दिक्कतें जैसे कार्डियोवेस्कुलर दिक्कतों या हाई ब्लड प्रेशर को मैनेज करना जरूरी होता है.
  • माइक्रोन्यूट्रिएंट्स को मैनेज करना जरूरी है. इसके लिए कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स को डाइट का हिस्सा बनाना जरूरी है.
  • हेल्दी फैट्स और अनहेल्दी फैट्स में अंतर करना और सेहत के लिए सही फूड्स को चुनना जरूरी है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source - Health Ministry 

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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