Urine Probelems: यूरिनरी अरजेंसी का मतलब है एकदम से पेशाब लगना और इतनी तेज लगना कि व्यक्ति पेशाब रोकने में असमर्थ हो जाता है. इस स्थिति में या तो व्यक्ति को तुरंत टॉयलेट भागना पड़ता है या कपड़ों में ही यूरिन की लीकेज (Urine Leakage) होने लगती है. लेकिन, इस तरह पेशाब आने की तीव्र इच्छा क्यों होती है, क्या यह कोई बीमारी है, इसके क्या लक्षण हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है, जानिए यहां.

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एकदम से क्यों आता है पेशाब

क्या है यूरिनरी अरजेंसी

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ब्लैडर फुल ना होने के बावजूद एकदम से पेशाब करने की तीव्र इच्छा हो सकती है. यह असल में कोई बीमारी नहीं है बल्कि एक लक्षण है जोकि अलग-अलग दिक्कतों के कारण ट्रिगर होता है. बार-बार पेशाब आना, ब्लैडर इंफेक्शन, पथरी, प्रोस्टेट का बढ़ना, पथरी या ओवरएक्टिव ब्लैडर के कारण पेशाब करने की जल्दी महसूस हो सकती है.

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यूरिनरी अरजेंसी में दिक्कत का अंदाजा लगाने के बजाय लक्षणों के पैटर्न को देखें. एकदम से पेशाब लगने के साथ और क्या दिक्कतें हो रही हैं उनपर ध्यान दें, क्या पेशाब करते हुए खून आ रहा है या दर्द हो रहा है जैसे सवाल खुद से करें. अगर जवाब हां है तो डॉक्टर से मिलने में देरी ना करें.

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पेशाब कंट्रोल ना कर पाने के साथ और कौन सी दिक्कतें होती हैं

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पेशाब कंट्रोल ना कर पाना और बहुत तेज पेशाब आने के साथ ही ये दिक्कतें भी हो सकती हैं -

  • दिनभर में बार-बार पेशाब लगना (Baar Baar Peshab Aana)
  • पेशाब के कारण नींद का टूटना
  • बाथरूम पहुंचने से पहले ही यूरिन का लीक हो जाना या निकल जाना
  • ऐसा महसूस करना कि मूत्राशय पूरी तरह बढ़ा नहीं है फिर भी तेज पेशाब आ रहा है
  • पेट के निचले हिस्से में दर्द महसूस होना.

इन पैटर्न्स और दिक्कतों को समझकर एक्सपर्ट की सलाह ली जा सकती है.

तेज पेशाब आने के कारण और किन्हें होती है यह दिक्कत

यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (Urinary Tract Infection) में ऐसा हो सकता है. अगर पेशाब तेज लगने के साथ ही पेशाब करते हुए जलन होती है और पेल्विक असहजता महसूस होती है तो यह यूटीआई का लक्षण हो सकता है. ब्लैडर में पथरी होने पर ऐसा हो सकता है. इसके अलावा कब्ज से परेशान लोगों में एक्स्ट्रा प्रेशर और भार के कारण ऐसा होता है. महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान यह दिक्कत हो सकती है. डायबिटीज के मरीज और ज्यादा उम्र वाले लोग भी इस दिक्कत से दोचार हो सकते हैं.

कैसे होता है इलाज

डॉक्टर जांच करके परेशानी का पता लगाते हैं और जांचते हैं कि यह लक्षण क्यों दिख रहा है. इसके बाद उस परेशानी को ठीक करने की कोशिश की जाती है. ब्लैडर ट्रेनिंग, फ्लुइड टाइमिंग, एल्कोहल और कैफीन का कम सेवन और पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज की सलाह भी दी जा सकती है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.