Type 2 Diabetes Symptoms: टाइम 2 डायबिटीज एक मेटाबॉलिक वैस्कुलर सिंड्रोम है जिसमें इंसुलिन रेजिस्टेंस और इंसुलिन स्त्राव संबंधी दिक्कतें होती हैं. यह एक बढ़ती रहने वाली कंडीशन है जो आमतौर पर मोटापा, कार्डियोवेस्कुलर दिक्कतें और हाइपरटेशन जैसी दिक्कतों से जुड़ी होती है. टाइप 2 डायबिटीज ज्यादातर मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों में देखी जाती है और बड़े वयस्कों में इसका खतरा ज्यादा होता है. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) डायबिटीज पर जारी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि डायबिटीज की स्क्रीनिंग (Diabetes Screening) किन लोगों को किन स्थितियों में जरूर करवानी चाहिए और टाइप 2 डायबिटीज के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं.
डायबिटीज की स्क्रीनिंग कब करवानी चाहिए
टाइप 2 डायबिटीज का खतरा भारतीयों में कम उम्र में ही दिख सकता है. ऐसे में डायबिटीज के लक्षण (Diabetes Symptoms) दिखने से पहले ही अगर स्क्रीनिंग करवा ली जाए और डायबिटीज का पता चले तो इसे मैनेज करना आसान हो जाता है. इसीलिए 30 साल की उम्र से ज्यादा सभी लोगों को डायबिटीज की स्क्रीनिंग करवानी चाहिए. वहीं, जिन लोगों में यहां दी गई एक या उससे ज्यादा दिक्कतें हैं उन्हें कम उम्र में भी डायबिटीज की स्क्रीनिंग करवा लेनी चाहिए –
- परिवार में किसी को डायबिटीज होना
- वजन ज्यादा होना
- हाई ब्लड प्रेशर की दिक्कत होना
- फिजिकल एक्टिविटी की कमी
- गेस्टेशनल डायबिटीज की हिस्ट्री होना या जन्म के समय वजन साढ़े तीन किलो से ज्यादा होना
- दिल की बीमारी या सेरेब्रोवेस्कुलर बीमारी की हिस्ट्री होना
- पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम या अकैंथोसिस नाइग्रिकन्स की हिस्ट्री होना.
कैसे होती डायबिटीजी की स्क्रीनिंग
डायबिटीज की स्क्रीनिंग फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज टेस्ट से हो सकती है. इसके अलावा HbA1c टेस्ट से स्क्रीनिंग हो सकती है. स्क्रीनिंग किसी अस्पताल या क्लीनिक में ही करवानी चाहिए. नॉर्मल ग्लूकोज टॉलरेंस के मामले में हर 3 सालों में रिटेस्ट करवाना चाहिए. अगर प्रीडायबिटीज है तो हर साल टेस्ट करवाना चाहिए.
टाइप 2 डायबिटीज के क्या लक्षण होते हैं
पॉलीयूरिया – व्यक्ति को बार-बार पेशाब आना पॉलीयूरिया कहलाता है. यह डायबिटीज का एक बड़ा लक्षण है. जब शरीर में खून में ग्लूकोज का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है तो किडनी उसे छानने का प्रयास करती है जिस कारण जरूरत से ज्यादा पेशाब आता है.
पॉलीडिप्सिया – इसका मतलब है बार-बार प्यास लगना. डायबिटीज में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ने पर बार-बार पेशाब आता है जिस कारण शरीर में पानी की कमी होने लगती है और बार-बार प्यास लगना शुरू हो जाती है.
पॉलीफेजिया होते हुए वजन कम होना – पेट भरा होने के बाद भी बार-बार भूख लगती है. लेकिन, भूख लगने के बाद और ज्यादा खाने के बाद भी व्यक्ति का वजन कम होना डायबिटीज का एक बड़ा लक्षण होता है.
थकान और कमजोरी – हर समय थकान और कमजोरी महसूस होना डायबिटीज का लक्षण हो सकता है.
रिकरेंट यूरोजेनिटल इन्फेक्शन – डायबिटीज में रिकरेंट यूरोजेनिटल इन्फेक्शन का मतलब है बार-बार मूत्र मार्ग या जननांगों में संक्रमण होना. यह एक गंभीर समस्या है. जब ब्लड शुगर लेवल्स बढ़ते हैं तो शरीर में बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन पनपने के लिए एक अनुकूल माहौल बनता है और बार-बार इंफेक्शन होने लगते हैं.
जनरलाइज्ड प्रूरिटस – यह पूरे शरीर में होने वाली तेज खुजली है. इससे शरीर पर दाने या रैशेज निकलने लगते हैं. डायबिटीज में जनरलाइज्ड प्रूरिटस में शरीर पर हल्दी या गंभीर खुजली हो सकती है.
घाव का ना भरना – डायबिटीज में घाव जल्दी नहीं भरते हैं. खासतौर से पैरों पर घाव होना और इस घाव का ठीक ना होना डायबिटीज का एक बड़ा संकेत (Diabetes Sign) है जिसे इग्नोर नहीं करना चाहिए.
इस बात का ध्यान रखें कि डायबिटीज के आधे मरीज ऐसे हैं जिनमें कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.