Cataract Surgery: आंखों के अंदर पुतली के पीछे एक प्राकृतिक लेंस होता है जिसका काम रोशनी को रेटिना पर फोकस करना है, ताकि हम साफ देख सकें. जब यह लेंस धीरे-धीरे धुंधला होने लगता है तो उसे मोतियाबिंद (Motiyabind) या कैटेरेक्ट कहते हैं. एम्स नई दिल्ली के डॉ. राजेश सिन्हा, प्रोफेसर, कॉर्निया, लेंस एवं अपवर्तक शल्य चिकित्सा सेवाएं, आर.पी. सेंटर, बता रहे हैं कि मोतियाबिंद के क्या लक्षण होते हैं, इसकी सर्जरी कैसे होती है और सर्जरी के बाद मोतियाबिंद दोबारा हो सकता है या नहीं.
मोतियाबिंद के क्या लक्षण होते हैं
- धुंधला या धुंध जैसा दिखना
- तेज रोशनी में चुभन या ग्लेयर बढ़ना
- रात के समय साफ देखने में कठिनाई होना
- ऐसा महसूस होना जैसे धुंधले शीशे के पार देख रहे हों
मोतियाबिंद धीरे-धीरे और बिना दर्द के बढ़ता है. अक्सर लोगों को तबतक मोतियाबिंद का पता नहीं चलता जबतक यह उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित ना करने लगे.
मोतियाबिंद होने का मुख्य कारण क्या है?
मोतियाबिंद होने का सबसे आम कारण है बढ़ती उम्र. उम्र के साथ लेंस के प्रोटीन बदलने लगते हैं जिससे वह धुंधला हो जाता है. इसके अलावा लंबे समय तक धूप में रहना जिसमें यूवी किरणें होती हैं, डायबिटीज होना, धूम्रपान, लंबे समय तक स्टेरॉयड का उपयोग और आंख की चोट भी मोतियाबिंद का कारण हो सकते हैं.
क्या मोतियाबिंद गंभीर होता है?
डॉ. राजेश सिन्हा के अनुसार, अगर लंबे समय तक इलाज ना किया जाए तो हां, यह गंभीर होता है. यह दृष्टि को काफी कम कर सकता है. बहुत अधिक बढ़ने पर यह लेंस प्रेरित ग्लूकोमा भी पैदा कर सकता है जिससे ऑप्टिक नर्व और स्थायी दृष्टि हानि हो सकती है.
क्या बिना सर्जरी मोतियाबिंद का इलाज हो सकता है?
शुरुआती अवस्था में चश्मे से राहत मिल सकती है, लेकिन मोतियाबिंद धीरे-धीरे बढ़ता जाता है और कोई दवा या ड्रॉप इसे ठीक नहीं कर सकता है. जब दृष्टि रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करने लगे तब सर्जरी जरूरी हो जाती है.
क्या मोतियाबिंद की सर्जरी सुरक्षित है?
मोतियाबिंद की सर्जरी दुनिया की सबसे सुरक्षित प्रक्रियाओं में से एक है. यह एक डे-केयर प्रक्रिया है जिसमें धुंधले लेंस को हटाकर उसकी जगह पर एक कृत्रिम लेंस लगाया जाता है. ज्यादातर मरीजों को कुछ ही दिनों में बेहतर दिखाई देने लगता है.
सर्जरी के बाद क्या मोतियाबिंद दोबारा हो सकता है?
मोतियाबिंद की सर्जरी में आंखों में आर्टिफिशियल लेंस लगाया जाता है. ऐसे में आर्टिफिशियल लेंस में मोतियाबिंद नहीं होता है. लेकिन, कुछ मरीजों में लेंस के पीछे की झिल्ली धुंधली हो सकती है जिसे पोस्टेरियर कैप्सुलर ओपेसिफिकेशन (PCO) कहते हैं. इसे एक आसान लेजर प्रक्रिया से कुछ ही मिनटों में ठीक किया जा सकता है.
क्या मोतियाबिंद वंशानुगत होता है?
हां, मोतियाबिंद वंशानुगत होता है और अगर परिवार में किसी को मोतियाबिंद हुआ है तो व्यक्ति को भी यह हो सकता है. इसीलिए समय-समय पर आंखों की जांच कराना जरूरी है.