Detoxification Benefits: वर्तमान में व्यक्ति को आसानी से ना शुद्ध हवा मिलती है, ना साफ पानी और ना ही टॉक्सिंस फ्री भोजन. लोगों को लगता है कि सिर्फ प्रदूषण की चपेट में आने से ही शरीर में टॉक्सिंस जमते हैं, लेकिन प्रदूषण ही नहीं बल्कि आपका खानपान, केमिकल वाले ब्यूटी प्रोडक्ट्स, घर का सामान और पानी में मौजूद पॉल्यूटेंट्स भी शरीर में टॉक्सिंस जमने की वजह बन सकते हैं. ये टॉक्सिंस शरीर को एक नहीं बल्कि कई तरह से प्रभावित करते हैं. ना सिर्फ ये शरीर को अंदर गंदा करते हैं बल्कि बाहरी तौर पर भी इन टॉक्सिंस का असर नजर आता है. वहीं, इसमें कोई दोराय नहीं कि ये टॉक्सिंस (Toxins) बीमारियों की वजह भी बन सकते हैं. ऐसे में यहां जानिए पतंजलि वेलनेस सेंटर की कौन सी थेरैपीज शरीर को डिटॉक्स कर सकती हैं. इन थेरैपीज में शरीर को अंदर और बाहर से साफ किया जाता है जिससे बीमारियों का खतरा कम होता है सो अलग.

शरीर को डिटॉक्स करेंगी पतंजलि की ये थेरैपीज

योग थेरैपी

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योग शरीर को अंदर और बाहर से साफ ही नहीं करता बल्कि हील भी करता है. पतंजलि के एक्सपर्ट योगाचार्य योग के माध्यम से आपके शरीर को डिटॉक्स होने में मदद करते हैं. अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका और कपालभाति के साथ ही चंद्रभेदी, सूर्यभेदी और नाड़िशोधन योग कराए जाते हैं जो शरीर और मस्तिष्क दोनों को फायदा देते हैं.

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आयुर्वेद

आयुर्वेदिक तकनीकों का प्रयोग कर शरीर को शुद्ध किया जाता है. धरती, आकाश, अग्नि, वायु और जल तत्व की मदद से रोगों से छुटकारा पाने की कोशिश की जाती है. वहीं, अलग-अलग आयुर्वेदिक तेलों और जड़ी-बूटियों का औषधि की तरह इस्तेमाल किया जाता है.

नेचुरोपैथी

शरीर को डिटॉक्स करने में नेचुरोपैथी बेहद काम आती है. इसमें वॉटर वेव मसाज बाथ, हिप बाथ, मड बाथ, सौना बाथ, स्टीम बाथ, ऑयल मसाज और रोज पेटल हनी मसाज वगैरह दिए जाते हैं. ये शरीर को साफ करते हैं, डैमेज को रिपेयर करते हैं और डिटॉक्स करके शरीर के एनर्जी फ्लो को भी बेहतर करते हैं.

पंचकर्म

हीलिंग गुणों से भरपूर पंचकर्म थेरैपी शरीर को डिटॉक्स ही नहीं करती बल्कि बीमारियों को जड़ से खत्म करने का काम करती है. इसमें स्नेहन कर्म से लेकर अभ्यंग, जानू बस्ती, कटी बस्ती, अक्षितर्पण और शिरोधरा आदि किए जाते हैं. पंचकर्म की हर थेरैपी व्यक्ति की बीमारी और दिक्कतों को ध्यान में रखकर दी जाती है.

षटकर्म

शरीर को बेहतर तरह से डिटॉक्स करती है षटकर्म थेरैपी, इसमें नाक, नाभि और आंतों तक की अंदर-बाहर से सफाई होती है. षटकर्म में नेति, धौत, नौली, बस्ती, त्राटक और कपालभाति के माध्यम से शरीर की सफाई होती है.

खानपान बेहतर करने के लिए दी जाती है डाइट थेरैपी

आम स्पा या सेंटर्स से अलग पतंजलि वेलनेस सेंटर शरीर को बाहरी रूप से ही नहीं बल्कि अंदर से भी साफ करते हैं. डाइट थेरैपी में व्यक्ति को खाने की चीजें उनके नेचुरल फॉर्म में दी जाती हैं. इन्हें नेचुरोपैथी फूड कहते हैं. इनमें 80% खाने की चीजें अल्कलाइन यानी कच्ची और 20% एसिडिक यानी पकी हुई चीजों को शामिल किया जाता है. इस डाइट प्लान में कोशिश की जाती है कि कच्ची सब्जियां, फल और नेचुरल जूस ही व्यक्ति को दिए जाएं. इससे शरीर बेलेंस होता है, डिटॉक्स होता है और इससे बीमारियों की संभावना कम होती है.

शरीर को डिटॉक्स करने के क्या फायदे होते हैं

एनर्जी बढ़ती है - शरीर को डिटॉक्स करने पर एनर्जी लेवल्स बढ़ने लगते हैं. टॉक्सिंस शरीर की कार्यक्षमता को धीमा कर देते हैं. ऐसे में टॉक्सिंस निकल जाने पर शरीर की ऊर्जा लौट आती है. इससे व्यक्ति का पाचन तंत्र भी बेहतर तरह से काम करने लगता है.

वजन कम होता है - वजन कम होने में भी मदद मिलती है. डिटॉक्सिफिकेशन से पाचन संबंधी दिक्कतें दूर होती हैं, ब्लोटिंग और कब्ज से छुटकारा मिलता है और मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है जिससे वजन कम होने में असर नजर आता है.

त्वचा निखरती है - टॉक्सिंस का असर शरीर पर बाहरी तौर पर भी दिखता है. शरीर में टॉक्सिंस जमने लगते हैं तो स्किन मुरझाई और बेजान नजर आने लगती है. ऐसे में जब शरीर डिटॉक्स हो जाता है तो स्किन पर ग्लो नजर आने लगता है. स्किन के दाग-धब्बे कम हो जाते हैं, एक्ने दूर होता है और स्किन की अन्य दिक्कतें भी कम होने लगती हैं.

इम्यूनिटी बढ़ती है - टॉक्सिंस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को धीमा कर देते हैं. ऐसे में डिटॉक्सिफिकेशन से इम्यूनिटी मजबूत होने में मदद मिलती है. इससे व्यक्ति बार-बार बीमार नहीं पड़ता है.

दिमाग को भी मिलता है फायदा - टॉक्सिंस के कारण व्यक्ति की सोचने- समधने की क्षमता भी प्रभावित होती है. ऐसे में शरीर डिटॉक्स किया जाए तो व्यक्ति को मेंटल क्लैरिटी मिलती है. दिमागी सेहत बेहतर होने में भी डिटॉक्सिफेक्शन का असर नजर आता है.

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