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किडनी की छोटी और लंबी बीमारी क्या है? जानिए कैसे दिखते हैं Kidney Disease के लक्षण

Kidney Disease Symptoms: विश्व स्वास्थ्य संगठन से जानिए किडनी की अक्यूट और क्रोनिक बीमारी क्या होती है और इस बीमारी के लक्षण कैसे दिखते हैं. इस तरह समय रहते पहचानी जा सकती है किडनी डिजीज.

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गुर्दे की बीमारी के लक्षण कैसे दिखते हैं, जानिए यहां. AI Generated Image

Kidney Disease Ke Lakshan: किडनी की बीमारी तब होती है जब किडनी शरीर से गंदगी और एक्सेस फ्लुइड नहीं निकाल पाती है. किडनी डिजीज में अक्यूट किडनी इंजरी और क्रोनिक किडनी डिजीज आते हैं. ये किडनी की बीमारियां हैं जो धीरे-धीरे बढ़ती जाती हैं और अगर समय रहते इलाज ना हो तो इररिवर्सिबल हो सकती हैं. इससे किडनी की छोटी दिक्कतों से लेकर किडनी फेलियर तक की नौबत आ सकती है. किडनी फेलियर में लोगों को डायलिसिस की जरूरत होती है या जीने के लिए ट्रांसप्लांट करवाना जरूरी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, जानिए किडनी की छोटी और बड़ी बीमारी क्या है और किडनी की बीमारी में कैसे लक्षण (Kidney Disease Symptoms) नजर आते हैं.

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किडनी की बीमारियों के लक्षण

किडनी की बीमारी अक्सर आखिरी स्टेज तक पहुंचने तक बिना किसी लक्षण वाली होती है. ऐसे में रेगुलर टेस्टिंग से किडनी डिजीज को कंफर्म किया जा सकता है. किडनी डिजीज एडवांस होने पर व्यक्ति को हर समय थकान महसूस हो सकती है, सांस फूलने लगती है, शरीर के अलग-अलग हिस्सों में खुजली हो सकती है, पैरों में सूजन आ सकती है, मसल्स में दर्द हो सकता है, जी मितलाने की दिक्कत होती है और उल्टी आ सकती है.

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अक्यूट किडनी इंजरी क्या है

अक्यूट किडनी इंजरी (AKI) को किडनी की छोटी बीमारी कहा जा सकता है. अक्यूट किडनी इंजरी (Acute Kidney Injury) में किडनी का काम धीरे-धीरे बिगड़ने लगता है. AKI लंबे समय तक बना रहे तो क्रोनिक किडनी डिजीज की बीमारी बन सकती है. अक्यूट किडनी इंजरी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे सेप्सिस, मेजर सर्जरी, ट्रॉमा, प्रेग्नेंसी में आई कॉम्प्लिकेशन, नेफ्रोटॉक्सिक मेडिकेशंस और वॉल्यूम डेप्लेशन.

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अक्यूट किडनी इंजरी से कैसे बचें – शरीर में होने वाली पानी की कमी को पूरा करके, इंफेक्शंस और प्रेग्नेंसी से जुड़े कॉम्पिलकेशंस से बचकर अक्यूट किडनी इंजरी से बचा जा सकता है.

क्रोनिक किडनी डिजीज क्या है

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क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन, कार्डियोवेस्कुल डिजीज यानी दिल से जुड़ी बीमारियां और किडनी के फिल्टरिंग यूनिट में होने वाली सूजन. इसके अलावा कुछ जेनेटिक कंडीशंस, कुछ दवाएं, टॉक्सिंस और इंफेक्शंस भी क्रोनिक किडनी डिजीज (Chronic Kidney Disease) की वजह बन सकते हैं.

क्रोनिक किडनी डिजीज से कैसे रहें बचकर – हेल्दी लाइफस्टाइल, रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी, हेल्दी बॉडी वेट मैनेज करके और तंबाकू के सेवन से बचकर क्रोनिक किडनी डिजीज से बचा जा सकता है. डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की दिक्कतों से बचकर भी CKD को डेवलप होने से रोका जा सकता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source - WHO

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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