Stress Management: आयुर्वेद में तनाव को सिर्फ एक मानसिक समस्या नहीं बल्कि शरीर और मन के असंतुलन के रूप में देखा जाता है. आयुर्वेद कहता है कि शरीर में वात दोष बढ़ने पर मन में अस्थिरता और तनाव बढ़ता है. देखा जाए तो वर्तमान में भागदौड़ भरी जिंदगी और व्यस्त जीवनशैली में व्यक्ति के लिए काम और घर के बीच खुद के लिए समय बचा ही नहीं है. वहीं, सोशल मीडिया पर दूसरों की परफेक्ट जिंदगी देखकर खुद को कम समझना भी आम है. आर्थिक, सामाजिक और शारीरिक अंतर के चलते तनाव और एंजाइटी बढ़ते जा रहे हैं. ऐसे में दवाएं या कुछ ऑवर द टॉप करने के बजाय आयुर्वेद के सिंपल नुस्खे ( Ayurvedic Remedies) या प्राणायाम कर लिए जाएं तो स्ट्रेस और एंजाइटी को कम किया जा सकता है. योगगुरु बाबा रामवेद और आयुर्वेदिक एक्सपर्ट आचार्य बालकृष्ण के बताए योग और आयुर्वेदिक मैथड स्ट्रेस कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं.

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स्ट्रेस कम करते हैं ये प्राणायाम

अनुलोम विलोग - रोजाना अनुलोम विलोम किया जाए तो ये शरीर की नसों को डिटॉक्स करता है और तनाव को कम करने में असरदार है. अनुलोम विलोम करने पर श्वसन संबंधी दिक्कतें भी दूर होती हैं.

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भस्त्रिका - शरीर में ऑक्सीजन लेवल को बढ़ाकर नकारात्मक विचारों को बाहर निकालने में मददगार है भस्त्रिका प्राणायाम.

भ्रामरी - यह प्राणायाम मस्तिष्क की पीनियल और पिट्यूचरी ग्लैंड्स को सक्रिय करते हैं. इसे करने पर मन शांत महसूस करता है.

योगासन जिनसे तनाव और एंजाइटी से मुक्ति मिलती है

  • शीर्षासन और सर्वांगसन करने पर मस्तिष्क तक रक्त प्रवाह बेहतर होता है जिससे मानसिक थकान कम होती है.
  • योगमुद्रासन और मंडूकासन पेट को ठीक रखने में मदद करते हैं जिनसे मन को ठीक रहने में मदद मिलती है.

ये आयुर्वेदिक औषधियां हैं असरदार

चित्त की शुद्धि और वात शांति पर जोर देते हुए तनाव दूर करने के लिए आयुर्वेदाचार्य कुछ आयुर्वेदिक औषधियों के सेवन की सलाह देते हैं. ये औषधियां पतंजलि की सबसे प्रसिद्ध औषधियों में से हैं और तनाव कम करने के लिए रामबाण मानी जाती हैं.

मेधा वटी - तनाव, एंजाइटी और अनिद्रा को दूर करने में असरदार है.
बादाम पाक - मस्तिष्क की नसों को पोषण देने के लिए इसे दूध में मिलाकर पी सकते हैं.

अश्वगंधा - शरीर में कोर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन को कम करने के लिए अश्वगंधा की गोलियां या अश्वगंधा पाउडर का सेवन किया जा सकता है.

नस्य चिकित्सा भी है कारगार

आयुर्वेद में नस्य चिकित्सा को शरीर के अनेक रोगों से छुटकारा पाने के लिए बेहद कारगर माना जाता है. नस्य चिकित्सा में दिल्य अणु तेल नाक में डाला जाता है. इसमें बादाम रोगन या अन्य आयुर्वेदिक तेलों का इस्तेमाल हो सकता है. नस्य चिकित्सा नाक से सीधा दिमाग पर असर डालती है जिस संदर्भ में कहते हैं 'नासा हि शिरसो द्वारम'. ऐसे में तनाव से मुक्ति के लिए नस्य चिकित्सा का सहारा लिया जा सकता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.