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ना खांसी, ना तेज बुखार… फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है साइलेंट निमोनिया; ये लक्षण न करें नजरअंदाज

Silent Pneumonia: ठंड और पॉल्यूशन की वजह से साइलेंट निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है. हालांकि, इस बीमारी के लक्षण बुखार और खांसी के बिना भी नजर आ सकते हैं. इसलिए बच्चे और बुजुर्ग अपना बहुत ही ज्यादा ख्याल रखें.  

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निमोनिया फेफड़ों का एक गंभीर इंफेक्शन है, जो बैक्टीरिया, वायरस या फंगस की वजह से होता है. Image Credit- AI

बदलते मौसम और पॉल्यूशन की वजह से लोगों को कई तरह की परेशानियां होने लगती हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इन दोनों चीजों का असर सबसे पहले हेल्थ पर ही पड़ता है. अगर आपको फेफड़ों की बीमारी है तो ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है. हालांकि, नेशनल हार्ट, लंग्स एंड ब्लड इंस्टीट्यूट की एक रिसर्च के मुताबिक, ज्यादातर लोग सर्दी-जुकाम, हल्की खांसी या थकान को मौसमी परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कुछ मामलों में ये लक्षण फेफड़ों में इंफेक्शन का संकेत भी हो सकते हैं. इसे साइलेंट निमोनिया कहा जाता है, जिसके शुरुआत में लक्षण बहुत हल्के हो सकते हैं या फिर नजर नहीं आते हैं. कई बार तेज बुखार या खांसी भी नहीं होती और इसके बावजूद इंसान की हालत गंभीर हो जाती है. इसलिए सर्दियों में हल्का बुखार या खांसी हो जाने को बिल्कुल आम न समझें और तुरंत डॉक्टर से बात करके इलाज कराएं.

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निमोनिया क्या होता है? 

नेशनल हार्ट, लंग्स एंड ब्लड इंस्टीट्यूट की रिसर्च में बताया गया है कि निमोनिया फेफड़ों का एक गंभीर इंफेक्शन है, जो बैक्टीरिया, वायरस या फंगस की वजह से होता है. यह तीन तरह से शरीर में फैल सकता है.

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वायरल निमोनिया

यह बीमारी वायरस से फैलती है, जिसके शुरुआती लक्षण नजर नहीं आते हैं लेकिन सीधा फेफड़ों पर असर डालते हैं. इसका पता लगाने के लिए आपको अस्पताल में एक्स-रे करवाना होगा.

बैक्टीरियल निमोनिया

इस बीमारी में इंसान को कई तरह की परेशानियां होने लगती हैं. इस दौरान तेज बुखार, खांसी, सीने में दर्द और सांस फूलने जैसी दिक्कत होने लगती हैं.

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फंगल निमोनिया

फेफड़ों में जमे पुराने बलगम या नमी में पनपने वाला फंगस कमजोर इम्यूनिटी की वजह से पैदा होता है. अगर इस बीमारी में वक्त पर ध्यान न दिया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकता है. 

फिर साइलेंट निमोनिया क्या है?

साइलेंट निमोनिया फेफड़ों का ही इंफेक्शन है, जिसमें फेफड़ों की छोटी थैलियों में सूजन आने लगती है और उसमें मवाद भर जाता है, जिससे सांस लेने में परेशानी होती है. वहीं, जब निमोनिया के लक्षण शुरुआत में दिखाई नहीं देते या कम गंभीर लगते हैं तो इसे आम बोलचाल में साइलेंट निमोनिया कहा जाता है. इसे निमोनिया की पहली स्टेज कहा जा सकता है. इस दौरान मरीज को इंफेक्शन का पता देर से चल सकता है और इलाज में देरी होने का खतरा बढ़ जाता है. 

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बुजुर्गों का ज्यादा रखें ख्याल 

बुजुर्गों में निमोनिया का खतरा ज्यादा हो सकता है, खासकर तब जब उनकी इम्यूनिटी कमजोर हो या वे पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे हों. उम्र बढ़ने के साथ संक्रमण के लक्षण भी अलग तरीके से दिखाई दे सकते हैं. हालांकि, कुछ बुजुर्गों में तेज बुखार या लगातार खांसी के बजाय अचानक कमजोरी, भूख कम लगना, थकान, भ्रम या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं. इसलिए उम्रदराज लोगों की हेल्थ पर ज्यादा ध्यान दें और हल्का बुखार होने पर डॉक्टर के पास जाएं. 

किन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

साइलेंट निमोनिया में हर इंसान को एक जैसे लक्षण नहीं होते. हालांकि, कुछ संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है, जिन्हें नीचे बताया गया है. 

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  • अगर आपको बिना काम किए जरूरत से ज्यादा थकान महसूस होने लगे तो ऐसे लक्षण को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें. 
  • चलते समय या आराम करते वक्त सांस लेने में दिक्कत हो और ऐसा लगातार नजर आए तो एक बार डॉक्टर से जरूर बात करें. 
  • खांसी का लंबे समय तक बने रहना या दवा खाने के बाद भी खांसी का असर कम न होना भी साइलेंट निमोनिया का लक्षण हो सकता है. 
  • खाने का मन न करना या नॉर्मल से कम खाना भी इस बीमारी का शुरुआती लक्षण हो सकता है. 
  • सांस लेने या खांसते वक्त सीने में दर्द महसूस होना और यह कई दिनों से लगातार यह लक्षण नजर आना भी इस बीमारी का लक्षण है.  

प्रदूषण और बदलता मौसम कैसे बढ़ा सकते हैं परेशानी?

दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों में एयर पॉल्यूशन, धूल और धुएं की वजह से सीने में जलन बढ़ सकती है. इससे अस्थमा और सीओपीडी जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों को और परेशानी हो सकती है. हालांकि, प्रदूषण को सीधे साइलेंट निमोनिया का कारण नहीं माना जा सकता. निमोनिया आमतौर पर संक्रमण के कारण होता है, जबकि प्रदूषण सांस लेने जैसी परेशानियों को बढ़ा सकता है. इसलिए प्रदूषण के दौरान सांस संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय उनकी सही वजह का पता लगाना जरूरी है. 

साइलेंट निमोनिया से बचने के लिए क्या करें?

निमोनिया से बचने और इंफेक्शन को कम करने के लिए आपको कुछ बातों पर ध्यान देना होगा. 

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  • मास्क पहनना 
  • हाथों की सफाई रखना 
  • इंजेक्शन लगवाना 
  • बैलेंस डाइट लेना 
  • फेफड़ों का टेस्ट कराते रहना 

साथ ही, पॉल्यूशन ज्यादा होने पर सुबह या फिर शाम के वक्त बाहर निकलने से बचें. अगर आपको अस्थमा, दिल या शुगर की बीमारी है तो अच्छी डाइट लें और नियमित रूप से टेस्ट कराते रहें.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source- NHLBI

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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