हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

बच्चों की आंखों में बढ़ रहा कैंसर का खतरा, इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरंदाज

विज्ञापन
Retinoblastoma

Retinoblastoma an eye cancer that begins in retina: देश में हर साल दो हजार बच्चे आंखों के कैंसर का शिकार हो रहे हैं। इसमें बच्चों को धुंधला दिखने लगता है। उनकी आंखों की पुतली पर सफेदी आने लगती है। इस तरह के लक्षण दिखें तो तत्काल अलर्ट हो जाना चाहिए। दिल्ली एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में आंखों के कैंसर आरबी (रेटिनोब्लास्टोमा) के इलाज में सामान्य कीमोथेरेपी इलाज में बेअसर हो जाए तो इंट्रा आर्टीरीअल कीमोथेरेपी (आइएसी) के जरिये मरीज की आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है। इस तकनीक में धमनी के माध्यम से कैथेटर डालकर आंख के सीधे ट्यूमर पर टारगेट कीमोथेरेपी दी जाती है।

AIIMS Doctors Team

एम्स ही इसके इलाज में अग्रदूत

एम्स में इस तकनीक से इलाज की सुविधा पाने वाले आंखों के कैंसर से पीड़ित 65 प्रतिशत बच्चों की आंखों की रोशनी बच गई। एम्स के आरपी सेंटर की प्रोफेसर और नेत्र कैंसर विशेषज्ञ डा. भावना चावला और इंटरवेंशनल न्यूरो रेडियोलाजी के विभागाध्यक्ष डा. शैलेश गायकवाड़ ने यह जानकारी दी।एम्स के डाक्टर कहते हैं कि एम्स के अलावा दिल्ली के अन्य किसी अस्पताल में इसकी सुविधा नहीं है। देश में भी कुछ ही अस्पतालों में इसकी सुविधा है।

विज्ञापन

सरकारी क्षेत्र के अस्पतालों में इसकी सुविधा का अभाव है। इस वजह उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यम प्रदेश व राजस्थान से आंखों के कैंसर से पीड़ित बच्चे इलाज के लिए अधिक पहुंचते हैं। नए एम्स से भी रेफर किए हुए मरीज यहां पहुंचते हैं।

Dr Shailesh

विज्ञापन

इंटरवेंशनल न्यूरो रेडियोलाजी का इस बीमारी पर कैसे होता है इस्तेमाल

डा. शैलेश गायकवाड के मुताबिक इस तकनीक में जांघ के पास की धमनी में नीडल डालकर एक सूक्ष्म कैथेटर मस्तिष्क को खून संचार करने वाली आंतरिक कैरोटिड धमनी से होते हुए आंखों की धमनी तक ले जाया जाता है। इसके माध्यम से सीधे आंख के ट्यूमर में कीमोथेरेपी दी जाती है। इससे कीमो का प्रभाव अधिक होता है और दुष्प्रभाव कम होता है। इस प्रोसीजर में दो से ढाई घंटे समय लगता है।

इस तकनीक में एनेस्थीसिया देकर कीमो दी जाती है। इस प्रोसीजर के लिए नेत्र विज्ञान के कैंसर विशेषज्ञ, इंटरवेंशनल न्यूरो रेडियोलाजी, एनेस्थीसिया और पीडियाट्रिक इन चार विभागों के डाक्टरों का होना जरूरी है। साथ ही उनका ये भी कहना है की चुकी अब ऐसे केस की रिपोर्टिंग बढ़ रही है तो और भी अस्पताल को ऐसे यूनिट बनाने की आवश्यकता है जिसके लिए ये लोग य्रेनिंग देने को तैयार हैं।

विज्ञापन

नेत्र कैंसर की सबसे जायदा संख्या किस आयुवर्ग में देखा जा रहा है

डा. भावना चावला ने बताया कि देश में हर वर्ष करीब दो हजार बच्चे आंखों के कैंसर से पीड़ित होते हैं। इसका एक बड़ा कारण जेनेटिक होता है। समस्या यह है कि जागरूकता के अभाव में ज्यादातर मरीज एडवांस स्टेज में इलाज के लिए पहुंचते हैं। इस वजह से सर्जरी कर आंख को निकालना पड़ता था। आंखों की पुतली में सफेद चमक इसका लक्षण होता है।

इसके अलावा आंखों में तिरछापन, रोशनी कम होना, आंखें लाल होना, सूजन व दर्द भी इसके लक्षण हो सकते हैं। इन लक्षणों को ध्यान में रखकर शुरुआती दौर में ही बीमारी की पहचान कर ली जाए तो आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है। जिन मरीजों में सामान्य कीमो से बीमारी ठीक नहीं होती उन मरीजों के इलाज में आइएसी तकनीक का इस्तेमाल होता है। इस तकनीक से अब तक 170 मरीजों का इलाज हुआ है। जिसमें से 65 प्रतिशत बच्चों की आंखों की रोशनी बच गई।

विज्ञापन

 

यह भी पढ़ें: चुनाव आयोग ने किस तरह से किया भारत में लोकतंत्र को मजबूत?

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola