पेशाब में दिक्कत, धीमी धार और ब्लैडर खाली ना लगना… स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के क्या लक्षण हैं

Prostate Cancer Ke Lakshan: प्रोस्टेट कैंसर होने पर इसके लक्षण शुरुआती दौर में ही पहचान लिए जाएं तो बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है. यहां जानिए प्रोस्टेट कैंसर क्या है, इसके लक्षण और इलाज.

Prostate Cancer Test

प्रोस्टेट कैंसर है या नहीं कैसे पता करें?

Prostate Cancer Symptoms And Signs: पुरुषों के जननांगों का हिस्सा है प्रोस्टेट ग्रंथि. इस ग्रंथि में होने वाले कैंसर को प्रोस्टेट कैंसर कहते हैं. इस कैंसर में प्रोस्टेट की सेल्स में कैंसर सेल्स पनपने लगती हैं और धीरे-धीरे फैलना शुरू हो जाती हैं. शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण (Prostate Cancer Ke Lakshan) पहचानने मुश्किल होते हैं और जब लक्षण दिखते हैं तो पुरुष उन्हें आम समस्या समझकर इग्नोर कर देते हैं. ऐसे में स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण कैसे दिखते हैं और इसकी जांच किस तरह की जाती है, जानिए यहां.

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पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के क्या लक्षण हैं?

  • पेशाब करने में दिक्कत आ सकती है
  • अचानक बहुत तेज पेशाब लगने लगता है
  • सामान्य से ज्यादा पेशाब आने लगता है
  • पेशाब की धार धीमी हो जाती है
  • ऐसा महसूस होता है जैसे पेशाब करने के बाद भी ब्लैडर खाली नहीं हुआ है
  • सीमेन में खून नजर आता है
  • इरेक्टाइल डिस्फंक्शन हो सकता है
  • हड्डियों में दर्द महसूस होता है
  • रेयर मामलों में पेशाब में खून (Blood In Urine) नजर आ सकता है
  • ब्लैडर या बाउल कंट्रोल चला जाता है क्योंकि कैंसर की ग्रोथ स्पाइनल कोर्ड पर दबाव बनाने लगती है
  • कमजोरी होने लगती है, हाथ-पैर सुन्न पड़ सकते हैं

इस बात को समझना जरूरी है कि पेशाब में होने वाली दिक्कतें बढ़े हुए प्रोस्टेट का लक्षण भी हो सकती हैं. इसीलिए पैनिक होने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना और जांच कराना जरूरी है.

प्रोस्टेट कैंसर की स्टेज

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प्रोस्टेट कैंसर की पहली स्टेज में ट्यूमर प्रोस्टेट तक ही सीमित होता है. दूसरी स्टेज में ट्यूमर प्रोस्टेट में ही होता है लेकिन इसमें PSA लेवल्स ज्यादा होते हैं. तीसरी स्टेज में ट्यूमर प्रोस्टेट की आउटर लेयर के बाहर तक फैल चुका होता है. स्टेज 4 कैंसर में ट्यूमर प्रोस्टेट से निकलकर सेमिनल वेसिकल्स, पास के टिशूज या अंग जैसे रेक्टम, ब्लैडर, लिम्फ नोड्स या हड्डियों तक फैल जाता है.

कैसे होती है प्रोस्टेट कैंसर की जांच

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प्रोस्टेट कैंसर को एकदम शुरुआत में पहचानना जरूरी होता है. लेकिन, एडवांस कैंसर के संकेत स्क्रीनिंग या अन्य जांच के तरीकों से पहचाने जा सकते हैं.

मेडिकल हिस्ट्री और फिजिकल एग्जाम – प्रोस्टेट कैंसर की जांच के लिए मरीज की हिस्ट्री देखी जाती है. डॉक्टर पेशाब में दिखने वाले लक्षणों, सेक्शुअल प्रॉब्लम्स या हड्डियों में दर्द वगैरह के बारे में पूछ सकते हैं. इसके अलावा, फिजिकल एग्जाम किया जा सकता है जिसमें डिजिटल रेक्टल इग्जामिनेशन भी शामिल होता है. इसमें ल्यूब्रिकेटेड ग्लव्ड फिंगर से रेक्टम के अंदर से जांचा जाता है कि प्रोस्टेट के आस-पास किसी तरह की गांठ तो नहीं बन रही है.

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PSA ब्लड टेस्ट – PSA ऐसा सब्सटेंस है जिसे प्रोस्टेट ग्रंथि बनाती है. इस प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजेन यानी PSA टेस्ट को स्क्रीनिंग टेस्ट की तरह किया जाता है. जिन पुरुषों में लक्षण नहीं दिखते हैं उनमें इस टेस्ट से प्रोस्टेट कैंसर की जांच होती है. यह टेस्ट उन पुरुषों में भी किया जाता है जिनमें प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण नजर आते हैं.

ट्रांसरेक्टल अल्ट्रासाउंडर (TRUS) – इस टेस्ट को करने के लिए एक छोटा ल्यूब्रिकेटेड प्रोब रेक्टम में डाला जाता है जिससे प्रोस्टेट की तस्वीरें कंप्यूटर स्क्रीन पर देखी जा सकें. यह टेस्ट तब होता है जब मरीज का DRE या PSA एब्नॉर्मल होता है. यह बायोप्सी के लिए प्रोस्टेट के आकार की जांच करने के लिए भी किया जाता है.

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प्रोस्टेट बायोप्सी – अगर डॉक्टरों को लक्षण देखकर प्रोस्टेट कैंसर का शक होता है तो प्रोस्टेट की बायोप्सी की जाती है. ट्रांसरेक्टल अल्ट्रासाउंड गाइडेंस से बायोप्सी की जाती है. इसमें 10 मिनट का समय लगता है. इस बायोप्सी को पाथोलॉजिस्ट टेस्ट करता है और देखता है कि कैंसर सेल्स नजर आ रहे हैं या नहीं.

इमेजिंग टेस्ट – प्रोस्टेट कैंसर कितना फैला है और कितना नहीं यह देखने के लिए इमेजिंग टेस्ट किया जाता है.

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बोन स्कैन – प्रोस्टेट कैंसर हड्डियों तक भी फैल सकता है. ऐसे में हड्डियों के टेस्ट के लिए CT स्कैन या MRI स्कैन किया जाता है.

कम्प्यूटेड टोमोग्राफी (CT) स्कैन – प्रोस्टेट कैंसर लिम्फ नोड्स या अन्य अंगों तक फैला है या नहीं यह पता लगाने के लिए यह टेस्ट किया जाता है.

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प्रोस्टेट कैंसर का ट्रीटमेंट

  • प्रोस्टेट कैंसर की स्टेज 1 और 2 में सर्जरी की जाती है जिसमें प्रोस्टेट ग्रंथि को निकाल दिया जाता है कुछ आस-पास के कुछ टिशूज या लिम्फ नोड्स हटा दिए जाते हैं. रेडिएशन थेरेपी दी जाती है.
  • स्टेज 3 के इलाज के लिए सर्जरी होती है, रेडिएशन दी जाती है और हार्मोनल थेरेपी दी जाती है.
  • स्टेज 4 में हार्मोन थेरेपी और कीमोथेरेपी भी दी जाती है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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