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आयोडीन की कमी का कारण बन रहा है काला नमक, ट्रेंड के चक्कर में घेंघा का खतरा बढ़ा रहे लोग

Iodine Rich Salt: आयोडीन की कमी एक नहीं बल्कि कई स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों की वजह बनती है. ऐसे में यहां जानिए किस तरह काले नमक का सेवन आयोडीन की कमी का कारण बनता है और किस नमक को खाने पर शरीर को पर्याप्त मात्रा में आयोडीन मिल जाता है.

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किस नमक से शरीर को मिलता है आयोडीन. Image Credits - AI

Iodine Deficiency Causes: आयोडीन एक खनिज है जिसकी शरीर को थायराइड हार्मोन्स बनाने के लिए जरूरत होती है. शरीर खुद आयोडीन को प्रोड्यूस नहीं करता है इसीलिए उसे खाने के जरिए आयोडीन की खपत पूरी करनी होती है. लेकिन, खानपान में अगर आयोडीन ना हो तो शरीर में आयोडीन की कमी (Iodine Ki Kami) हो सकती है जिससे व्यक्ति घेंघा जैसे रोगों का शिकार हो सकता है. आयोडीन की इसी कमी को पूरा करने के लिए लोगों को सालों से आयोडीन युक्त नमक खाने की सलाह दी जाती है जिससे शरीर को प्राकृतिक तौर पर आयोडीन मिल सके. लेकिन, आयोडीन युक्त नमक के बजाय काले नमक या पिंक सॉल्ट (Pink Salt) के सेवन से शरीर में आयोडीन की कमी होने लगी है.

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काला नमक बढ़ा रहा है समस्या

AIIMS के एंड्रोकिनोलॉजी विभाग के प्रोफेसर रविंदर गोस्वामी और डॉ. सोमा साहा के अनुसार, इन नमकों (काले नमक) में आयोडीन की मात्रा बहुत कम होती है. इससे शरीर में आयोडीन की कमी से थायराइड हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है जिससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास रुक सकता है और घेंघा रोग का खतरा बढ़ जाता है.

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आयोडीन की कमी से प्रेग्नेंट महिलाओं में गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को भारी नुकसान पहुंच सकता है.

आयोडीनयुक्त नमक खाना है जरूरी

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साल 1962 में राष्ट्रीय घेंघा नियंत्रण कार्यक्रम शुरू हुआ था जो 1992 में राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम बन गया. इस पहल का मकसद आयोडीन नमक की उपलब्धता बढ़ाना और नमक की क्वालिटी जानना, मूत्र में आयोडीन के स्तर की निगरानी और लोगों के बीच आयोडीन को लेकर जागरूकता पर फोकस करना था. द लांसेट रीजनल हेल्थ साउथईस्ट एशिया में 2026 में छपी ICMR की स्टडी में बताया गया था कि 10 से 18 वर्ष के 8093 स्कूली बच्चों का आकलन करने पर घेंघा की दर 10.3 पाई गई. ऐसे में आयोडीन की कमी को पूरा करने पर जोर देना जरूरी है और खानपान में आयोडीनयुक्त नमक होना अनिवार्य.

कैसे छूटी आयोडीनयुक्त नमक लेने की आदत

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हालिया वर्षों में टीवी और सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य और हेल्दी खानपान पर जोर देते हुए काले नमक या सेंधा नमक जैसे दूसरे नमकों को साधारण सफेद नमक से ज्यादा बेहतर बताया जाता रहा है. काले नमक में खनिज ज्यादा बताए गए और कहा गया कि यह शरीर को डिटॉक्स करता है और हाइड्रेशन बढ़ाने के साथ ही ब्लड प्रेशर जैसी दिक्कतों को दूर करता है. लेकिन, काला नमक और साधारण नमक दोनों में ही 98% सोडियम क्लोराइड होता है और यह ब्लड प्रेशर को एक सा ही प्रभावित करते हैं. वहीं, काले नमक में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा नहीं होती है और इसीलिए इस नमक को खाने पर शरीर में आयोडीन की कमी होने लगती है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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