Ovarian Cancer Ke Lakshan: महिलाओं में अंडाशय या ओवरी का कैंसर तब होता है जब ओवेरियन ट्यूब में एब्नॉर्मल सेल्स पनपने लगती हैं और तेजी से बढ़ने लगती हैं. इससे ट्यूमर (Tumor) बनना शुरू हो जाता है. इस ट्यूमर की समय रहते पहचान हो जाए तो सर्वाइवल रेट बढ़ जाता है. महिलाओं के साथ ओवेरियन या सर्वाइकल कैंसर में सबसे बड़ी परेशानी यह आती है कि इन कैंसर के लक्षण आम दिक्कतों जैसे ही लगते हैं और इसीलिए पहचानने मुश्किल होते हैं. लेकिन, अगर सटीक लक्षण पता हों और ये लक्षण कई दिनों से जस के तस बने हुए हों तो डॉक्टर से जांच करवा लेनी चाहिए. स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, यहां उन 3 दिक्कतों का जिक्र किया जा रहा है जो पेट से जुड़ी हैं और अंडाशय के कैंसर का लक्षण (Ovarian Cancer Symptoms) हो सकती हैं.
ओवेरियन कैंसर के क्या लक्षण होते हैं
- ओवेरियन कैंसर में हर समय पेट फूला हुआ महसूस हो सकता है, खाना खाने में तकलीफ होती है और कुछ खाते ही पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है.
- पेट में दर्द रहता है, पेट के निचले हिस्से में या पेल्विस में दर्द रहता है.
- पेशाब से जुड़ी दिक्कतें होने लगती हैं, खासतौर से एकदम से पेशाब लगता है और पेशाब कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है.
इन दिक्कतों पर भी रखें नजर
ओवरी के कैंसर में पीरियड्स से जुड़ी दिक्कतों पर भी नजर बनाए रखना जरूरी है. पीरियड्स ना आना, बहुत ज्यादा दिनों तक आना, बहुत कम आना या फिर मेंस्ट्रुअल साइकिल का बदल जाना वगैरह परेशानियों में डॉक्टर से जांच जरूर कराएं. लंबे समय से कब्ज की दिक्कत होना, पेट में प्रेशर महसूस होना, शरीर में बहुत ज्यादा थकान रहना और शारीरिक संबंध बनाते हुए दर्द होना भी खतरे की घंटी हो सकता है, इन दिक्कतों को नजरअंदाज ना करें.
ओवेरियन कैंसर का इलाज कैसे होता है
सर्जरी – ओवेरियन कैंसर के ज्यादातर मामलों में सर्जरी (Ovarian Cancer Surgery) की जा सकती है. ओवेरियन कैंसर में कई बार गर्भाशय को हटाए बिना भी ट्यूमर को निकाला जा सकता है.
कीमोथेरैपी – इस ट्रीटमेंट में मरीज को ऐसी दवा दी जाती है जो शरीर के हर हिस्से तक असर दिखाती है. ऐसा खासकर उन मामलों में होता है जहां कैंसर के फैलने की संभावना नजर आती है.
हार्मोन थेरैपी – कैंसर से लड़ने के लिए हार्मोन ब्लॉकिंग ड्रग्स दिए जाते हैं. ओवेरियन स्टोमल ट्यूमर में यह ट्रीटमेंट प्रभावी होता है.
टार्गेटेड थेरैपी – टार्गेटेड थेरैपी में उन ड्रग्स का इस्तेमाल किया जाता है जो सीधा कैंसर की सेल्स को नष्ट करती हैं और इस दौरान नॉर्मल सेल्स को कम से कम नुकसान पहुंचाती हैं.
रेडिएशन थेरैपी – इसमें हाई एनर्जी पार्टिकल्स या एक्स-रे के इस्तेमाल से कैंसर सेल्स को टार्गेट किया जाता है. ज्यादा रेडिएशन थेरैपी को कीमोथेरैपी के साथ किया जाता है या तब किया जाता है जब मरीज पर बाकी ट्रीटमेंट ज्यादा काम नहीं करते हैं.
ओवेरियन कैंसर के क्या कारण होते हैं
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.