30 घंटे से नहीं सोए हैं तो 20 मिनट का वर्कआउट और 90 मिनट का नैप लेकर कर सकते हैं भरपाई, स्टडी ने बताया मेमोरी को कैसे मिलेगा फायदा

Sleep Deprivation: प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल अकेडमी ऑफ साइंसेस में छपी स्टडी में रिसर्चर्स ने पाया कि किस तरह 30 घंटे तक नींद ना लेने के बाद एक्सरसाइज और नैप फायदेमंद साबित हो सकते हैं. नींद की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए यह नई स्टडी काम की है या नहीं जानिए यहां.

Sleep Deprivation Effects

किस तरह हो सकती है नींद की कमी की भरपाई, जानिए यहां. Image Credits - AI

Sleep Deprivation Effects: नींद की कमी शरीर को एक नहीं बल्कि कई तरह से प्रभावित करती है. कहीं चाभी रखकर भूल जाना, कुछ याद करने में दिक्कत होना या काम में ध्यान ना लगा पाना नींद की कमी के चलते हो सकता है. नींद की कमी दिमाग को ठीक तरह से काम करने में बाधा डालती है और दिमाग को नई यादें बनाने में दिक्कत आती है. ऐसे में नई स्टडी का दावा है कि 30 घंटे से अगर नहीं सोए हैं तो 90 मिनट का नैप और 20 मिनट के वर्कआउट से फायदा मिल सकता है. प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल अकेडमी ऑफ साइंसेस में छपी स्टडी (Study) में रिसर्चर्स ने 18 से 35 वर्षीय स्वस्थ वयस्कों पर स्टडी की और उन्हें 30 घंटे जगाकर लेबोरेट्री मॉनिटरिंग में रखा. इनमें से 18 लोगों ने 20 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज की, 18 लोगों ने 90 मिनट का नैप लिया और 17 लोग 20 मिनट के लिए एक्सरसाइज बाइक पर बैठे. इसके परिणाम हैरान करने वाले निकले.

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30 घंटे ना सोने की भरपाई हो सकती है या नहीं

रिसर्चर्स ने तीनों ग्रूप को 3 दिनों बाद इमेज रेकोगनिशन से टेस्ट किया. एक्सरसाइज ग्रूप ने इमेज को 56% तक पहचान लिया, 90 मिनट का नैप लेने वाले ग्रूप ने 57% तक इमेजेस की पहचान की और एक्सरसाइज बाइक पर बैठने वाले कंट्रोल ग्रूप ने 46% तक इमेजेस को पहचाना. EEG रिकॉर्डिंग्स से पता चला कि पहले 2 ग्रूप्स की एक्सरसाइज और नैप ने मेमोरी को सपोर्ट किया. नैप ग्रूप में स्लीप प्रेशर कम हुआ और न्यूरल फेटिग ने परफॉर्मेंस बेहतर करने में मदद की, वहीं एक्सरसाइज ग्रूप में ब्रेन ने आने वाली इंफोर्मेशन को बेहतर तरह से प्रोसेसड किया. यह खोज नींद की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए प्रासंगिक हो सकती है लेकिन असल जिंदगी में लोगों के लिए फायदेमंद है ऐसा यह स्टडी नहीं कहती.

AIIMS की क्या है राय

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AIIMS, नई दिल्ली की न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट की हेड प्रोफेसर मंजरी त्रिपाठी का कहना है कि नॉन-रेम स्लीप एपिसोडिक मेमोरीज को कंसोलिडेट करने में मदद करती है, जबकि रेपिड आय मूवमेंट स्लीप इमोशनल मेमोरी प्रोसेसिंग को सपोर्ट करती है. अगर बार-बार नींद की कमी होने लगे तो तो ब्रेन फॉग (Brain Fog) होने लगता है, थकान रहने लगती है, याद्दाश्त कमजोर होने लगती है, चिड़चिड़ापन बढ़ता है और इमोशनल आउटबर्स्ट बढ़ता है. नींद की कमी से डिप्रेशन का खतरा भी बढ़ता है.

प्रोफेसर मंजरी का कहना है कि नाइट शिफ्ट करने वाले लोगों को 15 मिनट के नैप्स लेकर फायदा मिल सकता है लेकिन यह 7 से 8 घंटों की पूरी नींद को रिप्लेस नहीं कर सकता है.

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नींद की कमी से क्या होता है

हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग के अनुसार, नींद की कमी एक नहीं बल्कि कई तरह से व्यक्ति को प्रभावित करती है. नींद की कमी से व्यक्ति कहीं भी और कभी भी सो सकता है. गाड़ी चलाते हुए आंख लग जाने के कारण हर साल कई सड़क हादसे होते हैं. जब लोग 2 या 3 दिन तक लगातार नहीं सोते हैं तो उन्हें अपने काम पूरे करने में दिक्कत आने लगती है, मूड स्विंग्स होने लगते हैं, डिप्रेशन हो सकता है और टेंशन बढ़ती है. नींद की कमी से दो-चार हो रहे लोग सुबह और शाम के समय ठीक से काम कर भी लें तो दोपहर के समय या देररात नींद को कंट्रोल नहीं कर पाते हैं और खड़े-खड़े, बैठे हुए, फोन पर बात करते हुए, कंप्यूटर पर काम करते हुए या फिर खाना खाते हुए भी सो सकते हैं.

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अगर व्यक्ति को पार्शियल स्लीप डिप्रिवेशन यानी आंशिक रूप से नींद की कमी हुई है जिसमें व्यक्ति कुछ देर तो सोता है लेकिन 100% नींद नहीं लेता है तो इससे भी सेहत और व्यवहार पर असर पड़ता है. हर समय नींद आना और चिड़चिड़ापन होना, अपने काम पूरे ना कर पाना, शरीर में दर्द होना, थकान रहना, पेट की दिक्कतें होना और कुछ याद ना रख पाने जैसी दिक्कतें होती हैं. इससे भी ड्राइव करते समय सोने की संभावना रहती है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

Source - AIIMS, Harvard

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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