Breast Cancer Symptoms: हर साल भारत में 7 नवंबर के दिन नेशनल कैंसर अवेयरनेस डे (National Cancer Awareness Day) मनाया जाता है. इस दिन को मनाने का मकसद कैंसर के प्रति लोगों को जागरुक करना और कैंसर की जल्द पहचान और इलाज पर जोर देना है. स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाला एक सामान्य कैंसर है जिसके मामले बढ़ने लगे हैं. भारत में कम उम्र की महिलाओं को भी स्तन कैंसर होने लगा है. जागरूकता की कमी के कारण मरीज अक्सर एडवांस स्टेज में जांच के लिए जाते हैं जिससे इलाज में मुश्किल आती हैं. ऐसे में कैंसर की समय रहते जांच बेहद जरूरी है. AIIMS, नई दिल्ली के पैनल डिस्कशन में डॉक्टरों ने स्तन कैंसर के कारणों, लक्षणों और इलाज पर बात की और बताया कि किस तरह समय रहते ब्रेस्ट कैंसर को पहचाना जा सकता है.
स्तन कैंसर के सामान्य लक्षण कौन से हैं
- स्तन या बगल में कोई गांठ निकल आना या त्वचा का सख्त हो जाना
- स्तन से दूध के अलावा खून निकलना या किसी और तरह के पदार्थ का बहना
- स्तन के शेप और साइज में अचानक अंतर आ जाना
- निप्पल की पॉजीशन बदल जाना
- स्तन पर किसी तरह का रैश निकल आना या त्वचा का जरूरत से ज्यादा लाल दिखना
- ब्रेस्ट पर या उसके आस-पास त्वचा का दानेदार हो जाना, सख्त हो जाना
- स्तन की त्वचा का संतरे के छिलके जैसा टेक्सचर हो जाना
- निप्पल का खराब होना, कटना-फटना
ये लक्षण किसी और बीमारी के भी हो सकते हैं, लेकिन डॉक्टर के पास जाना जरूरी है जिससे समय रहते इलाज हो सके. स्टेज 1 में कैंसर की जांच हो जाए तो जान बच सकती है जबकि लास्ट स्टेज में मरीज की जान जाने का खतरा रहता है.
क्या हर गांठ कैंसर की गांठ होती है
डॉक्टर बताते हैं कि हर गांठ (Lump) कैंसर वाली नहीं होती है, यहां तक कि ज्यादातर गांठें कैंसर वाली नहीं होती हैं. इसीलिए पैनिक नहीं करना चाहिए. ज्यादातर कैंसर की गांठ दर्द वाली नहीं होती हैं, लेकिन अगर साथ में कोई और इंफेक्शन होता है तो कैंसर की गांठ में दर्द हो सकता है. हालांकि, बिना पैनिक किए डॉक्टर के पास जाकर इस गांठ को टेस्ट करवाना चाहिए.
कब करवानी चाहिए कैंसर की स्क्रीनिंग
शरीर पर अगर ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण दिख रहे हैं तब स्क्रीनिंग करवानी चाहिए. लेकिन, अगर लक्षण नहीं दिखते हैं तब भी 40 साल की उम्र से ज्यादा की हर महिला को ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग करवानी चाहिए. मेमोग्राम कैंसर को गांठ बनने या निप्पल से डिस्चार्ज आने की स्टेज तक आने से पहले ही पकड़ लेता है. इसलिए 40 की उम्र में मेमोग्रामी करवानी चाहिए, 40 से 50 साल की उम्र में 2 बार मेमोग्राफी करवानी चाहिए. 50 साल की उम्र के बाद हर साल हर महिला को एक बार मेमोग्राफी जरूर करवानी चाहिए.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.