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स्कूल में बच्चे क्यों हो जाते हैं हिंसक, टीचर्स पर गुस्सा निकालने की क्या है वजह? साइकाइट्रिस्ट ने बताया क्या हो सकता है कारण

Why Kids Become Violent: फोर्टिस अस्पताल और अडायु की कंसल्टेंट साइकाइट्रिस्ट डॉ. रिया गुप्ता ने बताया वो कौन से कारक हैं जो बच्चों को वायलेंट बना सकते हैं. रिया ने उन पहलुओं पर बात की है जो बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालते हैं.

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बच्चे को गुस्सा क्यों आता है. AI Generated Image

Children Psychology: आयदिन ऐसे मामले सामने आते हैं जहां बच्चों को हिंसक होते देखा जाता है. पिछले दिनों तेलंगाना के नलगोंडा से खबर आई थी कि 2 छात्रों ने अपने स्कूल की प्रिंसिपल का कत्ल किया था. ऐसे मामले सामने आते हैं तो मन में सवाल भी आता है कि बच्चे आखिर इतने हिंसक क्यों हो जाते हैं. सोसाइटी, फैमिली प्रेशर या स्कूल में होने वाली दिक्कतें, क्या है जो बच्चों को वायलेंट (Violent) बना देता है? फोर्टिस अस्पताल और अडायु की कंसल्टेंट साइकाइट्रिस्ट डॉ. रिया गुप्ता ने बताया ऐसे कौन से फैक्टर्स हैं जो बच्चे को हिंसक बना सकते हैं.

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बच्चे क्यों हो जाते हैं हिंसक

साइकाइट्रिस्ट डॉ. रिया गुप्ता बताती हैं, “बच्चे या किशोर का हिंसक व्यवहार बहुत परेशान करने वाला होता है, लेकिन इससे हमें दबाव में जी रहे सभी युवाओं को खतरनाक नहीं मान लेना चाहिए. हिंसा अक्सर बच्चे की अपनी कमजोरियों और उसके आस-पास के माहौल के बीच जटिल तालमेल से पैदा होती है.”

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साइकाइट्रिस्ट ने आगे कहा, “कुछ बच्चे लगातार पढ़ाई के दबाव, बेइज्जती, बुलीइंग, घर में झगड़े, नजरअंदाजी, घरेलू हिंसा या भावनात्मक रूप से सुरक्षित बड़ों की कमी का सामना करते हैं. जब निराशा, शर्म, गुस्सा और बेबसी की भावना को पहचाना या संभाला नहीं जाता तो वे आक्रामकता के रूप में बाहर आ सकते हैं. दोस्तों का इंफ्लुएंस बार-बार हिंसक कंटेंट देखना, आवेग पर काबू न रख पाना, बड़े किशोरों में नशीले पदार्थों का इस्तेमाल और यह गलत सोच कि हिंसा से सम्मान मिलता है, ये सब जोखिम बढ़ा सकते हैं. हालांकि, तनाव का सामना करने वाले ज्यादातर बच्चे हिंसक नहीं बनते, साथ सपोर्टिव रिलेशनशिप और समय पर मदद बचाव के मजबूत फैक्टर्स हैं.”

इन चेतावनी संकेतों को गंभीरता से लेना है जरूरी

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साइकाइट्रिस्ट कहती हैं कि बड़ों को चेतावनी के संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए. साइकाइट्रिस्ट ने कहा, “ऐसे कुछ संकेत हैं जिनपर नजर रखना जरूरी है, जैसे अचानक सबसे अलग-थलग हो जाना, बार-बार आक्रामक व्यवहार, धमकियां देना, क्रूरता, व्यवहार में बड़े बदलाव, या बेइज्जती के बाद बहुत ज्यादा गुस्सा आना. स्कूलों और परिवारों को डर पर आधारित अनुशासन के बजाय खुली बातचीत, काउंसलिंग की सुविधा, बुलीइंग रोकने के सिस्टम, इमोशनल स्किल्स की शिक्षा और शुरुआत में ही प्रोफेशनल मदद की जरूरत है. हिंसा के बाद जवाबदेही जरूरी है, लेकिन इसकी रोकथाम बहुत पहले ही शुरू हो जाती है जब बच्चों को यह महसूस कराया जाता है कि उनकी बात सुनी जा रही है, उन्हें सही दिशा मिल रही है और वे सुरक्षित रूप से जुड़े हुए हैं.”

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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