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लगातार खांसी या आवाज बैठना सिर्फ सर्दी नहीं! डॉक्टर ने बताया कब बन सकती हैं ये दिक्कतें कैंसर का लक्षण

Cancer Symptoms: खांसी और जुकाम ऐसी दिक्कतें हैं जो अक्सर ही लोगों को अपनी चपेट में ले लेती हैं. खासकर बरसात के मौसम में ऐसा हो जाता है. लेकिन, डॉक्टर का कहना है कि ये दिक्कतें अगर लंबे समय तक बनी रहें तो कैंसर का लक्षण भी हो सकती हैं.

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हर समय आवाज बैठे रहना किस कैंसर का लक्षण है?

Throat Cancer Symptoms: मौसम बदलने, वायरल संक्रमण या एलर्जी के कारण खांसी और गले में खराश होना आम बात है. लेकिन अगर खांसी 3 हफ्तों से अधिक समय तक बनी रहे या आवाज लगातार बैठी रहे तो इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लक्षण कुछ मामलों में फेफड़ों (Lung Cancer) या गले के कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं. इस बारे में बता रहे हैं डॉ. विष्णु हरि, एसोसिएट डायरेक्टर एवं विभागाध्यक्ष – मेडिकल ऑन्कोलॉजी, हेमेटोलॉजी एवं बोन मैरो प्रत्यारोपण (बीएमटी) सर्वोदय अस्पताल, फरीदाबाद. आइए डॉक्टर से ही जानते हैं कब खांसी और गला बैठना कैंसर का लक्षण हो सकता है.

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लगातार खांसी और गला बैठना

डॉ. विष्णु हरि के अनुसार, हर लगातार रहने वाली खांसी कैंसर का संकेत नहीं होती है, ज्यादातक मामलों में इसके पीछे संक्रमण, एलर्जी या अस्थमा जैसी समस्याएं होती हैं. लेकिन यदि खांसी तीन सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे, खांसी के साथ खून आए, आवाज लगातार बैठी रहे या सांस लेने में तकलीफ हो, तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच करानी चाहिए.

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किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

विशेषज्ञ बताते हैं कि ये लक्षण दिखाई दें तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें –

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  • तीन सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी
  • खांसी में खून आना
  • आवाज का लंबे समय तक बैठ जाना
  • निगलने में दर्द या कठिनाई
  • सांस फूलना या सीने में दर्द
  • बिना वजह तेजी से वजन घटना
  • लगातार थकान और कमजोरी
  • गर्दन में गांठ महसूस होना

किन लोगों को है ज्यादा खतरा

डॉक्टर बताते हैं कि धूम्रपान फेफड़ों और गले के कैंसर का सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है. हालांकि केवल धूम्रपान करने वालों को ही यह बीमारी होती है ऐसा नहीं है. सेकेंड हैंड स्मोक, वायु प्रदूषण, तंबाकू और गुटखा का सेवन, अत्यधिक शराब, कुछ वायरल संक्रमण और परिवार में किसी को कैंसर रहा हो तो भी जोखिम बढ़ सकता है.

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आजकल ऐसे मरीज भी सामने आ रहे हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया, लेकिन प्रदूषण या अन्य कारणों से उन्हें फेफड़ों का कैंसर हुआ. इसलिए केवल धूम्रपान न करने को पूरी सुरक्षा मानना सही नहीं है.

क्या हर आवाज बैठना कैंसर होता है?

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डॉक्टर कहते हैं कि हर बार आवाज बैठना कैंसर नहीं है. आवाज बैठने के कई सामान्य कारण भी हो सकते हैं, जैसे वायरल संक्रमण, गले का अधिक इस्तेमाल, एसिड रिफ्लक्स या एलर्जी. लेकिन यदि आवाज 2 से 3 हफ्तों से अधिक समय तक सामान्य न हो या इसके साथ निगलने में परेशानी, गर्दन में गांठ या सांस लेने में दिक्कत हो तो ईएनटी विशेषज्ञ या ऑन्कोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए.

बचाव के लिए क्या करें?

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कैंसर से बचाव के लिए धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाना जरूरी है. शराब का सीमित सेवन करें, प्रदूषण से बचने के लिए जरूरत पड़ने पर मास्क पहनें, संतुलित आहार लें और नियमित व्यायाम करें. अगर परिवार में कैंसर का इतिहास है या लंबे समय तक जोखिम वाले कारकों के संपर्क में रहे हैं, तो नियमित स्वास्थ्य जांच भी कराते रहें.

लगातार खांसी या आवाज बैठना हर बार कैंसर का संकेत नहीं होता, लेकिन ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें या इनके साथ खून आना, वजन घटना, सांस फूलना या निगलने में परेशानी जैसे संकेत भी हों, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर जांच और सही उपचार से फेफड़ों और गले के कैंसर का जल्द पता लगाया जा सकता है और मरीज के स्वस्थ होने की संभावना काफी बढ़ जाती है.

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समय पर जांच क्यों जरूरी?

डॉक्टर का कहना है कि शुरुआती चरण में कैंसर का पता चलने पर इलाज अधिक प्रभावी होता है. यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार चेस्ट एक्स-रे, सीटी स्कैन, लैरिंगोस्कोपी, ब्रोंकोस्कोपी, बायोप्सी या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं. डॉक्टर कहते हैं कि कई लोग महीनों तक खांसी की दवा लेते रहते हैं लेकिन जांच नहीं कराते. यही देरी बीमारी को गंभीर बना सकती है. ऐसे में देरी करने के बजाय समय रहते डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी होता है.

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यह भी पढ़ें- बवासीर समझकर न करें इग्नोर, ये Colon Cancer का संकेत भी हो सकता है, जानिए कैसे नजर आते हैं लक्षण

अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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