HIV Injection: लेनाकापावीर HIV के इलाज के लिए बनाया गया इंजेक्शन है. यह एक चिकित्सा की दुनिया में एक ब्रेकथ्रू एचआईवी ड्रग है जिसके साल में 2 बार लिए जाने वाले इंजेक्शन एचआईवी से बचाने में मददगार हो सकते हैं. अब यह इंजेक्शन भारत में भी अवेलेबल हो सकता है. भारत के ड्रग रेग्यूलेटर ने 2 फ्रार्मासुटिकल कंपनियों DRL और Emcure को इस दवा को बनाने की मंजूरी दे दी है. एचआईवी की यह दवा लाखों-करोड़ों लोगों को एचआईवी संक्रमण से बचा सकती है. जानिए क्या है यह दवा.
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HIV इंजेक्शन लेनाकापावीर
इस महीने हुई एक बैठक में सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) के तहत सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने डॉ. रेड्डी लैबोरेटरीज और एमक्योर फार्मास्यूटिकल्स के जेनरिक लेनाकापावीर के लिए लोकल फेज III और बायोइक्विवेलेंस ट्रायल वाइवर्स की सिफारिश की. हालांकि, इसने कंपनियों से फेज IV एफिकेसी अध्ययन करने को कहा है. मीटिंग के दौरान डॉ. रेड्डी ने इस इंजेक्शन को 463.5 mg/1.5 ml डोज में बना और बेच सकने का प्रस्ताव रखा और फेज 3 क्लीनिकल ट्रायल और बायोइक्विलेंस स्टजी की छूट के लिए औचित्य भी दिया.
लेनाकापावीर एचआईवी की रोकथाम में इस्तेमाल होने वाली दवा है. यह क्रांतिकारी दवा लंबे समय तक असर करने वाली पहली इनक्लास कैप्सिड इनहिबिटर है. यह एचआईवी वायरस के बाहरी आवरण यानी कैप्सिड प्रोटीन को सीधे लक्षित करती है और उसे रोकती है. इसे हर 6 महीने में एक बार इंजेक्शन के रूप में दियाय जाता है.
विदेश में अप्रूव हो चुकी है यह दवा
मीटिंग में कमिटी ने पाया कि इस ड्रग को यूएस, यूके, कनाडा, यूरोपियन यूनियन, ऑस्ट्रेलिया और कुछ अन्य देशों में मंजूरी मिल चुकी है. कमिटी ने डॉ. रेड्डी का डाटा रिव्यू किया. कमिटी ने दोनों कंपनियों को दवा बनाने की मंजूरी दी है लेकिन यह शर्त रखी है कि कंपनियों को एक फेज 4 पोस्ट मार्केटिंग स्टडी करनी होगी जिसमें प्रभावकारिता के मुख्य मापदंड हों और मार्केटिंग स्वीकृति मिलने के 3 महीनों के भीतर अध्ययन प्रोटोकॉल CDSCO को जमा करना होगा.
हैविली ट्रीटमेंट एक्सपीरियंस वाले मल्टीड्रग रेजिस्टेंट HIV मरीजों के लिए लेनाकापावीर के इस्तेमाल के सवाल पर समिति ने छूट की सिफारिश नहीं की, यह कहते हुए कि भारतीय आबादी में दवा के व्यवहार के बारे में फार्माकोकाइनेटिक्स और जातीय कारकों के संदर्भ में पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं.
क्या है HIV
HIV यानी ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस शरीर की रोग प्रतिशोधक क्षमता (Immunity) पर अटैक करने वाला वायरस है. जब एचआईवी का संक्रमण एडवांस हो जाता है तो इसे एक्यावयर्ड इम्यूनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम यानी AIDS कहते हैं. एचआईवी शरीर की वाइट ब्लड सेल्स को नष्ट करता है जिससे इम्यूनिटी कमजोर होने लगती है. इससे व्यक्ति में टीबी, इंफेक्शंस और किसी-किसी में कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है.
कैसे फैलता है HIV – विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO के अनुसार, एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले फ्लुइड्स की चपेट में आने पर फैल सकता है. संक्रमित व्यक्ति के खून, दूध, सीमेन और वैजाइनल फ्लुइड्स से संपर्क में आने से यह हो सकता है. यह मां से बच्चे को हो सकता है. एचआईवी संक्रमित व्यक्ति को चूमने से, गले लगाने से या खाना शेयर करने से नहीं फैलता है.
HIV के क्या लक्षण होते हैं
एचआईवी से संक्रमित होने पर शुरुआती हफ्तों मे इसके लक्षण महसूस नहीं होते हैं. कुछ लोगों में इंफ्लुएंजा जैसे लक्षण दिख सकते हैं, जैसे बुखार, सिर में दर्द, शरीर पर रैशेज होना और गला खराब होना.
यह संक्रमण बढ़ने लगता है तो इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है. ऐसे में लिम्फ नोड्स में सजून, वजन का कम होना, बुखार, दस्त और खांसी जैसे लक्षण दिख सकते हैं.
अगर HIV का समय रहते इलाज शुरू ना किया जाए तो व्यक्ति ट्यूबरकुलोसिस (TB), क्रिप्टोकोकल मेनिन्जाइटिस, बैक्टीरियल इंफेक्शन और कैंसर की चपेट में आ सकता है. यह अन्य इंफेक्शंस को गंभीर कर देता है जैसे हेपेटाइटिस सी, हेपेटाइटिस बी और एमपॉक्स.
यह समझना जरूरी है कि एचआईवी हो जाने के बाद इसका कोई सटीक इलाज नहीं है बल्कि इसे मैनेज किया जाता है. एचआईवी में होने वाले लक्षणों का इलाज होता है. अगर एचआईवी को ट्रीट ना किया जाए तो यह एड्स बन सकता है.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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Source - WHO
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