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सड़क किनारे मिलने वाले 50-100 रुपए के सनग्लासेस क्या धूप से बचाते हैं? आई सर्जन ने दिया जवाब

Roadside Sunglasses Effects: क्या आप भी सड़क किनारे मिलने वाले सनग्लासेस या कहें 50-100 रुपए के सस्ते ग्लासेस खरीदते हैं? अगर हां, तो डॉक्टर से जानिए ये ग्लासेस कितने असरदार हैं और कितने नहीं.

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सस्ते सनग्लासेस आंखों पर क्या असर डालते हैं, जानिए यहां.

Cheap Sunglasses Effects: गर्मियों के मौसम में लोग अक्सर ही सनग्लासेस खरीदते हैं. सनग्लासेस आंखों को धूप की हानिकारक किरणों से बचाते हैं और धूप में बेहतर तरह से देखने में मदद करते हैं. लेकिन, दुकान से सनग्लासेस खरीदने के बजाय लोग पैसे बचाने के लिए और फैशनेबल नजर आने के लिए सड़क किनारे बिकने वाले सस्ते सनग्लासेस खरीद लेते हैं. लेकिन, क्या ये सनग्लासेस सचमुच इफेक्टिव होते हैं? इसी बारे में बताते हुए ओप्थाल्मोलॉजिस्ट एंड आई सर्जन डॉ. आदित्य मोदी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से वीडियो शेयर किया है. इस पोस्ट में आई सर्जन ने बताया है कि सड़क किनारे मिलने वाले सनग्लासेस का आंखों की सेहत (Eye Health) पर क्या असर होता है.

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क्यों नहीं खरीदने चाहिए सड़क किनारे वाले सनग्लासेस

डॉक्टर कहते हैं कि सड़क किनारे मिलने वाले सनग्लासेस कभी नहीं खरीदने चाहिए. ये सनग्लासेस आपकी आंखों को धूप से बचाने के बजाय असल में आपकी आंखों के लिए हानिकारक होते हैं. ये रंग-बिरंगे सनग्लासेस असल में आम कांच को डाई करके बनाए जाते हैं. इसीलिए ये 50 से 100 रुपए में आसानी से मिल जाते हैं. जिस तरह कपड़ों को डाई किया जाता है बिल्कुल उसी तरह इन ग्लासेस को डाई किया जाता है.

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इन चश्मों से आपको सनग्लासेस वाला फील मिलता है लेकिन असर सनग्लासेस वाला नहीं होता. इन चश्मों से आपको धूप में अच्छा लगता है और सनलाइट का रंग बदला हुआ लगता है, लेकिन ये चश्मे आपको सनलाइट से जीरो प्रोटेक्शन देते हैं. सूरज की पूरी अल्ट्रावायलट लाइट (UV Rays) आपकी आंखों पर पड़ती है.

डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर आप सनग्लासेस लेना चाहते हैं तो आपको एक अच्छी ऑप्टिकल दुकान से ही सनग्लासेस लेने चाहिए. ऐसे चश्मे चुनें जो यूवी प्रोटेक्शन सर्टिफाइड हों या पोलेराइज्ड सर्टिफाइड हों.

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बढ़ सकती हैं ये दिक्कतें

  • सड़क किनारे मिलने वाले सनग्लासेस आपकी पुतलियों को फैलाते हैं जिससे यूवी एक्सपोजर ज्यादा होता है और आंखों को ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है.
  • इन चश्मों का लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाए तो आंखों पर टिशूज की ग्रोथ हो सकती है.
  • कैटेरेक्ट यानी मोतियाबिंद की दिक्कत बढ़ सकती है.
  • इन ग्लासेस से देखने में दिक्कत आती है, आंखों पर जोर पड़ता है, सिर दर्द होता है और धुंधला नजर आ सकता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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