सर्दी-जुकाम, गले में दर्द, बुखार या किसी इंफेक्शन के समय कई लोग तुरंत एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं. कुछ लोगों को लगता है कि बार-बार एंटीबायोटिक लेने से शरीर की बीमारी से लड़ने की ताकत यानी इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, लेकिन क्या वाकई ऐसा होता है? इस बारे में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने भी एंटीबायोटिक के सही इस्तेमाल पर जोर दिया है. ICMR का कहना है कि एंटीबायोटिक का गलत या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल बैक्टीरिया में दवा के खिलाफ ताकत पैदा कर सकता है, जिसे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कहा जाता है. आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि क्या इम्यूनिटी पर असर पड़ता है या नहीं.
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क्या एंटीबायोटिक लेने से इम्यूनिटी कमजोर होती है?
सीधे तौर पर यह कहना सही नहीं है कि एंटीबायोटिक खाने से बॉडी की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है. एंटीबायोटिक का काम बैक्टीरिया से होने वाले इंफेक्शन को खत्म करना या उसे रोकना है. हालांकि, जब बिना जरूरत या बार-बार एंटीबायोटिक ली जाती है तो शरीर के लिए दूसरी परेशानियां पैदा हो सकती हैं. इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक लेना सही नहीं है.
एंटीबायोटिक लेने के नुकसान
- पेट की समस्या होना
- शरीर के अच्छे बैक्टीरिया पर असर पड़ना
- एलर्जी का खतरा होना
- दवा का असर कम होना
बार-बार एंटीबायोटिक लेने का सबसे बड़ा खतरा क्या है?
बार-बार या गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेने का सबसे बड़ा खतरा एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस है. इस स्थिति में कुछ बैक्टीरिया दवा के खिलाफ मजबूत हो जाते हैं और उन पर पहले वाली एंटीबायोटिक का असर कम हो सकता है. इसके बाद इंफेक्शन का इलाज मुश्किल हो सकता है और डॉक्टर को दूसरी दवा की जरूरत पड़ सकती है. ICMR भी एंटीबायोटिक के जरूरत से ज्यादा और गलत इस्तेमाल को मना करता है.
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हर बुखार में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं
यह समझना भी जरूरी है कि हर बुखार या सर्दी-जुकाम में एंटीबायोटिक काम नहीं करती. कई बार इन समस्याओं की वजह वायरस होते हैं, जबकि एंटीबायोटिक बैक्टीरिया पर काम करती है. इसलिए खुद से मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक लेकर खाना सही नहीं है. पहले डॉक्टर यह तय करते हैं कि इंफेक्शन किस वजह से हुआ है और एंटीबायोटिक की जरूरत है या नहीं.
एंटीबायोटिक डॉक्टर की सलाह पर ही लें दवा
अगर डॉक्टर ने एंटीबायोटिक लिखी है तो उसे अपनी मर्जी से शुरू या बंद नहीं करना चाहिए. दवा की मात्रा और कितने दिन लेनी है, यह बीमारी और मरीज पर निर्भर करता है. अगर एंटीबायोटिक लेने के बाद भी आराम नहीं मिल रहा है तो खुद से दूसरी दवा लेने के बजाय डॉक्टर से बात करें.
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अच्छे बैक्टीरिया पर भी असर पड़ना
बिना जरूरत बार-बार एंटीबायोटिक लेने से शरीर में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया पर भी असर पड़ सकता है और सबसे बड़ी चिंता एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की होती है. इसलिए एंटीबायोटिक को सामान्य बुखार या सर्दी-जुकाम की दवा समझकर नहीं लेना चाहिए.
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