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Cancer की जल्दी पहचान क्यों जरूरी है? देर करने से क्या बदल सकता है इलाज का नतीजा

Cancer Early Detection: कैंसर इतनी खतरनाक बीमारी है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों की मौत होती है, लेकिन सवाल उठता है कि क्या कैंसर के लक्षणों को पहले ही पहचान कर इलाज कराने से क्या खतरा कम हो सकता है? आइए जानते हैं WHO ने क्या बताया इस बारे में.

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कैंसर की पहचान में देरी क्या इलाज पर भी डाल सकती है असर? (Image: AI/Pexels)

खबर की मुख्य बातें:

  • WHO के अनुसार, कैंसर शरीर के किसी भी अंग या टिशू में शुरू हो सकता है और असामान्य कोशिकाओं के अनियंत्रित विकास के कारण होता है.
  • साल 2022 में, दुनियाभर में कैंसर के लगभग 10% मामले कैंसर पैदा करने वाले संक्रमणों से जुड़े थे, जैसे हेलिकोबैक्टर पाइलोरी और ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV).
  • WHO के आंकड़ों के अनुसार, जोखिम वाले कारकों से बचकर और सही आदतों को अपनाकर लगभग 38% कैंसर के मामलों को रोका जा सकता है.
  • कैंसर के इलाज के कई तरीके हैं, जिनमें हार्मोन थेरेपी, कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, हाइपरथर्मिया, फोटोडायनेमिक थेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट, सर्जरी और टारगेटेड थेरेपी शामिल हैं.

कैंसर का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है कि ये बीमारी कहीं उनका अपना शिकार न बना लें. कैंसर इतनी खतरनाक बीमारी है, जिसके कारण हर साल बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो जाती है. इन मौतों के पीछे एक बड़ी वजह ये होती है कि जिन लोगों में कैंसर पनप रहा होता है, उन्हें लक्षण समझ ही नहीं आते हैं या फिर ऐसा कहे कि नजर ही नहीं आते हैं और अगर उन्हें कुछ बदलाव महसूस होता भी है, तो वह किसी दूसरी समस्या से जोड़कर उसे नजरअंदाज कर देते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि कैंसर की बीमारी में उसके लक्षणों की जल्दी पहचान क्यों जरूरी है और क्या जल्दी पहचान करने से इलाज का नतीजे पर असर पड़ता है? आइए जानते हैं लक्षणों का इलाज पर कैसा असर होता है.

यह भी पढ़ें: शराब से बढ़ सकता है Cancer का खतरा? जानिए कौन-कौन से कैंसर का रहता है खतरा

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किसी को भी शिकार बना सकता है कैंसर

WHO के मुताबिक, कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जो शरीर के लगभग किसी भी अंग या टिशू में शुरू हो सकती है और व्यक्ति को अपना शिकार बना सकती है. इस बीमारी में शरीर की कुछ असामान्य कोशिकाएं कंट्रोल से बाहर होकर अनियमित तरीके से बढ़ने लगती हैं और आसपास के स्वस्थ टिश्यू को नुकसान पहुंचाने लगती है. कई बार ये कोशिकाएं (Cells) शरीर के दूसरे अंगों तक भी फैल जाती हैं, जिससे उन हिस्सों में भी बीमारी का खतरा बढ़ता जाता है. बता दें कि कैंसर शरीर के किसी भी अंग में पनप सकता है और किसी को भी अपना शिकार बना सकता है. ज्यादातर मामलों में लोगों की मौत फेफड़ों के कैंसर, स्तन कैंसर, कोलन-मलाशय कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, स्किन का कैंसर, पेट का कैंसर, और लिवर कैंसर से होती है.

किस कारणों से बढ़ता है कैंसर का खतरा?

WHO के अनुसार, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा तंबाकू का सेवन, शराब पीने, अनहेल्दी खानपान, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और वायु प्रदूषण के कारण बढ़ सकता है. इसके अलावा, कुछ पुराने संक्रमण भी कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं. साल 2022 में दुनियाभर में सामने आए कैंसर के करीब 10 प्रतिशत मामले कैंसर पैदा करने वाले संक्रमणों से जुड़े थे. इनमें हेलिकोबैक्टर पाइलोरी, ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV), हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और एपस्टीन-बार वायरस शामिल हैं. हेपेटाइटिस बी और सी से लिवर कैंसर, जबकि HPV से सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ता है. HIV संक्रमण से सर्वाइकल कैंसर होने का जोखिम छह गुना तक बढ़ सकता है. इसलिए जरूरी है कि वक्त-वक्त में मेडिकल जांच कराते रहना चाहिए, ताकि बीमारियों का खतरा कम हो, जो कैंसर का कारण बन जाए.

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कैंसर के लक्षणों को पहचानने में देरी बदल सकती है इलाज का परिणाम?

कैंसर से बचाव के लिए सही लाइफस्टाइल अपनाना और समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है. WHO के अनुसार, मौजूदा आंकड़ों बताते हैं कि जोखिम बढ़ाने वाले कारणों से बचकर और कैंसर की रोकने के लिए जरूरी सही बदलाव और आदतों को अपनाकर करीब 38 प्रतिशत कैंसर के मामलों को रोका जा सकता है. इसके अलावा, कैंसर की समय पर पहचान, सही इलाज और मरीजों की सही देखभाल से इस बीमारी के खतरे को कर सकती है. कई तरह के कैंसर में शुरुआती स्टेज में बीमारी का पता चलने और सही इलाज मिलने पर मरीज के ठीक होने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है. इसलिए कैंसर को लेकर जागरूकता और समय पर जांच बहुत जरूरी होता है.

क्या कैंसर इलाज हो सकता है?

कैंसर का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर में पनप रहा कैंसर अभी किस स्टेज पर है. यानी अगर कैंसर शुरुआती स्टेज पर है, तो कुछ ट्रीटमेंट से इसके खतरे को कम किया जा सकता है, लेकिन अगर कैंसर गंभीर स्टेज पर पहुंच चुका है, तो काफी देर हो चुकी होती है. NCI के अनुसार, कैंसर के इलाज के कई तरीके हैं, कुछ कैंसर मरीजों का इलाज सिर्फ एक ही तरीके से होता है, लेकिन ज्यादातर लोगों का इलाज कई तरीकों को मिलाकर किया जाता है. आपका इलाज किस तरह से होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपको किस तरह का कैंसर है और वह कितना बढ़ चुका है.

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हार्मोन थेरेपी (Hormone Therapy)

हार्मोन थेरेपी एक ऐसा इलाज है जो ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर की बढ़त को धीमा या बंद करने का काम करता है. कैंसर कोशिकाएं को बढ़ने के लिए हार्मोन पर निर्भर होती हैं, ऐसे में ये थेरेपी उसकी प्रभावित करता है.

कीमोथेरेपी (Chemotherapy)

कीमोथेरेपी में कैंसर और तेजी से बढ़ने वाली दूसरी कोशिकाओं को मारकर या उनकी बढ़ने की क्षमता को रोकने का काम होता है. इससे कैंसर का खतरा कम होता है और व्यक्ति इस गंभीर बीमारी से काफी हद तक बच निकलता है.

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इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy)

इस इलाज में शरीर की इम्यून सिस्टम की क्षमता को कैंसर से लड़ने में मदद दी जाती है.

हाइपरथर्मिया (Hyperthermia)

इस तरीके में शरीर के टिशू को गर्म किया जाता है, ताकि कैंसर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाया जा सके और उन्हें खत्म किया जा सके, जिससे कैंसर का रिस्क कम हो.

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फोटोडायनेमिक थेरेपी (Photodynamic Therapy)

इसमें एक खास दवा का इस्तेमाल किया जाता है, जो रोशनी के संपर्क में आने पर एक्टिव हो जाती है और कैंसर और दूसरी असामान्य कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करती है.

रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy)

इस इलाज में रेडिएशन को बढ़ाकर कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है और ट्यूमर का आकार घटाने में मदद मिलती है.

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ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (Blood Stem Cell Transplant)

कीमोथेरेपी या रेडिएशन की ज्यादा खुराक से खून बनाने वाली स्टेम कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने के बाद, इस प्रक्रिया से उन्हें दोबारा बहाल करने में मदद मिलती है.

सर्जरी (Cancer Surgery)

इस तरीके में सर्जन ऑपरेशन करके शरीर से कैंसर वाले हिस्से या ट्यूमर को निकालते हैं, ताकि कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में न फैले.

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टारगेटेड थेरेपी (Targeted Therapy)

इस इलाज में कैंसर कोशिकाओं के उन खास बदलावों को निशाना बनाया जाता है, जो उन्हें बढ़ने, विभाजित होने और शरीर में फैलने में मदद करते हैं.

कैंसर के लक्षणों को कैसे पहचानें?

NCI के अनुसार, कैंसर के कारण होने वाले कुछ लक्षणों में ये शामिल हैं:

स्तन (ब्रेस्ट) में बदलाव

  • स्तन या बगल में गांठ महसूस होना या सख्तपन आना
  • निप्पल में बदलाव आना या उससे कुछ डिस्चार्ज होना
  • स्किन में खुजली, लालिमा, पपड़ी जमना, गड्ढे पड़ना या सिकुड़न आना

ब्लैडर में बदलाव

  • पेशाब करने में परेशानी होना
  • पेशाब करते समय दर्द होना
  • पेशाब में खून आना
  • बिना किसी स्पष्ट कारण के खून बहना या शरीर पर चोट के निशान पड़ना

आंतों से जुड़े बदलाव

  • मल में खून आना
  • मल त्यागने में दिक्कत होना
  • लगातार खांसी रहना या आवाज बैठ जाना जो ठीक न हो

खाने-पीने से जुड़ी समस्याएं

  • खाना खाने के बाद दर्द होना, जैसे सीने में जलन या अपच, जो ठीक न हो
  • कुछ भी निगलने में परेशानी होना
  • पेट में दर्द रहना हर वक्त
  • जी मिचलाना और उल्टी आना
  • भूख में बदलाव आना
  • बहुत ज्यादा थकान महसूस होना, जो लंबे समय तक बनी रहे
  • बिना किसी कारण बुखार आना या रात में पसीना आना

मुंह में बदलाव

  • जीभ या मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे पड़ना
  • होंठ या मुंह में खून आना, दर्द होना या सुन्नपन महसूस होना

न्यूरोलॉजिकल समस्याएं

  • सिरदर्द होना
  • दौरे पड़ना
  • देखने में बदलाव आना
  • सुनने की क्षमता में बदलाव आना
  • चेहरे का एक तरफ झुक जाना

त्वचा में बदलाव

  • त्वचा के रंग की कोई ऐसी गांठ जिससे खून निकलता हो या जिस पर पपड़ी जम जाती हो
  • शरीर पर नया तिल निकलना या पहले से मौजूद तिल में बदलाव आना
  • कोई ऐसा घाव जो ठीक न हो रहा हो
  • पीलिया
  • शरीर में कहीं भी सूजन या गांठ होना, जैसे कि गर्दन, बगल, पेट या जांघ के जोड़ के पास
  • बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन बढ़ना या कम होना, आदि भी कैंसर के लक्षण हो सकते हैं.

यह भी पढ़ें:  क्या रात में काम करने से बढ़ सकता है ब्रेस्ट कैंसर का खतरा? NCBI ने बताया शरीर में होने वाले बदलाव

अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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SOURCE: WHO, NCI

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लेखक के बारे में

Azhar Naim

अज़हर नईम एक डिजिटल पत्रकार हैं. अज़हर नईम News24 Bag Convergence में सब-एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वह मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, हेल्थ और वायरल सेक्शन से जुड़ी खबरें लिखते हैं. उन्होंने साल 2024 में श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री हासिल की. पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने इंडिया न्यूज और खबरफास्ट जैसे मीडिया संस्थानों के साथ काम किया, जहां उन्हें डिजिटल न्यूज रिपोर्टिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव मिला. इसके बाद उन्होंने एक साल से ज्यादा समय तक (2024-2026) इंडिया डॉट कॉम (Zee Media) में ट्रेनी के तौर पर काम किया और हेल्थ, लाइफस्टाइल, वायरल, ट्रेंडिंग, न्यूज और टेक्नोलॉजी समेत कई बीट्स पर डिजिटल कंटेंट तैयार किया. अपने अब तक के अनुभव में अज़हर डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स को समझने, SEO-फ्रेंडली कंटेंट तैयार करने और पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए उपयोगी व आकर्षक स्टोरीज लिख रहे हैं. अज़हर नईम का पत्रकारिता में अनुभव कुल अनुभव: 2 साल से ज्यादा योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: उन्होंने श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री हासिल की. पिछला अनुभव: अज़हर ने न्यूज 24 से पहले इंडिया न्यूज़, खबरफास्ट और इंडिया डॉट कॉम (Zee Media) में अपनी पत्रकारिता की समझ और अनुभव को और मजबूत किया. अपने प्रोफेशनल सफर में उन्होंने दिल्ली ब्लास्ट, जम्मू-कश्मीर ब्लास्ट, ईरान-अमेरिका युद्ध, रूस-यूक्रेन युद्ध और कई विधानसभा चुनावों के अलावा लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसे विविध विषयों पर कंटेंट तैयार किया है. विशेषज्ञता और फोकस अज़हर नईम को लाइफस्टाइल और हेल्थ का खासा अनुभव है, वह इन खबरों को आसान भाषा में समझाने में माहिर हैं और इन्हीं से जुड़ी स्टोरी पर लगातार काम कर रहे हैं. इसके अलावा उन्हें टिप्स और ट्रिक्स, स्किन केयर, हेयर केयर, किचन-गार्डनिंग और फैशन से जुड़ी खबरों में भी महारत हासिल है.
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