आजकल बहुत सारी महिलाएं रात में काम करना पसंद करती हैं या मजबूरी में करना पड़ता है. ऐसा इसलिए क्योंकि आईटी कंपनियों, कॉल सेंटर, अस्पतालों, फैक्ट्रियों और कई जगहों पर नाइट शिफ्ट अब आम हो गई है, लेकिन क्या रात में लंबे समय तक काम करना महिलाओं की सेहत पर गंभीर असर डाल सकता है? क्या इससे ब्रेस्ट कैंसर यानी स्तन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है? नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के NCBI प्रकाशित नेशनल टॉक्सिकोलॉजी प्रोग्राम (NTP) की अप्रैल 2021 की रिपोर्ट में इस सवाल पर बात की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार और लंबे समय तक रात की शिफ्ट में काम करने से शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं. इस तरह की गड़बड़ी ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि रात में काम करने वाली हर महिला को कैंसर होगा.
ब्रेस्ट कैंसर क्या होता है?
एक ऐसी बीमारी है जिसमें स्तन के सेल्स में बदलाव होता है और ब्रेस्ट में गांठ बनना शुरू हो जाती है. इसकी 5 स्टेज होती हैं और आखिरी स्टेज में कैंसर का स्तर काफी फैल जाता है. इस दौरान मरीज की जान बचाना बहुत मुश्किल हो जाता है. लास्ट स्टेज में कैंसर के जोखिम को रोका नहीं जा सकता.
ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण
- स्तन या बगल में गांठ
- स्किन में बदलाव होना
- स्किन का लाल होना
- चकत्ते होना
- ब्रेस्ट का शेप बदलना
- निप्पल में बदलाव होना
- लगातार पेट फूलना
- ब्रेस्ट में लगातार दर्द रहना
NCBI की रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
नेशनल टॉक्सिकोलॉजी प्रोग्राम की रिपोर्ट में रात की शिफ्ट में काम करने और रात में रोशनी में रहने के बीच रिलेशन को बताया गया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि बार-बार और लंबे समय तक रात में काम करना, खासकर जब इससे शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं. लाइफस्टाइल चेंज होती है, जिससे महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है.
आखिर शरीर की सर्कैडियन वॉच क्या होती है?
हमारे शरीर एक प्रोसेस के मुताबिक चलता है, जिसे सर्कैडियन वॉच के नाम से जाना जाता है. यह लगभग 24 घंटे में होने वाली हर एक्टिविटी को कंट्रोल करता है. इस प्रोसेस के मुताबिक, शरीर रात में सोने की इच्छा जाहिर करता है. यह सिर्फ नींद तक नहीं है, बल्कि शरीर के टेंपरेचर, हार्मोन में बदलाव, पाचन और बाकी चीजों में बदलाव होता है. ऐसे में जब कोई इंसान जागता है तो इसमें कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं.
रात में काम करने से शरीर में कौन-कौन से बदलाव हो सकते हैं?
मेलाटोनिन हार्मोन में बदलाव होना
मेलाटोनिन एक हार्मोन है, जो दिमाग की पीनियल ग्रंथि से बनता है और शरीर को रात के समय के बारे में संकेत देने में मदद करता है. अंधेरा होने पर इसका स्तर बढ़ता है, जबकि रोशनी इसके असर को कम कर सकती है. वैज्ञानिकों ने मेलाटोनिन और कैंसर के बीच गहरा संबंध भी बताया है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि रात में रोशनी में काम करने से सीधे कैंसर हो जाता है.
हार्मोन में गड़बड़ी होना
शरीर में कई हार्मोन दिन और रात के अनुसार अलग-अलग समय पर सक्रिय होते हैं. नींद-जागने के चक्र में गड़बड़ी इन हार्मोन को इफेक्ट करती है. इसलिए कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है.
DNA पर असर पड़ना
हमारे शरीर के सेल्स में लगातार बदलाव होने की वजह से DNA में भी बदलाव हो जाता है. रात की शिफ्ट करने वाले लोगों को अक्सर दिन में नींद लेने में परेशानी हो सकती है. दिन के समय रोशनी, शोर और बदलती चीजें नींद को इफेक्ट करती हैं.
क्या लंबे समय तक नाइट शिफ्ट करने वाली महिलाओं को ज्यादा खतरा होता है?
इस सवाल का जवाब समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि रात की शिफ्ट कितनी बार की जाती है, कितने सालों तक की जाती है और उससे शरीर पर कितना इफेक्ट पड़ता है. NTP की रिपोर्ट के अनुसार, लगातार, बार-बार और लंबे समय तक नाइट शिफ्ट करने से ब्रेस्ट कैंसर के बढ़े हुए खतरे को देखा गया है.
ब्रेस्ट कैंसर के दूसरे कारण
ब्रेस्ट कैंसर का खतरा सिर्फ काम के समय या नींद पर निर्भर नहीं करता. बल्कि इसमें उम्र, मेडिकल हिस्ट्री, लाइफस्टाइल, हार्मोन संबंधी चीजें, मासिक धर्म जल्दी शुरू होना, मेनोपॉज देर से होना और वजन बढ़ना हो सकता है.
नाइट शिफ्ट करने वाली महिलाएं अपनी सेहत का ध्यान कैसे रखें?
अगर नौकरी की वजह से रात में काम करना जरूरी है तो कुछ आदतें नींद और हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती हैं. इसलिए बेहतर होगा कि आप पूरी नींद लेने की कोशिश करें. काम के दौरान ज्यादा रोशनी का इस्तेमाल न करें और सोने के कमरे में पर्दों का इस्तेमाल करें, ताकि बाहर का शोर अंदर न आ पाए.
अपनी उम्र और मेडिकल हिस्ट्री को लेकर डॉक्टर से बात करें और ब्रेस्ट कैंसर का टेस्ट कराते रहें. स्तन में नई गांठ, निप्पल का अंदर की ओर खिंचना, गड्ढे या बदलाव नजर आना या निप्पल से बिना किसी कारण के खून आने पर डॉक्टर से बात करें.