Pollution में बच्चों और बुजुर्गों को कैसे रखें सुरक्षित? बाहर निकलने से लेकर घर के अंदर तक अपनाएं ये तरीके
Pollution Prevention Tips: देश के कई हिस्सों में प्रदूषण का असर दिखाई देने लगा है, खासतौर से दिल्ली-NCR के क्षेत्र में AQI के आंकड़े हैरान करने वाले हैं. ऐसे में आइए जानते हैं आप कैसे अपने घर के बुजुर्गों और बच्चों की इस जहरीली हवा से सुरक्षा कर सकते हैं?
प्रदूषण के मौसम में बच्चों-बुजुर्गों के लिए जरूरी हैं ये सावधानियां (Image: AI/Pexels)
खबर की मुख्य बातें:
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वायु प्रदूषण के बारीक कण फेफड़ों के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंच सकते हैं, जिससे सांस लेने की परेशानी होती है.
NIEHS की रिसर्च बताती है कि प्रदूषण के संपर्क में आने से शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ सकता है.
बच्चों में प्रदूषण फेफड़ों के विकास को प्रभावित कर सकता है, जिससे अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
खराब AQI होने पर बच्चों और बुजुर्गों को बाहर निकलने से बचना चाहिए और घर के अंदर HEPA फिल्टर वाले एयर प्यूरीफायर का उपयोग करना चाहिए.
Pollution: सर्दियों की शुरुआत होते ही प्रदूषण की समस्या लोगों की चिंता बढ़ाने लगती है, खासतौर से प्रदूषण की मार दिल्ली-NCR में रहने वाले लोगों को हर साल झेलनी पड़ती है. सुबह उठते ही आसमान में धुंध, सड़कों पर धुएं की परत और सांस लेने में परेशानी आम बात हो जाती है. सिर्फ दिल्ली ही नहीं, देश के कई बड़े शहरों में खराब एयर क्वालिटी लोगों की सेहत के लिए चुनौती बन रही है. हवा में मौजूद बेहद छोटे प्रदूषक कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं, जिससे कई तरह की समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. इसका सबसे ज्यादा खतरा बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों को रहता है. बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं, जबकि बुजुर्गों में उम्र के साथ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता और फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है. ऐसे में प्रदूषण के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी सेहत पर भारी पड़ सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि खराब हवा के बीच बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित रखने के लिए कौन-से तरीके अपनाने चाहिए.
प्रदूषण से बच्चों और बुजुर्गों की सेहत को क्यों है ज्यादा खतरा?
NIDDK के अनुसार, वायु प्रदूषण का असर सिर्फ सांस लेने की परेशानी तक सीमित नहीं रहता. हवा में मौजूद बारीक प्रदूषण के कण फेफड़ों के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंच सकते हैं. NIEHS (National Institute of Environmental Health Sciences) की रिसर्च के अनुसार, प्रदूषण के संपर्क में आने से शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ सकता है. लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से सांस और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है. बच्चों में प्रदूषण का असर फेफड़ों के विकास पर पड़ सकता है, जिस कारण वह कम उम्र में सेहत से जुड़ी समस्या का शिकार हो सकते हैं. शोध में खराब हवा और बच्चों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसे संबंधी समस्याओं के बीच संबंध भी सामने आया है. वहीं, बुजुर्गों में पहले से मौजूद अस्थमा, COPD और दिल से जुड़ी बीमारी बढ़ सकती है. कुछ रिसर्च में लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क और डिमेंशिया जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के बीच भी संबंध पाया गया है. इसलिए इन दोनों आयु वर्गों को प्रदूषण से बचाना बेहद जरूरी है.
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बाहर निकलते समय बच्चों और बुजुर्गों के लिए अपनाएं ये सावधानियां
शहर में जब AQI खराब या गंभीर श्रेणी में पहुंच जाता है, तब बच्चों और बुजुर्गों को बाहर निकलने से बचना चाहिए. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी खराब एयर क्वालिटी के दौरान लंबे समय तक बाहर रहने से बचने की सलाह देता है. अगर किसी जरूरी काम से बाहर जाना पड़े, तो इन बातों का ध्यान रखें.
बाहर खेलने से रोकें: प्रदूषण ज्यादा होने पर बच्चों को पार्क, खुले मैदान और सड़क के आसपास खेलने न भेजें. उनकी आउटडोर एक्टिविटी को कुछ समय के लिए इनडोर खेलों से बदल सकते हैं.
मास्क का सही इस्तेमाल करें: जरूरी होने पर अच्छी क्वालिटी का N95 मास्क पहनें. यह PM2.5 जैसे छोटे कणों को फिल्टर करने में मदद कर सकता है. मास्क नाक और मुंह पर अच्छी तरह फिट होना चाहिए.
साधारण मास्क से न करें बचाव की उम्मीद: कपड़े का मास्क, रूमाल या सामान्य डस्ट मास्क बारीक प्रदूषक कणों से पर्याप्त सुरक्षा नहीं देते.
ट्रैफिक वाली जगहों से बचें: बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा वाहनों वाली सड़कों, निर्माण स्थलों और धुआं निकलने वाली जगहों से दूर रखें.
भारी एक्सरसाइज न करें: खराब हवा में दौड़ना, साइकिल चलाना और तेज शारीरिक गतिविधियां करने से बचें.
AQI देखकर बनाएं प्लान: बाहर जाने से पहले अपने इलाके का एयर क्वालिटी इंडेक्स चेक करें और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार गतिविधियों की योजना बनाएं.
घर के अंदर प्रदूषण से बचने के लिए अपनाएं ये टिप्स
अक्सर लोग सोचते हैं कि घर के अंदर रहने से प्रदूषण का खतरा खत्म हो जाता है, लेकिन बाहर की खराब हवा खिड़कियों और दरवाजों के छोटी जगहों से अंदर आ सकती है. WHO के की सलाह के अनुसार, इसके अलावा घर में धूल और धुएं से भी इनडोर एयर क्वालिटी खराब हो सकती है. ऐसे में घर के वातावरण को साफ रखना जरूरी है.
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खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें: जब बाहर प्रदूषण का स्तर ज्यादा हो, तब बाहरी हवा का घर में आना कम करने के लिए दरवाजे और खिड़कियां बंद रखें. उनके आसपास मौजूद खाली जगहों को सील करें. एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें: घर में HEPA फिल्टर वाला एयर प्यूरीफायर लगाया जा सकता है. कमरे के आकार के अनुसार सही क्षमता वाला प्यूरीफायर चुनें और उसके फिल्टर समय पर बदलें. बच्चों के कमरे की सफाई करें: जिस कमरे में बच्चे और बुजुर्ग ज्यादा समय बिताते हैं, वहां नियमित सफाई करें. खासकर उनके सोने वाले कमरे को साफ रखना जरूरी है. गीले कपड़े से पोछा लगाएं: घर में सूखी झाड़ू लगाने से धूल के कण हवा में फैल सकते हैं. इसलिए गीले पोछे और कपड़े से सफाई करना बेहतर है. ओजोन बनाने वाले प्यूरीफायर से बचें: ऐसे एयर क्लीनर का इस्तेमाल न करें जो ओजोन पैदा करते हैं. इससे घर के अंदर प्रदूषण बढ़ सकता है. धुएं से दूरी रखें: घर के अंदर धूम्रपान न करें और अगरबत्ती या अन्य धुआं पैदा करने वाली चीजों का इस्तेमाल सीमित रखें.
प्रदूषण के इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
प्रदूषण का असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग हो सकता है. कुछ लोगों को थोड़े समय के संपर्क में भी परेशानी महसूस हो सकती है, जबकि पहले से सांस या दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों में स्थिति गंभीर हो सकती है. बच्चों में लगातार खांसी, सांस लेते समय घरघराहट और खेलकूद के दौरान जल्दी थकान जैसे संकेतों पर ध्यान दें. बुजुर्गों में सांस फूलना, सीने में जकड़न और असामान्य कमजोरी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी भी प्रदूषित हवा के संपर्क से हो सकती है. अगर किसी बच्चे या बुजुर्ग को सांस लेने में ज्यादा परेशानी, चक्कर, सीने में दर्द या सीने में दबाव महसूस हो, तो तुरंत नजदीकी अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करें. सीने में दर्द और गंभीर सांस की तकलीफ होने पर आपातकालीन मेडिकल सहायता लें.