अचानक कभी भी 150 पार पहुंच जाता है बीपी और होने लगी घबराहट? इन टिप्स से मिल सकती है राहत
How to Control High BP: ब्लड प्रेशर की समस्या के बारे में अक्सर लोगों को जानकारी नहीं होती है, जिस कारण वह इसे नजरअंदाज करते रहते हैं और अपने मन मुताबिक जीवन जीते हैं, लेकिन जब कोई शख्स हाई-बीपी की समस्या का शिकार हो जाता है, तो उसे घबराहट होने लगती है और शरीर के महत्वपूर्ण अंग की सेहत पर असर पड़ने लगता है. आइए जानते हैं हाई-बीपी की समस्या के बारे में और कैसे इसे कंट्रोल में रख सकते हैं.
हाई बीपी को कैसे रखें कंट्रोल में? (Image: AI: Pexels)
खबर की मुख्य बातें:
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सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 mm Hg से कम होता है, जबकि 130/80 mm Hg या उससे ज्यादा को हाई-ब्लड प्रेशर माना जाता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 2024 में 30 से 79 वर्ष की आयु के लगभग 1.4 अरब एडल्ट को हाई-बीपी था, जो इस आयु वर्ग की कुल आबादी का 33% है.
हाई-बीपी के आमतौर पर कोई चेतावनी वाले लक्षण नहीं होते हैं, और इसका पता लगाने का एकमात्र तरीका नियमित रूप से बीपी की जांच करवाना है.
हाई-बीपी दिल से जुड़ी बीमारी, स्ट्रोक और किडनी की बीमारी जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ा सकता है, लेकिन जीवनशैली में बदलाव जैसे कम नमक का सेवन, स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम से इसे कंट्रोल किया जा सकता है.
आज के वक्त में अच्छी सेहत किसी बड़े वरदान से कम नहीं है, क्योंकि अक्सर कहा जाता है कि दुनिया में शायद ही ऐसा कोई घर होगा, जहां व्यक्ति किसी न किसी हेल्थ से जुड़ी समस्या से जूझ नहीं रहा होगा. आज लोगों की खराब लाइफस्टाइल, उनकी आदतों, खानपान आदि के कारण शरीर में ऐसी बीमारियां पैदा बोने लगती है, जिसे लंबे समय तक नजरअंदाज करना भविष्य में व्यक्ति को बड़े खतरे में धकेल देती है. इसी में से एक समस्या के हाई बीपी की, जो न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में बड़ी संख्या में लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है. अक्सर लोगों की शिकायत रहती है कि उनका बीपी अचानक से कभी-भी 150 पार पहुंच जाता है, जिस कारण घबराहट होने लगती है. अब ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए, कैसे अपने आपको सुरक्षित रख सकते हैं कैसे ये बीमारी पैदा होती है, सभी सवालों के जवाब जानेंगे इस स्टोरी में.
ब्लड प्रेशर वह दबाव है जो तब बनता है जब खून आपकी नसों की दीवारों पर दबाव डालता है. नसें आपके दिल से शरीर के दूसरे हिस्सों तक खून पहुंचाती हैं. सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 mm Hg से कम होता है. हाई ब्लड प्रेशर, जिसे हाइपरटेंशन भी कहते हैं, सामान्य से ज्यादा ब्लड प्रेशर होता है. अगर किसी व्यक्ति का बीपी 130/80 mm Hg बना रहता है, या फिर इससे भी ज्यादा रहता है, तो यह संकेत है कि वह व्यक्ति हाई बीपी की समस्या का शिकार हैं और लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करना दिल की सेहत, किडनी पर गंभीर असर डाल सकता है. WHO के अनुसार, साल 2024 में दुनियाभर में 30 से 79 साल की उम्र के लगभग 1.4 अरब एडल्ट को हाइपरटेंशन था; यह इस उम्र के लोगों की कुल आबादी का 33% है.
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कैसे दिखते हैं हाई-बीपी के लक्षण?
CDC के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर के आमतौर पर कोई चेतावनी वाले संकेत या लक्षण नहीं होते हैं, और कई लोगों को पता ही नहीं चलता कि उन्हें यह समस्या है. अब सवाल उठता है कि कैसे पता चलेगा कि कोई व्यक्ति हाई-बीपी की समस्या का शिकार है या नहीं, तो इसका एकमात्र ये तरीका है कि वह अपना ब्लड प्रेशर की जांच करवाएं. अगर सामान्य लेवल से ज्यादा बीपी बनी रहती है, तो हो सकता है कि व्यक्ति हाई – बीपी की समस्या का शिकार हो गया है. लेकिन इस बात को भी समझ लें कि दिनभर आप जो भी एक्टिविटी करते हैं, उसके आधार पर आपका ब्लड प्रेशर बदलता रहता है. अगर जांच के दौरान, ब्लड प्रेशर लगातार सामान्य से ज्यादा रहता है, तो इसे हाई ब्लड प्रेशर माना जा सकता है.
हालांकि, WHO के अनुसार, हाई-बीपी में कुछ लक्षण महसूस हो सकते हैं;
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सिर में दर्द
सीने में दर्द
चक्कर आना
सांस लेने में तकलीफ होना
उल्टी जैसा महसूस होना
जी मचलना
देखने में परेशानी या फिर धुंधला दिखना
तनाव
कानों में भनभनाहट
नाक से खून आना
दिल की धड़कन का असामान्य होना
सेहत पर कैसा डाल सकता है असर?
हार्ट अटैक और दिल की बीमारी
CDC के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर आपकी नसों को नुकसान पहुंचा सकता है, इससे आपके दिल तक खून और ऑक्सीजन का बहाव कम हो जाता है और दिल की बीमारी हो सकती है.
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सीने में दर्द, जिसे एनजाइना भी कहते हैं. ऑक्सीजन और खून के बहाव में देरी के कारण हार्ट अटैक का खतरा बन सकता है और हार्ट फेलियर की भी स्थिति बन सकती है.
स्ट्रोक और दिमाग से जुड़ी समस्याएं
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हाई ब्लड प्रेशर के कारण दिमाग तक खून और ऑक्सीजन पहुंचाने वाली नसें फट सकती हैं या उनमें रुकावट आ सकती है, जिससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है. स्ट्रोक के दौरान दिमाग की कोशिकाएं मर जाती हैं क्योंकि उन्हें पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती. स्ट्रोक के कारण बोलने, चलने-फिरने और रोजमर्रा के दूसरे काम करना मुश्किल हो जाता है.
किडनी की बीमारी
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जिन लोगों को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या दोनों समस्याएं होती हैं, उनमें क्रोनिक किडनी डिजीज (लंबे समय तक रहने वाली किडनी की बीमारी) होने का खतरा काफी ज्यादा रहता है. इस लिए जरूरी है कि बीपी की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जाए, वरना भविष्य में ये बड़े खतरे में गिरा सकता है.
कैसे रख सकते हैं अपना बीपी कंट्रोल में?
बीपी को कंट्रोल में रखना आपकी आदतों पर निर्भर करता है, अगर आप अपनी लाइफस्टाइल में कुछ अच्छे बदलाव करते हैं, तो हाई-बीपी की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है, नहीं तो आप स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं के शिकार भी हो सकते हैं. British Heart Foundation के अनुसार, लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव मददगार हो सकते हैं, इसमें; अगर आप ज्यादा नमक का सेवन करते हैं, तो उसे कम करना (डॉक्टर की सलाह के मुताबिक सेवन), अच्छी और हेल्दी डाइट का सेवन करना, जिसमें फल और सब्जियां, साबुत अनाज, लीन प्रोटीन और हेल्दी फैट्स शामिल हैं.
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इसके अलावा वजन के कंट्रोल में रखना, रोजाना एक्सरसाइज करना ताकि शरीर एक्टिव रहे, अच्छी नींद, तनाव से दूरी और शराब और धूम्रपान का सेवन बंद करना शामिल है. अगर आप इन आदतों को फॉलो करेंगे, तो आपकी बीपी बेहतर तरीके से कंट्रोल में रह सकता है. लेकिन इस बात का भी ध्यान रखें कि डॉक्टर से वक्त-वक्त पर सलाह लेते रहना और नियमित जांच बहुत जरूरी है.