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बिना खाए कितने दिनों तक जिंदा रह सकता है इंसान? जानिए भूख हड़ताल में कब लगानी पड़ती है ड्रिप

What Happens To Body In Hunger Strike: स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति दिनभर में कम से कम 3 बार खाना खाता है. लेकिन, क्या आप जानते हैं बिना खाए व्यक्ति कब तक जिंदा रह सकता है? यहां जानिए बिना भोजन शरीर कब तक व्यक्ति का साथ देता है.

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Hunger Strike: भूख हड़ताल पर बैठा व्यक्ति स्वेच्छा से खाने का त्याग करता है. दिल्ली के जंतर-मंतर में 20 दिनों तक भूख हड़ताल करने के बाद एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) को सफदरजंग अस्तपाल में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है. ऐसे में मन में कई सवाल उठते हैं जैसे बिना खाए व्यक्ति कब तक जिंदा रह सकता है. इसका जवाब स्पष्ट है. भूख हड़ताल के दौरान व्यक्ति पानी या नमक वाले पानी का सेवन करके खुद को जिंदा रखने की कोशिश करता है. ऐतिहासिक और वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, कोई व्यक्ति 6 से 8 सप्ताह यानी 40 से 60 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठ सकता है लेकिन, 3 हफ्तों बाद हालत नाजुक होनी शुरू हो जाती है और एक ऐसा पॉइंट आता है जब जबरन व्यक्ति को आईवी ड्रिप लगानी पड़ती है जिससे उसे बचाया जा सके. ऐसे में यहां जानिए भूख हड़ताल के दौरान व्यक्ति के शरीर में क्या बदलाव होते हैं, क्या असर पड़ता है और व्यक्ति किस तरह भूख हड़ताल के दौरान जीवित रहता है.

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भूख हड़ताल में शरीर पर क्या होता है असर

कमजोरी और भूख

भूख हड़ताल के शुरुआती दिनों शरीर का ग्लाइकोजन यानी लिवर में जमा शुगर खत्म होने लगता है. तेज भूख लगती है, पेट में ऐंठन होती है और सिर में दर्द होने लगता है. इसके बाद शरीर एनर्जी के लिए फैट को बर्न करने लगता है जिससे भूख का एहसास कम हो जाता है. इस दौरान चक्कर आते हैं, सुस्ती आने लगती है और खड़े होने पर ब्लड प्रेशर कम (Low Blood Pressure) होने जैसी दिक्कतें हो जाती हैं.

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गंभीर मेडिकल रिस्क

भूख हड़ताल के 20 से 30 दिनों के बीच शरीर का फैट स्टोर कम होने पर मांसपेशियां टूटने लगती हैं. व्यक्ति को देखने में दिक्कत आने लगती है, कई बार एक ही चीज दो नजर आती हैं, सुनने में दिक्कत आ सकती है, व्यक्ति बोलते हुए लड़खड़ाने लगता है और गंभीर मानसिक भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है.

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जान का खतरा

अगर भूख हड़ताल 30 दिनों से ज्यादा या 40 दिनों के करीब पहुंच जाए तो व्यक्ति के ह्रदय की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं. इससे दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है. व्यक्ति की किडनी और लिवर फेल होने का खतरा बढ़ जाता है.

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भूख हड़ताल में कब लगानी पड़ती है ड्रिप

भूख हड़ताल के दौरान एक ऐसा वक्त आता है जब डॉक्टर कानूनी और नैतिक रूप से हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर हो जाते हैं. इसे मेडिकल भाषा में पॉइंट ऑफ नो रिटर्न कहा जाता है. इस स्थिति में डॉक्टर गंभीर लक्षण या मेडिकल पैरामीटर्स दिखने पर तुरंत ड्रिप लगा देते हैं और जबरन खाना खिलाने की कोशिश करते हैं. व्यक्ति की मानसिक चेतना खो जाने पर, दिल की धड़कन के अनियंत्रित हो जाने पर, ब्लड प्रेशर के खतरनाक स्तर तक गिरने पर, किडनी और लिवर के काम करना बंद करने पर और गंभीर पीलिया होने पर व्यक्ति को ड्रिप लगाई जाती है.

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भूख हड़ताल खत्म होने के बाद रीफीडिंग सिंड्रोम

भूख हड़ताल तोड़ने के बाद एक और बड़ा खतरा रहता है जिसे रीफीडिंग सिंड्रोम (Refeeding Syndrome) कहा जाता है. इसमें व्यक्ति अगर अचानक से कुछ भारी या सामान्य भोजन कर ले तो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस बिगड़ सकता है और दिल का दौरा पड़ने तक की नौबत आ जाती है. इसीलिए भूख हड़ताल खत्म करने के बाद व्यक्ति को डॉक्टर्स की कड़ी निगरानी में रखा जाता है और लिक्विड डाइट, ग्लूकोज या ओआरएस वगैरह दिया जाता है.

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यह भी पढ़ें – Dia Mirza को पेरिमेनोपॉज में होने लगी हैं ये दिक्कतें, शरीर पर नजर आते हैं लक्षण

अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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First published on: Jul 20, 2026 04:04 PM

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About the Author

Seema Thakur

सीमा ठाकुर ने दिल्ली विद्यालय से ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है. प्रिंट और मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए डिजिटल में काम करने के बाद न्यूज 24 में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. सेहत और लाइफस्टाइल बीट पर लिखने के साथ ही सीमा बॉलीवुड वीडियो प्रोड्यूस करती रही हैं.

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Seema Thakur

सीमा ठाकुर ने दिल्ली विद्यालय से ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है. प्रिंट और मेनस्ट्रीम मीडिया के लिए डिजिटल में काम करने के बाद न्यूज 24 में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. सेहत और लाइफस्टाइल बीट पर लिखने के साथ ही सीमा बॉलीवुड वीडियो प्रोड्यूस करती रही हैं.

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