Gallbladder Stone Symptoms: पित्ताशय यानी गॉल ब्लैडर लिवर के नीचे स्थित छोटा सा अंग है जो किसी थैली की तरह नजर आता है, इसीलिए इसे पित्त की थैली भी कहते हैं. इसका काम बाइल को इकट्ठा करना और फिर रिलीज करना होता है. गॉलब्लैडर में कोलेस्ट्रॉल, बिलीरुबिन या बाइल सॉल्ट्स के कारण पथरी (Pathri) बन सकती है. जब शरीर में इन तीनों का बैलेंस बिगड़ता है या ये जरूरत से ज्यादा बढ़ जाते हैं तो गॉल ब्लैडर में पथरी हो जाती है. इसके अलावा, गॉल ब्लैडर का पूरी तरह से खाली ना होना और गॉल ब्लैडर में संक्रमण या सूजन होना भी गॉल ब्लैडर पथरी का लक्षण हो सकता है. ऐसे में इस पथरी में क्या होता है और शरीर पर कैसे लक्षण नजर आते हैं, जानिए यहां.

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गॉल ब्लैडर पथरी के लक्षण

गॉल ब्लैडर में कॉलेस्ट्रोल की पथरी होना सबसे आम है. इसके अलावा, बिलीरुबिन का स्तर बढ़ने से पिग्मेंट पथरी और कॉलेस्ट्रोल, कैल्शियम के साथ बिलुरुबिन का मिश्रण होने पर मिश्रित पथरी बन सकती है. ज्यादातर लोगों को इस पथरी के कारण ये दिक्कतें सताने लगती हैं -

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  • पेट के दाहिने हिस्से में दर्द महसूस होना
  • वसा वाला खाना खा लेने के बाद दर्द बढ़ जाना
  • उल्टी होना, बदहजमी होना और अक्सर ही पेट फूल जाना
  • पेट में दर्द होना जो फैलते हुए कंधे या पीठ तक चला जाता है
  • दिक्कत बढ़ने पर बुखार होना, कंपकंपी हो जाना
  • पीलिया हो जाना, आंखों का रंग पीला नजर आना और पेशाब का रंग गहरा हो जाना
  • मल के रंग में बदलाव दिखना और सफेद या फीके रंग का मल आना.

कैसे की जाती है गॉल ब्लैडर पथरी की जांच

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गॉल ब्लैडर पथरी का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है. इसके अलावा खून की जांच होती है जिसमें सीबीसी, लिवर फंक्शन टेस्ट, लिवर एंजाइम्स की जांच और सीरम बिलिरुबिन की जांच होती है. एमआरसीपी, सीटी स्कैन और ईआरसीपी टेस्ट किए जा सकते हैं.

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गॉल ब्लैडर स्टोन का इलाज कैसे होता है

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गॉल ब्लैडर स्टोन के लक्षण अगर नजर नहीं आते हैं तो डॉक्टर की निगरानी में रहना ही पर्याप्त होता है. अगर इसके लक्षण बने रहते हैं तो सर्जरी की जा सकती है. गॉल ब्लैडर स्टोन की दिक्कत से छुटकारा पाने के लिए वर्तमान में लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी की जाती है जिसमें गॉल ब्लैडर स्टोन को निकाल दिया जाता है. इसमें छोटा चीरा लगाया जाता है, दर्द कम होता है, खून कम बहता है, 1-2 दिन में अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है और व्यक्ति जल्दी ठीक हो जाता है.

अगर मरीज के ब्लैडर से खून बहता है, गॉल ब्लैडर फटने का खतरा रहता है, पैनक्रियाज में सूजन आ जाती है, बाइल डक्ट में रुकावट आती है या संक्रमण हो जाता है तो इमरजैंसी सर्जरी की जा सकती है.

गॉल ब्लैडर पथरी का ज्यादा खतरा किसे होता है

गॉल ब्लैडर पथरी का खतरा इन 5F लोगों को ज्यादा होता है -

  • पहला F है फीमेल जिन्हें यह समस्या ज्यादा होती है
  • दूसरा फॉर्टी यानी 40 से अधिक उम्र के लोगों में यह दिक्कत ज्यादा होती है
  • तीसरा, फैट की मात्रा अगर शरीर में ज्यादा हो तो पथरी हो सकती है
  • चौथा, फर्टाइल महिला या जो महिला प्रेग्नेंट हो सकती है उसे गॉल ब्लैडर पथरी होने का खतरा रहता है
  • पांचवा, फेयर यानी पश्चिमी देशों में रहने वाले लोग जिनकी त्वचा गोरी है उनमें यह दिक्कत ज्यादा देखी जा सकती है.

ये भी हैं रिस्क फैक्टर्स

मोटापा, शुगर, हाई कॉलेस्ट्रोल, एस्ट्रोजन हार्मोन की दवाएं लेने वालों में, तेजी से वजन कम होने पर, परिवार में किसी को गॉल ब्लैडर पथरी रही हो अगर, कम फाइबर वाला भोजन करने पर, लिवर की बीमारियों में और बढ़ती उम्र में गॉल ब्लैडर पथरी का खतरा ज्यादा होता है.

गॉलब्लैडर पथरी से कैसे बचे रहें

अपना वजन सामान्य बनाए रखें, मोटे हैं तो मोटापा कम करने पर ध्यान दें, एक्सरसाइज को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाएं, फाइबर से भरपूर फूड्स खाएं, फास्ट फूड्स से दूरी बनाएं, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और शुगर को कंट्रोल में रखें.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.