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आपको कैसे पता चलेगा कि आपके फेफड़ों में कुछ गड़बड़ है? यहां जानिए स्टेज 1 फेफड़ों के कैंसर के क्या लक्षण हैं

Lung Cancer Symptoms: बढ़ता प्रदूषण और खराब जीवनशैली फेफड़ों के कैंसर की वजह बन सकती है. ऐसे में यहां जानिए फेफड़ों की गड़बड़ी और फेफड़ों के कैंसर की दस्तक को किस तरह पहचाना जा सकता है.

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फेफड़ों के कैंसर की जांच कैसे होती है?

Fefde Ke Cancer Ke Lakshan: फेफड़ों का कैंसर एक ऐसा कैंसर है जिसके शुरुआती लक्षण आम दिक्कतों की तरह ही होते हैं और इसीलिए नजरअंदाज कर दिए जाते हैं. लेकिन, समय रहते फेफड़ों में हुई गड़बड़ी को ना पहचाना जाए तो दिक्कत जरूरत से ज्यादा बढ़ सकती है और परमानेंट डैमेज की वजह बनती है. ऐसे में फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) के शुरुआती लक्षण पहचानना जरूरी होता है. फेफड़ों का कैंसर वो कैंसर है जिसमें फेफड़ों के ऊतकों में एब्नॉर्मल सेल्स ग्रो होने लगती हैं. यह कैंसर फेफड़ों से होते हुए शरीर के अन्य अंगों तक भी फैल सकता है. यहां जानिए फेफड़ों के कैंसर को किन लक्षणों से पहचाना जा सकता है.

फेफड़े के कैंसर के शुरुआती लक्षण

खांसी खाना – फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा और शुरुआती लक्षण (Lung Cancer Symptom) है कि खांसी आती है और लंबे समय से आती रहती है. खांसी के साथ बलगम भी आ सकता है.

खांसी में खून – जहां एक तरफ खांसी में बलगम आना आम माना जाता है वहीं खांसी में खून आना सामान्य नहीं है और फेफड़ों की गंभीर बीमारी का लक्षण हो सकता है.

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सांस लेने में तकलीफ – फेफड़ों की दिक्कतें होने पर श्वसन प्रणाली बुरी तरह प्रभावित होने लगती है. इससे सांस लेने में तकलीफ महसूस होने लगती है.

सीने में दर्द – सांस लेते हुए या फिर हंसने या खांसने पर सीने में दर्द होने लगता है.

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आवाज में बदलाव – फेफड़ों के कैंसर में आवाज में बदलाव आ सकता है. इससे आवाज फटी-फटी या कर्कश सी सुनाई पड़ती है.

थकान और वजन घटना – फेफड़ों का कैंसर होने पर लागतार वजन कम होने लगता है. बिना वजह ही थकान महसूस होने लगती है.

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यह भी पढ़ें- कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर शरीर में क्या-क्या लक्षण दिखाई देते हैं?

किन कारणों से हो सकता है फेफड़ों का कैंसर

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ऐसे कुछ रिस्क फैक्टर्स हैं जो फेफड़ों के कैंसर की वजह बन सकते हैं. इन चीजों से परहेज करके फेफड़ों के कैंसर से बचा जा सकता है.

  • धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर की बड़ी वजह हो सकता है.
  • धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के आस-पास रहने से भी इस कैंसर की चपेट में आने का खतरा होता है.
  • प्रदूषण इस कैंसर के रिस्क फैक्टर्स में शामिल है.
  • पहले किसी कैंसर में रेडिएशन के कारण फेफड़े के कैंसर का खतरा रहता है.

फेफड़े के कैंसर की जांच कैसे होती है

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फेफड़ों के कैंसर को पहचानने के लिए फिजिकल एग्जाम किया जाता है. इसमें ब्लड टेस्ट, एक्स रे, सीटी स्कैन और कई बार बायोप्सी की जाती है.

यह भी पढ़ें – हाथ में झनझनाहट किसकी कमी से होती है? इस विटामिन और खनिज की कमी हो सकती है वजह

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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