Doctor’s Day 2025: डॉक्टर भगवान का रूप होते हैं, यह कहावत गलत नहीं है क्योंकि इस बात में कोई दोराय नहीं है कि गंभीर से गंभीर बीमारी में भले ही भगवान की दुआएं काम आती हो लेकिन सर्वप्रथम हमें उनसे बचाने वाले डॉक्टर ही होते हैं। डॉक्टर एक ऐसा प्रोफेशन जो इन्हें लोगों को जीवनदान देने के लिए तैयार करता है। डॉक्टर बनने की पढ़ाई से लेकर मरीज के इलाज तक का सफर सालों का होता है। जब कोई छात्र MBBS करता है, तो भी उसे स्ट्रेस और टेंशन झेलना पड़ता है। जब वे डॉक्टर बन जाता है, तब भी उसकी मेंटल हेल्थ डिस्टर्ब हो जाती है।
भारत में डॉक्टरों के बीच मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं जैसे तनाव, बर्नआउट और इमोशनल आउटबर्स्ट आम होती जा रही हैं। लॉन्ग वर्किंग आवर्स और ज्यादा मरीजों का भार उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है। इस बारे में साल 2020 के एक अध्ययन में भी यह बात सामने आ चुकी थी, जो इंडियन जर्नल ऑफ साइकोलॉजिकल मेडिसिन में प्रकाशित हुआ था। इस अध्ययन में पाया गया था कि लगभग हर 4 में से 1 डॉक्टर भावनात्मक थकावट से जूझ रहा था।
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
आकाश हेल्थकेयर के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. आशीष चौधरी कहते हैं कि डॉक्टरों पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। हर दिन हम दर्द, नुकसान और उम्मीद का सामना करते हैं। यह हमारे मन पर असर डाल सकता है। वे बताते हैं कि अपनी निजी जिंदगी में संतुलन बनाए रखने के लिए वे नियमित रूप से बैडमिंटन खेलते हैं। इससे उनका माइंड क्लियर रहता है और फोकस बना रहता है।
ये भी पढ़ें- हार्ट अटैक से बचना है? रोज खाएं इतनी मात्रा में ये सब्जी, रिसर्च में हुआ खुलासा
कई अध्ययनों में भी हुई पुष्टि
साल 2020 में इंडियन जर्नल ऑफ साइकोलॉजिकल मेडिसिन में प्रकाशित शोध के मुताबिक, मेंटल हेल्थ ऑफ मेडिकल प्रैक्टिशनर में भारत के 3,845 हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स पर किए गए 15 अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। इसके मुताबिक, लगभग 24% मेडिकल प्रैक्टिशनर इमोशनल आउटबर्स्ट, 27% डीपर्सनलाइजेशन और 23% पर्सनल अचीवमेंट की भावना में कमी का सामना कर रहे थे।
मेंटल हेल्थ पर सबसे ज्यादा असर
एशियन हॉस्पिटल के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. एन. के. पांडे बताते हैं कि तनाव, चिंता और बर्नआउट डॉक्टरों के कामकाज और उनके व्यक्तिगत जीवन दोनों को प्रभावित कर रहा है। डॉक्टर अक्सर मरीजों की देखभाल में अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अपने मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना गंभीर हो सकता है। एक्सपर्ट के मुताबिक, अस्पतालों में ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है, जहां डॉक्टर खुलकर अपनी भावनाओं के बारे में बात कर सकें और जरूरत होने पर मदद भी ले सकें।
डॉक्टरों के लिए हेल्दी माहौल कैसे बनाएं?
अन्य डॉक्टरों की मदद लें- यदि कोई डॉक्टर बीमार हुआ है, तो वह अन्य डॉक्टरों की मदद ले सकते हैं और अपनी सेहत के बारे में जानने से पीछे न हटे।
टीमवर्क- किसी भी अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था में सेवा प्रदान करने के लिए टीमवर्क को बढ़ावा देना चाहिए।
डॉक्टरों के लिए सुविधाएं- सभी अस्पतालों में डॉक्टरों के लिए कुछ विशेष व्यवस्था करवानी चाहिए जैसे कि मेडिकल इंश्योरेंस, एक्सक्लूसिव चेकअप और मेंटल हेल्थ सपोर्ट।
ये भी पढ़ें-Monsoon Heath Tips: बरसात में जोड़ों का दर्द बढ़ा रहा है आपकी परेशानी? ये योगासन देंगे राहत
संबंधित खबरें
काला मोतिया होने का क्या कारण है? AIIMS के नेत्र रोग विशेषज्ञ से जानिए
9 mins agoसुबह उठते ही मुंह कड़वा होने की क्या है वजह? रिसर्च में बताया
1 hr agoफेफड़ों के मरीजों के लिए जानलेवा हो सकती है प्रदूषित हवा, जरूर करें ये काम
2 hrs agoशरीर में फंसी हुई गैस को कैसे निकालें? बाबा रामदेव ने बताया नुस्खा
5 hrs agoहड्डियां ही नहीं, शरीर के कई हिस्सों को चुपचाप नुकसान पहुंचाती है Vitamin D
19 hrs agoमिलेट्स क्या होते हैं और क्यों खाने चाहिए? FSSAI से जानिए Millets के फायदे
21 hrs agoक्या कम शराब पीने से भी बढ़ सकता है कैंसर का खतरा? WHO ने बताया
22 hrs agoपीरियड्स रेग्युलर ना आना, ज्यादा बहाव इन 3 कैंसर का हो सकता है लक्षण
1 day agoलगातार हेडफोन लगाने से हो सकता है कानों को नुकसान, जानें सही तरीका
1 day agoक्या सुबह नींबू पानी पीने से वजन तेजी से घटता है? रिसर्च से जानिए
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines