जहरीली हुई हवा, AQI हुआ 200 के पार, फेफड़ों के डॉक्टर ने कहा शरीर में दिखें ये 3 लक्षण तो हो जाएं सावधान

वायु प्रदषण शरीर को एक नहीं बल्कि कई तरीकों से प्रभावित करता है. ऐसे में यहां जानिए दिल्ली की जहरीली हवा शरीर पर क्या असर कर सकती है और किन लक्षणों की समय रहते पहचान करना जरूरी है.

Delhi AQI

प्रदूषण के कारण फेफड़ों की दिक्कतें हो सकती हैं. Image Credit - AI

Delhi AQI: दिवाली से पहले दिल्ली की एयर क्वालिटी एक बार फिर बिगड़ गई है. हवा की गुणवत्ता खराब होने से दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स Poor कैटेगरी में आ गया है. दिल्ली के AQI को 200 के पार देखकर सरकार की तरफ से सावधानी बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं. वायु प्रदूषण (Air Pollution) फेफड़ों की बीमारियों का खतरा कई गुना तक बढ़ा देता है. जहरीली हवा में सांस लेने से इंफ्लेमेशन बढ़ती है, दिल की दिक्कतें होने लगती हैं, फेफड़ों की बीमारियां होती हैं, ऑर्गन डैमेज होता है, दिमाग की सेहत पर असर पड़ता है और खून दूषित होने लगता है सो अलग. ऐसे में अगर आप भी इस जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं तो कुछ लक्षणों के बारे में जान लीजिए. पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अंकित भारद्वाज कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बता रहे हैं जो शरीर में नजर आएं तो डॉक्टर से तुरंत जांच कराना जरूरी है. समय रहते इलाज करा लिया जाए तो गंभीर बीमारियों की संभावना कम होती है.

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इन लक्षणों का रखें ध्यान

डॉ. अंकित भारद्वाज ने इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में बताया है कि अगर शरीर में ये 3 लक्षण नजर आ रहे हैं तो पल्मोनोलॉजिस्ट से जरूर मिलना चाहिए.

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सांस फूलना – अगर सांस लेने में दिक्कत आ रही है या सांस फूल रही है हमें पता होना चाहिए कि सांस क्यों फूल रही है. खराब एयर क्वालिटी के चलते ऐसा हो सकता है. इसीलिए डॉक्टर से जांच और इलाज के लिए मिलना जरूरी है.

खांसी – 10 से 15 दिन से ज्यादा अगर खांसी आने की दिक्कत हो तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.
छाती में दर्द – बुखार आ रहा है या छाती में भारीपन है तो यह प्रदूषण के चलते हो सकता है.

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वायु प्रदूषण से सेहत पर क्या असर पड़ता है

  • प्रदूषण के कारण खांसी आ सकती है.
  • सांस फूलने लगती है.
  • बोलते हुए मुंह से हवा निकलती है.
  • श्वसन नली में जलन महसूस होती है.
  • अस्थमा ट्रिगर हो सकता है.
  • आंखों में जलन होती है.
  • क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पलमोनरी डिजीज हो सकती है. ये फेफड़ों से जुड़ी ग्रूप डिजीज हैं.
  • फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) का खतरा बढ़ता है.
  • फेफड़ों के काम पर असर पड़ता है. खासतौर से बच्चों के फेफड़े ठीक तरह से काम नहीं कर पाते.
  • वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों की उम्र समय से पहले ही बढ़ जाती है.

अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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