कोविड-19 का एक नया सब-वेरिएंट BA.3.2, जिसे अनौपचारिक रूप से 'Cicada' कहा जा रहा है, इन दिनों कई देशों में निगरानी में है. रिपोर्ट्स के अनुसार यह वेरिएंट सबसे पहले 2024 में साउथ अफ्रीका में पाया गया था और अब 20 से ज्यादा देशों में इसकी मौजूदगी दर्ज की गई है, जिससे पता चलता है कि ये वायरस अपने पांव पसार रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सिकाडा यानी BA.3.2 को 'वेरिएंट अंडर मॉनिटरिंग' की लिस्ट में रखा है, यानी इस पर अभी नजर रखी जा रही है और इसके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी इकट्ठा की जा रही है. शुरुआती जानकारी के अनुसार इसके लक्षण सामान्य सर्दी-खांसी जैसे ही हैं और अभी तक गंभीर मामलों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं देखी गई है.
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पहले के कई वेरिएंट्स से अलग है ये नय वेरिएंट
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विशेषज्ञों के मुताबिक यह ओमिक्रॉन परिवार का ही हिस्सा है, लेकिन इसमें स्पाइक प्रोटीन में करीब 70 से ज्यादा म्यूटेशन पाए गए हैं, जो पहले के कई वेरिएंट्स से ज्यादा हैं. यह वेरिएंट साल 2022 के पुराने BA.3 वंश से निकला है, जो अब नए रूप में हमारे सामने है. हालांकि यह बहुत तेजी से बदल रहा है, लेकिन राहत की बात यह है कि वैश्विक स्वास्थ्य संस्थाओं ने फिलहाल इसके खतरे के स्तर को कम बताया है. इसी कारण वैज्ञानिक यह भी जांच रहे हैं कि क्या यह पहले हुए संक्रमण या वैक्सीन से बनी इम्युनिटी को आंशिक रूप से प्रभावित कर सकता है या नहीं? हालांकि अब तक ऐसा कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है कि यह वेरिएंट ज्यादा गंभीर बीमारी स्थिति पैदा करता है. ज्यादातर मरीजों में बुखार, खांसी, गले में खराश और थकान जैसे हल्के लक्षण ही सामने आए हैं, इसलिए फिलहाल इसे ज्यादा खतरनाक नहीं माना गया है.
क्या मौजूदा Covid वैक्सीन Cicada वेरिएंट पर असरदार हैं?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हमारी पुरानी वैक्सीन सिकाडा पर काम करेगी? शोध बताते हैं कि इसके स्पाइक प्रोटीन में भारी बदलाव के कारण यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को चकमा देने में माहिर हो सकता है. लेकिन वर्तमान में उपलब्ध 2025-26 वाली वैक्सीन, जो मुख्य रूप से JN.1 और LP.8.1 वेरिएंट को ध्यान में रखकर बनाई गई थीं, सिकाडा के खिलाफ थोड़ी कम प्रभावी हो सकती हैं. WHO का भी मानना है कि एंटीबॉडी का असर इस पर कुछ कम हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञों ने साफ किया है कि वैक्सीन अब भी आपको अस्पताल जाने या मौत जैसी गंभीर स्थिति में पहुंचने से बचाने में पूरी तरह सक्षम है.
क्या हमें इससे डरना चाहिए?
फिलहाल स्वास्थ्य संगठनों का कहना है कि इस वेरिएंट से घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लापरवाही भी नहीं करनी चाहिए. क्योंकि वायरस समय के साथ बदलता रहता है, इसलिए जागरूक रहना जरूरी है. डॉक्टरों का मानना है कि अगर लोग समय पर वैक्सीन लेते रहें, अपनी इम्युनिटी मजबूत रखें और लक्षण दिखने पर सावधानी बरतें तो जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है. इसलिए जरूरी है कि अफवाहों से बचें और सिर्फ भरोसेमंद स्वास्थ्य जानकारी पर ही ध्यान दें.
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