क्या शुगर के मरीज नवरात्रों में रख सकते हैं व्रत? जानिए सेहत कैसा पड़ेगा असर
अक्सर लोगों का सवाल रहता है कि वह डायबिटीज की बीमारी का शिकार हैं, तो क्या वह नवरात्रों में व्रत रख सकते हैं? आइए International Diabetes Fedration से जानें सेहत क्या पड़ेगा असर.
शुगर के मरीज क्या नवरात्रों में व्रत रख सकते हैं? (Image: AI/PEXELS)
खबर की मुख्य बातें:
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भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिसका मुख्य कारण खराब खानपान, लाइफस्टाइल और कम फिजिकल एक्टिविटी है.
NIH के अनुसार, डायबिटीज तब होती है जब खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है, क्योंकि शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या उसका सही उपयोग नहीं कर पाता.
International Diabetes Federation के अनुसार, व्रत इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार और वजन कंट्रोल में मदद कर सकता है, लेकिन हाइपोग्लाइसीमिया और डिहाइड्रेशन का खतरा भी बढ़ाता है.
डायबिटीज के मरीजों को नवरात्रों में व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि व्रत का ब्लड ग्लूकोज स्तर पर अलग-अलग प्रभाव पड़ सकता है.
नवरात्रों में व्रत हर कोई रखना चाहता है, लेकिन कुछ बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए यह नेक काम काफी मुश्किल हो जाता है. खासतौर से जिन व्यक्ति को डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी हो. भारत में आज डायबिटीज से पीड़ित लोगों को संख्या में तेजी से इजाफा देखने को मिल रहा है, जिसका सबसे बड़ा कारण खराब खानपान, लाइफस्टाइल, कम फिजिकल एक्टिविटी या फिर परिवार का इतिहास हो सकता है. डायबिटीज के मरीजों के लिए सबसे मुश्किल काम ब्लड शुगर को कंट्रोल रखना होता है, क्योंकि उसमें उतार-चढ़ाव सेहत पर गंभीर असर डाल सकती है. ऐसे में ये सवाल बहुत बार उठता है कि क्या शुगर की बीमारी से पीड़ित लोग नवरात्रों में व्रत रख सकते हैं या नहीं? अगर रखते हैं, तो इससे सेहत पर क्या असर पड़ेगा?
आपको बता दें कि इस बीमारी को जरा से हल्के में लेना आपकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. NIH के अनुसार, डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जो तब होती है, जब खून में ग्लूकोज का लेवल बढ़ने लगता है. ये ग्लूकोज आपके शरीर में एनर्जी पैदा करती है. इतना ही नहीं, आपको बता दें कि, इंसुलिन एक हार्मोन है जो पैंक्रियाज में बनता है, यह ग्लूकोज को आपकी सेल्स तक पहुंचाने में मदद करता है ताकि उसका इस्तेमाल एनर्जी के लिए सही तरीके से किया जा सके. लेकिन डायबिटीज की स्थिति में आपका शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता है/ बनाना बंद कर देता है या फिर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता है. इस समस्या के कारण ग्लूकोज आपके खून में रह जाता है और आपकी कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाता है. इस बीमारी का असर, दिल, किडनी, आंख, दिमाग आदि पर गंभीर रूप से पड़ता है और इन्हें ये नुकसान पहुंचाता है, जिससे व्यक्ति की मौत तक हो सकती है.
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डायबिटीज की स्थिति में व्रत रखना कैसा है?
International Diabetes Federation के अनुसार, कई रिसर्च से पता चलता है कि उपवास (व्रत) के कुछ तरीके इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बनाने, वजन को कंट्रोल करने और टाइप 2 डायबिटीज के खतरे को कम करने में मददगार हो सकते हैं. हालांकि, व्रत से हाइपोग्लाइसीमिया (कम ब्लड ग्लूकोज), हाइपरग्लाइसीमिया (हाई ब्लड ग्लूकोज ), डिहाईड्रेशन और डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (डीकेए) का खतरा भी बढ़ सकता है, खासकर इंसुलिन या ग्लूकोज कम करने वाली दवाओं का सेवन करने वाले लोगों में. International Diabetes Federation के अनुसार, चूंकि व्रत का ब्लड ग्लूकोज का स्तर हर व्यक्ति में अलग-अलग तरह से प्रभावित कर सकता है, इसलिए बेहतर रहेगा कि मरीज नवरात्रों में व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें.
डायबिटीज मरीजों पर व्रत रखने पर कैसा पड़ेगा असर?
International Diabetes Federation के अनुसार, व्रत के दौरान, शरीर ऊर्जा बनाने और इस्तेमाल करने का तरीका बदल देता है. जब खाने से ग्लूकोज नहीं मिलता, तो शरीर ऊर्जा के लिए जमा ग्लूकोज और फैट का इस्तेमाल करने लगता है. ग्लूकागॉन जैसे हार्मोन ब्लड ग्लूकोज के स्तर को कंट्रोल करने और व्रत के दौरान ऊर्जा बनाने में मदद करते हैं.
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इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार
ब्लड में शुगर के स्तर में कमी
वजन कंट्रोल रखने में मददगार
ब्लड प्रेशर में कमी
कुछ अध्ययनों के अनुसार, रुक-रुककर व्रत करना या कैलोरी कम लेना टाइप 2 डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है. हालांकि, इसके लिए डॉक्टर की सलाह और सही डाइट प्लान का पालन करना जरूरी है.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.