Cervical Cancer: सर्वाइकल कैंसर की जांच कब और कैसे करानी चाहिए? डॉक्टर ने बताया टेस्ट का नाम

सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए HPV वैक्सीनेशन के साथ-साथ सही समय पर स्क्रीनिंग कराना भी जरूरी है. आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि कैंसर का टेस्ट किस उम्र में कराना चाहिए और इसके लिए कौन-सा टेस्ट किया जाता है.

Cervical Cancer

सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग उम्र और लक्षण के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है. Image Credit- AI

महिलाओं को कुछ बीमारियां ऐसी हो जाती हैं, जिनका पता शुरुआती स्टेज में नहीं लगाया जा सकता. इसी लिस्ट में सर्वाइकल कैंसर भी शामिल है, क्योंकि यह कैंसर बच्चेदानी के निचले हिस्से यानी सर्विक्स में होता है. इस बीमारी की शुरुआत अक्सर सर्विक्स यानी बच्चेदानी के सेल्स में बदलाव होने की वजह से होती है. अगर वक्त रहते इन बदलावों की पहचान कर ली जाए तो कैंसर बनने से पहले ही कंट्रोल किया जा सकता है. इसको लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि सर्वाइकल कैंसर के लगभग सभी मामले हाई-रिस्क ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के इंफेक्शन से जुड़े होते हैं. कुछ महिलाओं में यह इंफेक्शन लंबे समय तक बना रह सकता है, जिससे कैंसर का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है. इसलिए सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए HPV वैक्सीनेशन के साथ-साथ सही समय पर स्क्रीनिंग कराना भी जरूरी है. हालांकि, कई महिलाओं को यह जानकारी नहीं होती कि इस कैंसर का टेस्ट किस उम्र में कराना चाहिए और इसके लिए कौन-सा टेस्ट किया जाता है. अगर आपको भी नहीं पता है तो डॉक्टर तरंग कृष्णा से सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी कुछ अहम बातें विस्तार से जानते हैं.  

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क्या है सर्वाइकल कैंसर?

सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला पांचवां सबसे आम कैंसर है. 2024 में इसके लगभग 604000 नए मामले सामने आए और लगभग 280000 मौतें हुईं. बता दें, सर्वाइकल कैंसर बच्चेदानी के निचले हिस्से यानी सर्विक्स में होने वाला कैंसर है और बच्चेदानी को योनि से जोड़ने का काम करता है. इस कैंसर का कारण हाई-रिस्क एचपीवी इंफेक्शन है. ज्यादातर एचपीवी इंफेक्शन अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन कई बार इंफेक्शन बढ़ जाता है. 

सर्वाइकल कैंसर की जांच किस उम्र में करानी चाहिए?

सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग की सही उम्र इस बात पर निर्भर करती है कि महिला की मेडिकल हिस्ट्री क्या है. भारत में आमतौर पर 30 से 65 साल की महिलाओं के सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग पर जोर दिया जाता है. इसके लिए VIA यानी एसिटिक एसिड के साथ विजुअल इंस्पेक्शन (Visual Inspection with Acetic Acid) टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, स्क्रीनिंग उम्र और लक्षण के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है जैसे- HPV DNA टेस्ट और पैप स्मीयर टेस्ट आदि. 

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अगर आपकी उम्र 30 साल या उससे ज्यादा है और आपने अब तक सर्वाइकल कैंसर का टेस्ट नहीं कराया है तो एक बार अपने डॉक्टर से बात करें. साथ ही, अपनी उम्र और हेल्थ हिस्ट्री के हिसाब से टेस्ट कराएं. अगर आपको कैंसर से जुड़े लक्षण जैसे ब्लीडिंग होना, मेनोपॉज के बाद भी ब्लीडिंग होना या सफेद पानी की शिकायत होना आदि नजर आ रहे हैं तो टेस्ट जरूर कराएं.  

सर्वाइकल कैंसर में कौन-से टेस्ट किए जाते हैं?

सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं. इनमें पैप स्मीयर टेस्ट, HPV DNA टेस्ट और VIA टेस्ट शामिल हैं. WHO के मुताबिक, 9-14 साल की लड़कियों के लिए HPV वैक्सीन लगानी जरूरी है. यह टीका कैंसर से महिलाओं को बचाने का काम करता है. वहीं, 30 साल की उम्र से (HIV से पीड़ित महिलाओं के मामले में 25 साल की उम्र से) सर्वाइकल स्क्रीनिंग कराने से सर्वाइकल प्री-कैंसर का पता लगाया जा सकता है. किसी भी उम्र में अगर महिलाओं में लक्षण दिखने पर जल्दी पहचान कर ली जाए और तुरंत इलाज मिल जाए तो सर्वाइकल कैंसर को ठीक किया जा सकता है.

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पैप स्मीयर टेस्ट क्या है?

पैप स्मीयर टेस्ट को पैप टेस्ट भी कहा जाता है, जिसमें बच्चेदानी का सैंपल लिया जाता है और लैब में भेज दिया जाता है. ताकि पता लगाया जा सके कि उनमें कोई बदलाव तो नहीं हो रहा है. इस टेस्ट की मदद से कैंसर बनने से पहले ही पहचान कर ली जाती है. 

एचपीवी डीएनए टेस्ट क्या है?

एचपीवी डीएनए टेस्ट में सर्विक्स का सैंपल लेकर हाई-रिस्क एचपीवी का पता लगाया जाता है. एचपीवी के कुछ प्रकार लंबे समय तक शरीर में बने रहने पर सर्वाइकल कैंसर का कारण बन सकते हैं. यह टेस्ट इंफेक्शन की पहचान करने में मदद करता है, लेकिन एचपीवी पॉजिटिव आने का मतलब कैंसर होना नहीं है.

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VIA टेस्ट क्या है?

यह सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग का एक तरीका है, जिसका भारत के कई सरकारी जगहों पर किया जाता है. इस दौरान एसिटिक एसिड का इस्तेमाल किया जाता है और बच्चेदानी में आए बदलावों को चेक किया जाता है. 

सर्वाइकल कैंसर की जांच कैसे की जाती है?

कई महिलाएं टेस्ट के नाम से घबरा जाती हैं और इसी वजह से टेस्ट कराने में देरी करती हैं. जबकि पैप स्मीयर और एचपीवी डीएनए टेस्ट आमतौर पर कुछ ही मिनटों में पूरे हो जाते हैं. हालांकि, टेस्ट के बाद हल्की स्पॉटिंग हो सकती है, लेकिन अगर ज्यादा ब्लीडिंग, तेज दर्द या कोई परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से बात करें.  

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सर्वाइकल कैंसर की जांच से पहले किन बातों का ध्यान रखें?

  • सबसे पहले डॉक्टर को अपनी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में बताएं और अगर पहले कभी पैप स्मीयर या HPV टेस्ट कराया है तो उसकी रिपोर्ट भी दिखाएं. 
  • अगर आपके पीरियड्स चल रहे हैं तो टेस्ट की तारीख आगे करवाएं. 
  • अगर आपको ब्लीडिंग या लगातार दर्द होने जैसे लक्षण हैं तो सिर्फ स्क्रीनिंग टेस्ट न कराएं. 

सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

  • पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग होना
  • यौन संबंध के बाद खून आना
  • मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग होना
  • डिस्चार्ज होना 
  • पेल्विक हिस्से में दर्द होना 
  • पीठ में दर्द रहना 

सर्वाइकल कैंसर होने का सबसे बड़ा कारण क्या है?

सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण हाई-रिस्क HPV इंफेक्शन का लंबे समय तक बने रहना है. हालांकि,  HPV  इंफेक्शन को सही किया जा सकता है, लेकिन हाई-रिस्क पर आ जाने के बाद इसे ठीक करना मुश्किल हो जाता है. 

क्या सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए HPV वैक्सीन लगवानी चाहिए?

HPV वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर से बचने का आसान तरीका है. यह वैक्सीन कैंसर पैदा करने वाले HPV को खत्म करने का काम करती है. WHO का कहना है कि HPV वैक्सीनेशन से लड़कियों में सर्वाइकल कैंसर का खतरा कम हो जाता है. अगर आप या आपके परिवार में कोई HPV वैक्सीन लगवाने के बारे में सोच रहा है तो डॉक्टर से इसके लाभ, सही उम्र और डोज शेड्यूल के बारे में जरूर बात करें.

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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