क्या प्रेग्नेंसी में उल्टा सोने से बच्चे को खतरा होता है? जानिए गर्भवती महिलाओं के लिए सोने की सही पोजीशन
शुरुआती महीनों में पेट के बल सोना सही माना जाता है, लेकिन जैसे-जैसे पेट बढ़ता है तो इस पोजिशन में सोना मुश्किल हो सकता है. इसलिए यह जानना जरूरी है कि प्रेग्नेंसी में सोने की सही पोजीशन क्या है.
प्रेग्नेंसी में सोने की सही पोजीशन क्या है और पेट के बल सोने से बच्चे की हेल्थ पर क्या असर हो सकता है. Image Credit- AI
Pregnancy Sleeping Position: मां बनना दुनिया का सबसे खूबसूरत एहसास है. 9 महीने चलने वाला ये प्रोसेस बहुत ही सेंसिटिव होता है, क्योंकि इस दौरान खाने-पीने का काफी ध्यान रखा जाता है. जरा सी गलती हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकती है और यह एहसास आपसे छीन सकती है. गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत को लेकर महिलाओं के मन में कई तरह के सवाल भी आते हैं. इन्हीं में से एक सवाल है कि क्या प्रेग्नेंसी में पेट के बल यानी उल्टा सोने से बच्चे को नुकसान पहुंच सकता है? क्या सोते समय शरीर का वजन बच्चे पर पड़ता है? साथ ही, किस महीने से सोने की पोजीशन बदल लेनी चाहिए और क्या पीठ के बल सोना सही माना जाता है.
इसको लेकर गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर अंबरीम का कहना है कि प्रेग्नेंट महिलाओं को अपनी और आने वाले नन्हे मेहमान की सेहत का रखना बहुत जरूरी है. शुरुआती महीनों में पेट के बल सोना सही माना जाता है, लेकिन जैसे-जैसे पेट बढ़ता है तो इस पोजिशन में सोना मुश्किल हो सकता है. वहीं, प्रेग्नेंसी के 28 सप्ताह के बाद सोने की शुरुआत करवट लेकर करना बेहतर माना जाता है. आइए विस्तार से जानते हैं कि प्रेग्नेंसी में सोने की सही पोजीशन क्या है और पेट के बल सोने से बच्चे की हेल्थ पर क्या असर हो सकता है.
क्या प्रेग्नेंसी में उल्टा सोने से बच्चे को खतरा होता है?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि पेट के बल सोने और पीठ के बल सोने की पोजीशन अलग-अलग होती है. पेट के बल सोने का मतलब है कि आपका पेट बिस्तर की तरफ है, जबकि पीठ के बल सोने में आपका चेहरा ऊपर और पीठ बिस्तर पर होती है. शुरुआती महीनों में पेट के बल सोना आमतौर पर नुकसानदायक नहीं माना जाता, अगर महिला को इस पोजीशन में आराम महसूस हो. इसलिए एक्सपर्ट भी 3 महीने तक आराम से सोने की सलाह देते हैं, लेकिन 4 से 9 महीने के बीच पेट के बल सोना बच्चे के लिए खतरा बन सकता है.
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प्रेग्नेंसी में किस महीने तक पेट के बल सो सकते हैं?
इस सवाल का जवाब हर महिला के लिए बिल्कुल एक जैसा नहीं होता, क्योंकि हर गर्भावस्था अलग होती है. इसको लेकर एक्सपर्ट का कहना है कि पहले तीन महीने में आप किसी भी पोजीशन में सो सकते हैं, क्योंकि इस दौरान यूट्रस छोटा होता है और पेट दबने से बच्चे को कोई परेशानी नहीं होती.
तीसरा महीना होने पर क्या करें?
चौथे से छठे महीने में पेट का आकार बढ़ने लगता है और कई महिलाओं को पेट के बल लेटने में परेशानी महसूस होने लगती है. अगर पेट के बल सोने में परेशानी होने लगे तो करवट लेकर सोने की आदत डालना अच्छा हो सकता है.
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ब्लड फ्लो कम होना
चक्कर आना
घबराहट होना
सांस फूलने की बीमारी
ब्लड सप्लाई कम हो जाना
किस पोजीशन में सोना रहेगा बेस्ट?
इस दौरान पेट काफी बढ़ जाता है और आराम से सोना मुश्किल हो सकता है. इसलिए NHS और अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियंस एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स (ACOG) ने 28 हफ्ते के बाद महिलाओं को बाईं या दाईं करवट से सोने की सलाह दी है.
प्रेग्नेंसी में बाईं करवट सोना बेहतर है या दाईं?
कई महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे बाईं करवट सोएं. इसका कारण यह है कि बाईं करवट पर सोने से कुछ महिलाओं में ब्लड फ्लो बेहतर हो सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दाईं करवट सोना गलत है. NHS के अनुसार, 28 हफ्तों के बाद बाईं या दाईं, दोनों करवट लेकर सोने बेहतर हो सकता है. इसलिए अगर बाईं करवट में कमर, कूल्हे या पेट में दर्द महसूस हो तो दाईं करवट ले सकती हैं.
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क्या करवट बदलने से बच्चे को नुकसान होता है?
रात भर एक ही पोजिशन में रहना जरूरी नहीं है. अगर महिला एक करवट से दूसरी करवट पर जाती है तो इससे आमतौर पर बच्चे को नुकसान नहीं होता. गर्भ में बच्चा गर्भाशय और एमनियोटिक फ्लूइड से सैफ रहता है. वहीं, अगर करवट बदलते समय दर्द, खिंचाव, चक्कर या कुछ और महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से बात करें.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.