Autoimmune Disease: गुस्सा हम सभी करते हैं, कई बार गुस्सा होने पर किसी पर चिल्ला देते हैं, अपनी भड़ास किसी और पर निकाल देते हैं या फिर अक्सर ही खून का घूंट पीकर रह जाते हैं. खासतौर से महिलाएं अपने गुस्से को अपने अंदर दबाए रखती हैं. स्टडीज के अनुसार, अपने अंदर गुस्सा दबाए रखना ऑटोइम्यून डिजीज से लिंक्ड हो सकता है. यूनिवर्सिटी ऑफ पिटर्सबर्ग की स्टडी में सामने आया कि जो महिलाएं अपने गुस्से को दबाती हैं उनमें दिल की दिक्कतें ज्यादा देखी गई हैं. कई दूसरी स्टडीज में इस बात का जिक्र किया गया है कि अपने अंदर गुस्से को दबाए रखने पर तनाव बढ़ता है और यह तनाव ऑटोइम्यून डिजीजेज की डेवलपमेंट को ट्रिगर कर सकता है.
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गुस्से को मन में रखना बीमारी की वजह बनता है
अपनी भावनाओं को दबा लेने पर शरीर में कोर्टिसोल बढ़ता है. कोर्टिसोल एक स्ट्रेस हार्मोन है जो इम्यून फंक्शन को बिगाड़ता हैं, हालांकि इसपर विस्तृत रिसर्च होना बाकी है. लेकिन, हालिया स्टडीज इस बात की ओर इशारा करती हैं कि हम अपने इमोशंस को किस तरह रेग्यूलेट करते हैं इसका असर हमारी ओवरऑल हेल्थ पर पड़ता है. हमारी सेहत बायोलॉजिकल फैक्टर्स से तो शेप होती ही है, साथ ही साइकोलॉजिकल, सोशल और पर्यावरण के इंफ्लुएंस से भी होती है.
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ऑटोइम्यून डिजीज क्या होती हैं
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ऑटोइम्यून डिजीज तब पनपती हैं जब शरीर का इम्यून सिस्टम बाहरी पाथोजेन्स और अपनी खुद की कोशिकाओं में फर्क नहीं कर पाता है. इससे शरीर कुछ ओर्गन्स और सिस्टम्स के विरोध में एंटीबॉडीज या नॉन-स्पेसिफिक एंटीबॉडीज बनाने लगता है जो व्यक्ति के अपने ही शरीर को अटैक करने लगती हैं.
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ऑटोइम्यून डिजीज या कंडीशंस कई तरह की होती है, इनमें से कुछ स्पेसिफिक हैं जैसे थायराइड डिजीज, रिमेटॉइड अर्थराइटिस, इरिटेबल बाइल सिंड्रोम या मल्टी सिस्टम कंडीशस जैसे मल्टीपल सेलेरॉसिस, सिस्टमेटिक ल्यूप्स वगैरह.
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महिलाओं में ज्यादा है खतरा
फीमेल सेक्स हार्मोन ऑटोइम्यून डिजीज की चपेट में ज्यादा आता है. इसे X क्रोमोजोम इनएक्टिवेशन प्रोसेस कहते हैं जोकि महिलाओं, नॉन-बाइनरी लोगों में, ट्रांस पुरुषों में और जो भी व्यक्ति दो X क्रोमोजोम के साथ पैदा हुए व्यक्ति में ओटोइम्यून डिजीजेज का खतरा बढ़ा देता है.
ऑटोइम्यून डिजीजेज की साइको इमोशनल जड़े भी हैं. ऐसा हार्मोनल बदलावों के कारण होता है. साइकोलॉजिकल स्ट्रेस इम्यून सिस्टम को प्रभावित करता है. महिलाओं में ऑटोइम्यून डिजीज मेंटल, फिजीकल, प्रीमेनोपॉजल, पॉस्ट मेनोपॉजस या प्रेग्नेंसी से हुए स्ट्रेस के कारण पनप सकती हैं.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.