Early Signs Of Brain Tumour: आज के दौर में ब्रेन ट्यूमर बढ़ती हुई बीमारी है, क्योंकि दिमाग काम ज्यादा बढ़ गया है. इसलिए शरीर में दिखने वाले संकेतों को नजरअंदाज ना करें, क्योंकि मामूली सिर दर्द कई बार ब्रेन ट्यूमर का संकेत हो सकता है. ध्यान देना का मतलब हर बात पर डरना नहीं है, बल्कि वक्त पर टेस्ट और इलाज करने का तरीका है. इससे बीमारी का पता वक्त पर किया जा सकता है. इसको लेकर एक्सपर्ट डॉक्टर प्रद्युम्न ओक (जो नानावटी मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में प्रिंसिपल डायरेक्टर और न्यूरोलॉजी हैं) का कहना है कि ब्रेन ट्यूमर किसी भी उम्र में हो सकता है. हालांकि, हर ब्रेन ट्यूमर कैंसर नहीं होता, लेकिन अगर दिमाग में जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए तो शरीर में कई तरह के बदलाव आ सकते हैं. बोलने, देखने, याददाश्त या कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं. यही वजह है कि इसके शुरुआती संकेतों को पहचानना और समय पर इलाज करवाना बेहद जरूरी है. हर स्टेज के हिसाब से इसकी पहचान करना भी जरूरी है, ताकि वक्त पर इसका इलाज किया जा सके.
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नॉर्मल समस्याएं हो सकती हैं शुरुआती लक्षण
ब्रेन ट्यूमर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं जैसे दिखाई देते हैं. उदाहरण के लिए, सिरदर्द एक आम समस्या है, लेकिन अगर सिरदर्द बार-बार हो रहा हो या उसके साथ अन्य लक्षण भी दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
ब्रेन ट्यूमर के शुरुआती स्टेज के संकेत
- धुंधला दिखाई देना
- बार-बार मतली या उल्टी होना
- दौरे पड़ना
- चलते समय संतुलन बिगड़ना
- शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी महसूस होना
- बोलने में परेशानी
- भ्रम या कन्फ्यूजन होना
हर सिरदर्द ब्रेन ट्यूमर नहीं होता
यह समझना भी जरूरी है कि हर सिरदर्द या चक्कर आना ब्रेन ट्यूमर का संकेत नहीं होता, लेकिन अगर कोई लक्षण ना हो, लगातार बना रहे, समय के साथ बढ़ता जाए या इंसान के लिए नॉर्मल ना हो तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. खासतौर पर तब जब ये समस्याएं हर रोज देखने को मिल रही है.
गंभीर स्टेज के संकेत
- ठीक से चलने में परेशानी होना
- साफ दिखाई ना देना
- बार-बार उल्टी होना
- हेल्दी इंसान को अचानक दौरा पड़ना
पहचान के लिए क्या करें?
ब्रेन ट्यूमर की पहचान करने के लिए डायग्नोसिस करना जरूरी होता है. डॉक्टर जरूरत पड़ने पर सीटी स्कैन या एमआरआई जैसे टेस्ट भी कराते हैं. कई बार ट्यूमर की पहचान करने के लिए कई मामलों की जरूरत पड़ती है. कई बार मरीज खुद अपने अंदर हो रहे बदलावों को नहीं पहचान पाता, खासकर जब समस्या याददाश्त, मूड या व्यवहार को पहचानने में परिवार की अहम भूमिका होती है.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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