अच्छी सेहत के लिए लाइफस्टाइल को बेहतर रखना काफी जरूरी है, लेकिन कुछ आदतों के कारण इतना कमजोर हो जाता है कि शरीर अंदर से खोखला हो जाता है और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है. आमतौर पर गंभीर बीमारियों में लोगों के दिमाग में डायबिटीज, हार्ट की बीमारी, किडनी की बीमारी आदि आती है, लेकिन इन्हीं के साथ ट्यूमर में एक खतरनाक बीमारी है, जो शरीर में शांति से बढ़ता रहता है और व्यक्ति को अपनी चपेट में ले लेता है. हम इस स्टोरी में ब्रेन ट्यूमर के बारे में बताएंगे, यानी दिमाग का ट्यूमर. ब्रेन ट्यूमर दुनिया की उन खतरनाक बीमारियों में से एक है, जिसके कारण लोगों की बड़ी संख्या में मौत होती है. ऐसा नहीं है कि जब यह बीमारी अपनी जड़ों को मजबूत कर रही होती है, तो शरीर में कुछ संकेत नहीं दिखाई देते हैं, दिखाई देते हैं, लेकिन वह इतने आम होते हैं कि लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते है. आइए आपको बताएं ब्रेन ट्यूमर की स्थिति में कौन-कौन से संकेत दिखाई दे सकते हैं?
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क्या कै ब्रेन ट्यूमर की बीमारी
Harvard Health Publishing के अनुसार, ब्रेन ट्यूमर एक ऐसी स्थिति है, जिसमें दिमाग या खोपड़ी में असामान्य कोशिकाएं बढ़ने लगती हैं और एक गांठ का रूप ले लेती हैं. ब्रेन ट्यूमर वैसे तो दो प्रकार के होते हैं, सौम्य (बिनाइन), जो कैंसर नहीं होता, और (मैलिग्नेंट), जो कैंसर होता है. दिमाग के टिशू से शुरू होने वाला प्राइमरी ब्रेन कैंसर आमतौर पर शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैलता. हालांकि, ब्रेन ट्यूमर कैंसरयुक्त हो या गैर-कैंसरयुक्त, दोनों ही गंभीर हो सकते हैं, इसलिए इन्हें नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता है. बता दें कि, जैसे-जैसे ट्यूमर बढ़ता है, वह दिमाग की अन्य संरचनाओं पर दबाव डालकर उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है और व्यक्ति को भविष्य कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है और सही इलाज न मिलने पर मौत तक हो सकती है.
ब्रेन कैंसर के प्रकार भी खतरनाक
NHS के अनुसार, ब्रेन ट्यूमर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं- गैर-कैंसरयुक्त और कैंसरयुक्त. गैर-कैंसरयुक्त ब्रेन ट्यूमर धीरे-धीरे बढ़ते हैं और इलाज के बाद दोबारा होने की संभावना कम होती है. इनमें ज्यादातर ग्रेड 1 और 2 के ट्यूमर शामिल होते हैं. वहीं, कैंसरयुक्त ब्रेन ट्यूमर आमतौर पर ग्रेड 3 और 4 के होते हैं. ये दिमाग में ही शुरू हो सकते हैं या शरीर के दूसरे हिस्सों से फैलकर दिमाग तक पहुंच सकते हैं. ग्लायोमा भी एक प्रकार का ब्रेन ट्यूमर है, जो ग्रेड 2 से 4 तक हो सकता है. इसलिए अगर ट्यूमर के लक्षण दिखाई दें तो, बिना देरी किए डॉक्टर से जांच और उनकी सलाह के अनुसार चलना बेहतर रहेगा.
कैसे दिखते हैं ब्रेन ट्यूमर में लक्षण?
ब्रेन ट्यूमर जैसी खतरनाक बीमारी लक्षण भी खतरनाक दिखे ऐसा जरूरी नहीं है. आपको जानकर हैरानी होगी कि इसके लक्षण बहुत सामान्य से दिखते हैं, जिस कारण ज्यादातर लोग इन लक्षणों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और दवाओं का सेवन करने लगते हैं. NHS के अनुसार, ब्रेन ट्यूमर के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि वह दिमाग के किस हिस्से में है. कुछ आम लक्षणों में;
- सिरदर्द
- दौरे पड़ना (fits)
- लगातार जी मिचलाना, उल्टी आना और सुस्ती महसूस होना
- दिमागी या व्यवहार संबंधी बदलाव महसूस होना, जैसे याददाश्त की समस्याएं
- शरीर के एक हिस्से में धीरे-धीरे कमजोरी आना या लकवा मार जाना (Paralysis)
- देखने या बोलने में समस्याए
कभी-कभी शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखते, या फिर ये समय के साथ बहुत धीरे-धीरे विकसित हो सकते हैं.
किन लोगों को अपना शिकार बना सकता है ब्रेन ट्यूमर?
आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि आखिर किन-किन लोगों को ब्रेन ट्यूमर हो सकता है, क्या कोई उम्र सीमा है या कुछ और? NHS के अनुसार, ब्रेन ट्यूमर (Brain Tumour) एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को अपना शिकार बना सकती है, ऐसा जरूरी नहीं है किसी किसी खास उम्र के व्यक्ति को ही ये बीमारी होगी. यह बीमारी बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में हो सकती है, हालांकि इसके मामले ज्यादातर उम्रदराज लोगों में देखने को मिलते हैं. Cancer Research Institute के आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में हर साल लगभग 308,000 पुरुषों और महिलाओं में दिमाग (Brain) और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) के कैंसर का पता चलता है, और इस बीमारी के कारण 251,000 से ज्यादा लोगों की मौत तक हो जाती है.
किन-किन कारणों से बढ़ता है ब्रेन ट्यूमर का खतरा?
ब्रेन ट्यूमर होने का खतरा कई चीजों पर निर्भर कर सकता है. इनमें उम्र, रेडिएशन के संपर्क में आना, पारिवारिक इतिहास और कुछ जेनेटिक स्थितियां शामिल हैं. हालांकि, NHS के अनुसार, जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति में इन कारकों के कारण ही ब्रेन ट्यूमर विकसित हो. ब्रेन कैंसर के प्रमुख कारण;
उम्र बढ़ना (Age): उम्र बढ़ने के साथ ब्रेन ट्यूमर होने का जोखिम भी बढ़ सकता है. ज्यादातर ब्रेन ट्यूमर के मामले ज्यादा उम्र के लोगों में देखने को मिलते हैं. विशेष रूप से, 85 से 89 वर्ष की उम्र के लोगों में ब्रेन ट्यूमर के मामले सबसे ज्यादा पाए जाते हैं. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ब्रेन ट्यूमर सिर्फ बुजुर्गों को ही नहीं होता. इसके कुछ प्रकार बच्चों में भी आम होते हैं.
रेडिएशन के संपर्क में आना (Radiation Exposure): रेडिएशन के संपर्क में आने के भी कारण ब्रेन ट्यूमर हो सकता है. हालांकि, कुछ प्रकार के ब्रेन ट्यूमर उन लोगों में पाए जा सकते हैं, जिन्होंने पहले रेडियोथेरेपी (Radiotherapy) करवाई हो. बहुत ही दुर्लभ मामलों में सिर का CT स्कैन या X-ray करवाने का संबंध भी ब्रेन ट्यूमर के जोखिम से हो सकता है. फिर भी, रेडिएशन के कारण होने वाले ब्रेन ट्यूमर की संख्या बहुत कम होती है.
पारिवारिक इतिहास और जेनेटिक स्थितियां (Family History and Genetic Conditions): कुछ जेनेटिक मामलों में ब्रेन ट्यूमर होने के जोखिम को बढ़ा सकती हैं. यदि किसी व्यक्ति में ऐसी जेनेटिक स्थिति मौजूद है, तो उसमें ब्रेन ट्यूमर विकसित होने की आशंका बढ़ सकती है. इन स्थितियों में ट्यूबरस स्क्लेरोसिस (Tuberous Sclerosis), न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 1 (Neurofibromatosis Type 1), न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 2 (Neurofibromatosis Type 2) और टर्नर सिंड्रोम (Turner Syndrome) शामिल हैं. ये कुछ ऐसी जेनेटिक स्थितियां हैं, जिनका संबंध ब्रेन ट्यूमर के बढ़ते जोखिम से जाना जाता है. इसके अलावा परिवार में पहले किसी को ब्रेन ट्यूमर रहा हो, तो भी इस बीमारी का खतरा बना रहता है.
कैसे हो सकता है ब्रेन ट्यूमर का इलाज?
अगर किसी व्यक्ति को ब्रेन ट्यूमर है, तो इसका इलाज कुछ चीजों पर निर्भर करेगा. NHS के अनुसार,
- ट्यूमर का प्रकार
- आपके दिमाग में यह कहां स्थित है
- यह कितना बड़ा है और कितना फैल चुका है
- कोशिकाएं कितनी असामान्य हैं
- आपका कुल स्वास्थ्य और फिटनेस कैसा है
इसके अलावा अगर ट्रीटमेंट की बात करें, तो इस बीमारी से राहत दिलाने के लिए डॉक्टर;
- स्टेरॉयड
- लक्षणों में राहत देने वाली दवाएं
- सर्जरी
- रेडियोथेरेपी
- कीमोथेरेपी
इन ट्रीटमेंट का सहारा ले सकते हैं. लेकिन ध्यान रखें कि अगर ब्रेन ट्यूमर कैंसरयुक्त है, तो देरी जानलेवा बन सकती है. इसलिए डॉक्टर से सलाह और इलाज जरूरी है.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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SOURCE: HARVARD HEALTH PUBLISING, NHS, CANCER RESEARCH INSTITUTE
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