Kidney Failure Symptoms: किडनी की ज्यादातर दिक्कतों को अक्सर ही लोग नजरअंदाज कर देते हैं. शुरुआती दौर में खासतौर से ये दिक्कतें आम परेशानी लगती हैं. लेकिन, जब तक किडनी प्रॉब्लम्स डायगनॉज होती हैं यानी जबतक इनकी जांच होती है तबतक कई हद तक बीमारी (Kidney Disease) फैल चुकी होती है. किडनी शरीर का फिल्टर सिस्टम है जो शरीर से टॉक्सिंस और गंदगी को बाहर निकालती है. अगर किडनी ठीक तरह से काम नहीं करती है तो शरीर के हर एक अंग पर इसका प्रभाव पड़ता है. इसीलिए शुरुआत में ही किडनी की दिक्कतों को पहचानना और इलाज शुरू करना जरूरी होता है. समय पर इलाज ना मिलने से किडनी फेलियर की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे में यहां जानिए ऐसे कौन से लक्षण हैं जो बताते हैं कि किडनी की सेहत ठीक नहीं है और किडनी फेलियर की तरफ बढ़ने लगी है.

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किडनी फेलियर के शुरुआती लक्षण कैसे दिखते हैं

पेशाब से जुड़ी दिक्कतें - किडनी के ठीक तरह से काम ना करने पर पेशाब से जुड़ी दिक्कतें (Urine Problems) होने लगती हैं. बार-बार पेशाब आना, पेशाब में झाग नजर आना, पेशाब की रंगत गहरी हो जाना और पेशाब में खून नजर आना किडनी की सेहत बिगड़ने के लक्षण हो सकते हैं.

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सूजन आना - किडनी खराब होने पर शरीर में वॉटर रिंटेशन होने लगता है. यह एक्सेस फ्लुइड आंखों के आस-पास, पेट और पैरों पर जमने लगता है जिससे इन हिस्सों में सूजन नजर आने लगती है.

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हाई ब्लड प्रेशर - किडनी की दिक्कतें हाई ब्लड प्रेशर का भी कारण बन सकती हैं. इससे किडनी में इंफ्लेमेशन जैसी दिक्कतें भी आती हैं.

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कमजोरी और थकान - किडनी खराब होती है तो शरीर में अक्सर ही थकान रहने लगती है, शरीर कमजोर महसूस करने लगता है.

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भूख में कमी - भूख में कमी आने लगती है, जी मितलाने लगता है और अक्सर ही उल्टी जैसा महसूस होता है.

त्वचा पर असर - किडनी की दिक्कतों में त्वचा पर भी लक्षण नजर आते हैं. त्वचा ड्राई होने लगती है, त्वचा पर खुजली महसूस होती है और त्वचा की रंगत गहरी नजर आ सकती है, खासकर गर्दन के पीछे कालापन नजर आता है.

कैसे होता है किडनी की बीमारियों का इलाज

किडनी की बीमारियों में शुरुआती स्टेज में शरीर पर होने वाली दिक्कतों को कंट्रोल करने की कोशिश की जाती है. इसमें डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी दिक्कतों को खान-पान, दवाओं और लाइफस्टाइल में बदलाव करके बेहतर किया जाता है. इस स्टेज में अगर मरीज का वजन ज्यादा है तो वजन कम करने पर जोर दिया जाता है.

दिक्कत गंभीर होने लगती है तो किडनी खराब होने पर शरीर में हुए अनीमिया, इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस और एडेमा जैसी दिक्कतों को ठीक करने पर ध्यान दिया जाता है. इस दौरान किडनी फंक्शन की क्लॉज मोनिटरिंग की जाती है.

किडनी फेलियर की आखिरी स्टेज में हेमोडायलाइसिस और पेरिटोनियल डायलिसिस जैसे ट्रीटमेंट्स किए जाते हैं. इसके अलावा, इस स्टेज में किडनी ट्रांसप्लांट की कोशिश की जाती है जिससे कि मरीज की क्वालिटी ऑफ लाइफ बेहतर हो सके.

दोनों किडनी फेल हो जाने पर क्या होता है

  • किसी व्यक्ति की अगर दोनों किडनी फेल हो जाए तो उसके शरीर में हर समय थकान रहती है और कमजोरी महसूस होती है.
  • पैरों में सूजन नजर आती है, टखने सूज जाते हैं और चेहरा भी फूला हुआ दिखने लगता है.
  • हाथ-पैर सुन्न पड़ जाते हैं और उनमें अक्सर ही झनझनाहट होने लगती है.
  • पेशाब की दिक्कतें बढ़ जाती हैं और कई बार मरीज को ना के बराबर पेशाब आता है.
  • उल्टी जैसा महसूस होता है और व्यक्ति से कुछ भी खाया नहीं जाता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.