Belly Fat: लटकती तोंद से हैं परेशान? जानिए जिद्दी बेली फैट से कैसे मिलेगी राहत, रूटीन में करें ये छोटे बदलाव
क्या आप भी लचकती तोंद की समस्या से परेशान है और जल्दी अपने आपको फिट रखना चाहते हैं, तो आइए आपको कुछ आसान टिप्स देंते हैं; जिन्हें अपनाकर आप अपनी सेहत को बेहतर बना सकते हैं.
अच्छी सेहत के लिए शरीर का फिट रहना काफी जरूरी है, लेकिन आज बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं, जिनकी तोंद खराब लाइफस्टाइल के कारण बहुत ज्यादा निकली रहती है. लटकती तोंद दिखने में न सिर्फ बुरी लगती है, बल्कि इसका होना शरीर के लिए खतरे की घंटी है. आपको शायद जानकारी न हो, लेकिन किसी व्यक्ति की तोंद अगर बाहर निकली हुई है यानी मोटापे की समस्या का शिकार है, तो बहुत ज्यादा संभावना है कि वह कई स्वास्थ्य समस्याओं का शिकार हो सकता है. इस स्टोरी में हम आपको कुछ ऐसे टिप्स देंगे, जिन्हें फॉलो करके आप अपनी तोंद को कम कर सकते हैं.
आपके शरीर का आकार चाहे कैसा भी हो, शरीर में जरूरत से ज्यादा फैट (चर्बी) सेहत के लिए अच्छा नहीं होता. जब शरीर के फैट की बात आती है, तो यह मायने रखता है कि वह कहां जमा है. Harvards के अनुसार, सबसे ज्यादा खतरनाक वह फैट होता है जिसे आप अपनी उंगलियों से छूकर महसूस कर सकते हैं. ज्यादातर लोगों में, शरीर का लगभग 90% फैट ‘सबक्युटेनियस’ (subcutaneous) होता है, यानी वह फैट जो त्वचा के ठीक नीचे एक परत के रूप में जमा होता है. अगर आप अपने पेट को दबाकर देखें, तो जो फैट मुलायम महसूस होता है, वही सबक्युटेनियस फैट है. वहीं, बाकी का 10% फैट – जिसे ‘विसरल’ (visceral) या ‘इंट्रा-एब्डोमिनल’ (intra-abdominal) फैट कहा जाता है. यह लिवर, आंतों और शरीर के दूसरे अंगों के आस-पास की खाली जगहों में पाया जाता है.
सेहत पर क्या पड़ता है असर
Harvards के अनुसार, विसरल फैट का मुख्य खतरा यह है कि यह ब्लडस्ट्रीम और लिवर में फ्री फैटी एसिड छोड़कर कोलेस्ट्रॉल के प्रोडक्शन पर असर डालता है. रिसर्चर ने कई ऐसे केमिकल की पहचान की है जो विसरल फैट को कई तरह की बीमारियों से जोड़ते हैं. वहीं, सबक्युटेनियस फैट से फायदेमंद मॉलिक्यूल ज्यादा बनते हैं, जबकि विसरल फैट से ऐसे मॉलिक्यूल ज्यादा बनते हैं जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. विसरल फैट साइटोकाइन्स नाम के प्रोटीन ज्यादा बनाता है, जिससे हल्के लेवल की सूजन हो सकती है; यह सूजन दिल की बीमारी और दूसरी पुरानी बीमारियों का एक रिस्क फैक्टर है. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं बढ़ती तोंद का कारण सिर्फ एक फैट है और दूसरा अच्छा है, बल्कि सबक्यूटेनियस और विसेरल फैट दोनों मिलकर पेट की चर्बी बनाते हैं, लेकिन इनका व्यवहार अलग-अलग होता है और ये अलग-अलग तरीकों से दिखाई देते हैं.
अगर आप इन्हें नजरअंदाज करते हैं, तो सेहत पर कई गंभीर असर देखने को मिल सकते हैं, जिसमें;
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दिल की बीमारी
डिमेंशिया
ब्रेस्ट कैंसर
कोलोरेक्टल कैंसर
डायबिटीज
कैसे कम करें तोंद?
Harvards के अनुसार, कुछ आसान आदतों को अपनाकर आप लटकती तोंद की समस्या से राहत पा सकते हैं.
रोजाना एक्सरसाइज करें
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कमर की चर्बी और खासकर पेट के अंदर जमा विसरल फैट कम करने के लिए नियमित फिजिकल एक्टिवटी जरूरी है. रोज कम से कम 30 मिनट तेज चाल से पैदल चलें, साइकिल चलाएं या कोई दूसरी एक्सरसाइज करें.
कार्डियो के साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी करें
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तेज चलना जैसी एरोबिक एक्सरसाइज और वजन उठाने वाली स्ट्रेंथ ट्रेनिंग दोनों पेट की अंदरूनी चर्बी को कम करने में मदद कर सकती हैं.
खानपान पर ध्यान दें
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पेट की चर्बी कम करने के लिए संतुलित और पौष्टिक डाइट लें. ज्यादा चीनी वाली चीजों, मीठे चीजों का सेवन कम करें जिनमें फ्रुक्टोज या अतिरिक्त शुगर ज्यादा हो.
धूम्रपान से दूरी बनाएं
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धूम्रपान सिर्फ फेफड़ों को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि शरीर में फैट जमा होने के तरीके को भी प्रभावित कर सकता है. धूम्रपान करने वालों में पेट के आसपास चर्बी जमा होने की संभावना बढ़ सकती है. इसलिए पेट की चर्बी और ओवरऑल हेल्थ के लिए स्मोकिंग छोड़ना फायदेमंद है.
नींद लें
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नींद की कमी भी पेट के अंदर जमा होने वाली चर्बी से जुड़ी हो सकती है. हालांकि, बहुत ज्यादा नींद लेना भी फायदेमंद नहीं माना जाता. इसलिए रोज पर्याप्त और नियमित नींद लेने की कोशिश करें.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.