Legs Swelling Causes: ट्रिप पर जाने वाले लोग या काम से एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए लोग अलग-अलग तरह से सफर करते हैं, कोई घंटों तक ट्रेन या बस का सफर करता है तो कोई लंबी फ्लाइट लेता है. ऐसे में सफर के दौरान देर तक बैठे रहने पर पैरों में खून का थक्का बन सकता है जिसे ज्यादातर लोग इग्नोर कर देते हैं. इसी बारे में बताते हुए वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुमित कपाड़िया ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से एक वीडियो शेयर किया है और बताया है कि सफर में ब्लड क्लॉट कैसे बनता है, किन लोगों को खतरा ज्यादा है और इसके लक्षण पैरों पर कैसे दिखते हैं.

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सफर के दौरान बन सकता है ब्लड क्लॉट

डॉक्टर बताते हैं कि ज्यादातर लोगों को लगता है कि ब्लड क्लॉट बड़ी उम्र में ही होता है. लेकिन, ब्लड क्लॉट कम उम्र में भी बन सकता है. लंबी फ्लाइट के बाद जब आप लंबे समय तक बैठे रहते हैं और शरीर की मूवमेंट कम हो जाती है तो इससे ब्लड फ्लो धीमा पड़ जाता है. इससे ब्लड क्लॉट बनने का रिस्क बढ़ जाता है. इस कंडीशन को डीप थ्रोंबोसिस या DVT कहते हैं. फ्लाइट के टेक ऑफ से लेकर लैंडिंग तक शरीर एकदम स्टिल रहता है. इस समय काल्फ मसल्स खून को पैरों से दिल तक पुश करती हैं और मसल्स इनएक्टिव बन जाती हैं. खून जब पैरों की तरफ खिंचने लगता है तो ब्लड क्लॉट (Blood Clot) धीरे-धीरे फॉर्म हो सकता है.

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जो लोग 20 से 30 या 30 से 40 की उम्र के बीच हैं उन्हें भी डीप थ्रोंबोसिस हो सकता है. सबसे खतरनाक यह है कि अगर यह क्लॉट पैर से निकलकर फेफड़ों तक चला जाता है तो पल्मोनरी एंबोलिज्म हो सकता है जो हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारी का रिस्क बढ़ाता है.

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सफर से लौटकर कौन से लक्षण नहीं करने चाहिए इग्नोर

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अगर आप लंबे सफर से आ रहे हैं, खासकर फ्लाइट लेकर आ रहे हैं तो इन 3 लक्षणों को कभी इग्नोर ना करें -

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  • पैरों में सूजन होना
  • काल्फ मसल्स में दर्द होना या मसल्स का नाजुक महसूस होना
  • जहां दर्द या सूजन हैं वहां लाली नजर आना और त्वचा का गर्म महसूस होना.

किन लोगों को है ज्यादा खतरा

  • ब्लड क्लॉट बनने का खतरा उन लोगों में ज्यादा है जिन्हें पहले DVT रहा हो या पल्मोनरी एंबोलिज्म की समस्या हो
  • धूम्रपान करने वाले लोगों में
  • जो मोटापे से परेशान हैं
  • प्रेग्नेंट महिला या हाल ही में जिसने बच्चे को जन्म दिया हो
  • जिसकी हाल ही में कोई सर्जरी रही हो या हॉस्पिटल में रहना पड़ा हो
  • कैंसर हो या कैंसर ट्रीटमेंट्स की दवाएं ले रहे हों
  • एस्ट्रोजन वाली दवाएं लेने जैसे बर्थ कंट्रोल पिल्स या हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरैपी लेने वालों में
  • 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों में भी ब्लड क्लॉट बनने का खतरा ज्यादा रहता है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.