मिडिल ईस्ट में अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव अब ग्लोबल लेवल पर चिंता का विषय बन चुका है. इस युद्ध में जहां एक ओर अमेरिका और इजरायल खुलकर सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चीन एक अलग रणनीति अपनाता नजर आ रहा है. भारत की पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव ने इस पूरे घटनाक्रम को चीन की ‘साइलेंट डिप्लोमेसी’ बताया है. उनके मुताबिक, चीन अपनी चुप्पी की आड़ में वैश्विक कूटनीति का नया गेम प्लान बना रहा है. निरुपमा राव के मुताबिक, चीन की रणनीति केवल तटस्थ दिखने तक सीमित नहीं है. वह इस मौके का फायदा उठाकर अपना दायरा लगातार बढ़ा रहा है.
ये भी पढ़ें: ‘होर्मुज स्ट्रेट खोलो, वरना…’, ट्रंप ने फिर दी ईरान को धमकी – उड़ा देंगे तेल के कुएं और खार्ग द्वीप
निरुपमा राव ने क्या कहा?
निरुपमा राव ने एक्स पर लिखा, चीन काफी धैर्य दिखाता है. वो अंतरराष्ट्रीय विवादों में खुद को किसी भी तरह की इमोशनली इंगेज नहीं करता, उससे दूरी बनाकर रखता है. जहां बाकी देश आक्रामक बयानों और सैन्य तनाव में उलझे हुए हैं, वहीं चीन बिना कोई शोर मचाए ठंडे दिमाग से अपने दीर्घकालिक लक्ष्यों पर काम कर रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन इस संघर्ष में सीधे सैन्य हस्तक्षेप से बच रहा है, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर लगातार एक्टिव है. वो शांति वार्ता की अपील कर रहा है और सभी पक्षों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कह रहा है. दरअसल, चीन की रणनीति संतुलन बनाए रखने की है. उसके ईरान के साथ मजबूत आर्थिक और ऊर्जा संबंध हैं, वहीं वो खाड़ी देशों और बाकी पश्चिमी शक्तियों के साथ भी रिश्ते खराब नहीं करना चाहता. ऐसे में वो खुलकर किसी एक पक्ष का समर्थन करने से बच रहा है.
‘चीन गेम खेल रहा है’
निरुपमा राव के मुताबिक, चीन ‘लॉन्ग गेम’ खेल रहा है. वो अभी सीधे टकराव से बचते हुए खुद को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में पेश करना चाहता है. यही वजह है कि वो शांति की अपील करता है, लेकिन पर्दे के पीछे अपने फायदों को भी सुरक्षित रखता है. इस पूरे सीन में चीन की भूमिका बेहद अहम हो जाती है. वो ना तो पूरी तरह तटस्थ है और न ही खुलकर किसी पक्ष में. विश्लेषकों का मानना है कि चीन इस युद्ध को एक अवसर के रूप में भी देख रहा है. अमेरिका इस समय मध्य पूर्व में उलझा हुआ है, जिससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उसका ध्यान कमजोर पड़ सकता है. इससे चीन को अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने का मौका मिल सकता है. हालांकि, चीन के लिए यह स्थिति पूरी तरह फायदेमंद भी नहीं है. अगर युद्ध लंबा खिंचता है और तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, क्योंकि वह बड़े पैमाने पर खाड़ी क्षेत्र से तेल आयात करता है.
ये भी पढ़ें: पांच चरणों में होगा ईरान का अंत? ट्रंप का ‘ऑपरेशन 5G’ मचाएगा समंदर से जमीन तक खलबली!
संबंधित खबरें
पितृ पक्ष अमावस्या पर शुभ संयोग, पितरों को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय
27 mins agoशुक्रवार को इन 4 राशियों के लिए बनेंगे धनलाभ के योग, पढ़ें आज का राशिफल
3 hrs agoकैसा होता है आंख का फड़कना? महिला और पुरुष के लिए अलग है मतलब, जानिए
15 hrs agoमोहम्मद शमी ने अपनी पत्नी हसीन जहां को दिया करारा जवाब
18 hrs agoनाना पाटेकर को विराट कोहली और सचिन ने दी श्रद्धांजलि
20 hrs agoन्यूजीलैंड ए के खिलाफ क्यों खेलने वाले हैं टीम इंडिया के स्टार खिलाड़ी
21 hrs agoकब है धनतेरस? इस दिन खरीदारी करना क्यों माना जाता है शुभ
21 hrs agoभुवनेश्वर कुमार की टीम इंडिया में वापसी से टूटा RCB का सपना
1 day agoबचपन में अच्छे क्रिकेटर थे नाना पाटेकर, विराट कोहली के फैन थे अभिनेता
1 day agoन्यूजीलैंड दौरे पर 1 नहीं 2 वनडे टीम का हो सकता है सिलेक्शन
1 day agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines