सुपरकंप्यूटिंग की ग्लोबल रेस में चीन को बड़ी कामयाबी मिली है. चीन के शेनझेन शहर में मौजूद ‘लाइनशाइन’ (LineShine) सुपरकंप्यूटर ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटरों की प्रतिष्ठित TOP500 रैंकिंग में पहला नंबर हासिल कर लिया है. इसके साथ ही अमेरिका का एल कैपिटन (El Capitan) दूसरे नंबर पर पहुंच गया है. ये कामयाबी इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि साल 2017 के बाद पहली बार कोई चीनी सुपरकंप्यूटर TOP500 लिस्ट में सबसे ऊपर है. इससे पहले अमेरिका के सुपरकंप्यूटर लगातार इस सूची में आगे बने हुए थे.
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क्या है खास?
TOP500 लिस्ट दुनिया के सबसे तेज और शक्तिशाली सुपरकंप्यूटरों की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग है. इसमें कंप्यूटरों की क्षमता को खास तकनीकी परीक्षणों के आधार पर मापा जाता है. जून 2026 की सूची में लाइनशाइन ने सबसे ज्यादा प्रदर्शन करते हुए पहला नंबर हासिल किया. रिपोर्ट के मुताबिक, लाइनशाइन लगभग 2.198 एक्साफ्लॉप्स की क्षमता से काम करता है. आसान भाषा में कहें तो ये एक सेकंड में 2 क्विंटिलियन से भी ज्यादा काउंटिंग करने में सक्षम है. यही वजह है कि इसे दुनिया का सबसे तेज सुपरकंप्यूटर माना जा रहा है. इस सुपरकंप्यूटर की एक और खास बात है कि ये मुख्य रूप से CPU बेस्ड टेक्नॉलिजी का इस्तेमाल करता है और इसमें अमेरिकी GPU कंपनियों की तकनीक पर निर्भरता नहीं है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये उपलब्धि चीन की तकनीकी आत्मनिर्भरता का सबूत है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका ने एड्वांस चिप्स के निर्यात पर कई बैन लगाए हुए हैं.
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अमेरिका को पछाड़ा
TOP500 की नई सूची में अमेरिका के एल कैपिटन को दूसरा स्थान मिला है. इसके अलावा अमेरिका के दो और सुपरकंप्यूटर तीसरे और चौथे स्थान पर हैं, जबकि जर्मनी का जुपिटर सुपरकंप्यूटर पांचवें नंबर पर है. वर्तमान में दुनिया में सिर्फ पांच ऐसे सिस्टम हैं जिन्हें आधिकारिक रूप से एक्सास्केल सुपरकंप्यूटर माना जाता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि लाइनशाइन पारंपरिक वैज्ञानिक गणनाओं में बेहद शक्तिशाली है, लेकिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े कुछ खास कामों में GPU बेस्ड सिस्टम अभी भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं. इसके बावजूद TOP500 सूची में नंबर-1 बनना चीन के लिए एक बड़ी तकनीकी और रणनीतिक जीत माना जा रहा है.
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