Dawoodi Bohra Case: दाऊदी बोहरा समुदाय के 2024 के उत्तराधिकार विवाद मामले में फैसला सुनाने वाले बॉम्बे हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश गौतम पटेल और उनका परिवार इस समय एक गहरे संकट में है. उन्हें भारत से लेकर ब्रिटेन तक लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं. पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, पिछले दस महीनों से पूर्व जज के परिवार को डराने-धमकाने के लिए लगातार पत्र भेजे जा रहे हैं.
कौन हैं दाऊदी बोहरा?
दाऊदी बोहरा समुदाय इस्लाम के शिया संप्रदाय की मुस्तअली इस्माइली शाखा से जुड़ा एक धार्मिक समुदाय है. इसकी जड़ें 11वीं-12वीं शताब्दी में मिस्र के फातिमी खिलाफत काल से जुड़ी मानी जाती हैं. दुनिया भर में इस समुदाय की आबादी लगभग 10 लाख के आसपास बताई जाती है, जिसमें भारत सबसे बड़ा केंद्र है. मुंबई, सूरत, उदयपुर, इंदौर और राजस्थान-गुजरात के कई शहरों में बड़ी संख्या में दाऊदी बोहरा रहते हैं. इस समुदाय के पुरुष आमतौर पर सफेद पोशाक और सुनहरी कढ़ाई वाली टोपी पहनते हैं, जबकि महिलाएं रंग-बिरंगी रिदा पहनती हैं.
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उत्तराधिकार को लेकर कानूनी लड़ाई
बोहरा समुदाय का सर्वोच्च धार्मिक प्रमुख दाई-अल-मुतलक कहलाता है, जिसे आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों मामलों में अंतिम मार्गदर्शक माना जाता है. वर्तमान में सैयना मुफद्दल सैफुद्दीन को समुदाय का 53वां दाई-अल-मुतलक माना जाता है. साल 2014 में 52वें धर्मगुरु सैयद मोहम्मद बुरहानुद्दीन के निधन के बाद उत्तराधिकार को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हुई. एक पक्ष ने सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन का समर्थन किया, जबकि दूसरा पक्ष ताहेर फकरुद्दीन के साथ खड़ा हुआ. इसी विवाद पर 2024 में बॉम्बे हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला आया था, जिसे लेकर जस्टिस जीएस पटेल और उनके परिवार को धमकियों का सामना करना पड़ रहा है.
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क्या था 2024 का वह ऐतिहासिक फैसला?
यह पूरा विवाद दाऊदी बोहरा समुदाय के सर्वोच्च धार्मिक गुरु यानी 53वें दाई अल-मुतलक के पद को लेकर है. 24 अप्रैल 2024 को जस्टिस गौतम पटेल की एकल पीठ ने अपने फैसले में सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन को इस पद पर वैध माना था. कोर्ट ने कहा था कि सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन की नियुक्ति पूरी तरह से वैध है. इसके साथ ही कोर्ट ने खुजैमा कुतुबुद्दीन की ओर से 2014 में दायर मुकदमे को खारिज कर दिया था.
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खुजैमा का दावा था कि उनके भाई और 52वें सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन ने उन्हें गुप्त रूप से अपना उत्तराधिकारी चुना था. 2016 में खुजैमा की मौत के बाद उनके बेटे ताहिर फखरुद्दीन ने इस कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाया. लेकिन जस्टिस पटेल ने कहा कि याचिकाकर्ता अपने दावे के पक्ष में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाए. इस फैसले के अगले ही दिन यानी 25 अप्रैल 2024 को जस्टिस पटेल सेवानिवृत्त हो गए थे. वर्तमान में यह मामला बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने लंबित है.
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लंदन में रह रही बेटी को भी मिला धमकी भरा पत्र
इस मामले में लगातार नए मोड़ सामने आ रहे हैं. मिली जानकारी के अनुसार, 5 जून को जस्टिस पटेल की बेटी जो लंदन में रहती हैं, उन्हें एक चिट्ठी मिली. इस पत्र में साफ तौर पर हिंसा की चेतावनी दी गई है. पत्र भेजने वाले ने दावा किया है कि इस परिवार को खत्म करने के लिए 'कॉन्ट्रैक्ट' यानी सुपारी दी जा चुकी है. जर्मनी के डाक टिकट वाले इस पत्र के साथ एक डिजिटल स्टोरेज डिवाइस (पेनड्राइव) भी भेजी गई है. फिलहाल इस डिवाइस और पत्र को लंदन पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है और मामले की जांच कर रही है.
जस्टिस पटेल ने पूरे मामले पर क्या कहा?
वहीं, इन धमकियों के बीच जस्टिस पटेल का पक्ष भी सामने आया है. उनका कहना है कि अगर किसी को फैसले से असहमति है तो उसके लिए कानूनी अपील का रास्ता खुला हुआ है. उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों पर इस तरह का दबाव न केवल न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए खतरा है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि यदि जज और उनके परिवार सुरक्षित नहीं होंगे तो भविष्य में कौन बिना डर के न्यायिक जिम्मेदारी निभाना चाहेगा?
बेटी पर लंदन में 2 महीने पहले हुआ था हमला
जस्टिस पटेल की बेटी अदिति पर 22 अप्रैल 2026 को लंदन में कुछ अज्ञात लोगों द्वारा हमला किया गया है. मिली जानकारी के अनुसार, अदिति जब अपने बच्चे को स्कूल छोड़कर लौट रही थीं, तभी अज्ञात व्यक्ति ने उन पर पीछे से हमला किया था और इस हमले में अदिति की नाक की हड्डी टूट गई थी. इस घटना के बाद से ही यूके पुलिस भी इस मामले की जांच कर रही है और पहले मिली धमिकियों से जुड़े कनेक्शन की भी पड़ताल कर रही है.
रिटायर जस्टिस के मुताबिक 5 जून को उनकी बेटी अदिति पटेल को फिर से एक गुमनाम पत्र मिला. इस पत्र में कहा गया था कि अगर जस्टिस पटेल यूट्यूब वीडियो के जरिए 23 अप्रैल 2024 के अपने फैसले को सार्वजनिक रूप से वापस नहीं लेते हैं तो उनके परिवार का अंतिम संस्कार करवाया जाएगा. लेटर के साथ एक SD कार्ड भी था। यह भी कहा गया था कि इसके लिए गैंग को काम पर रखा गया है।
इन घटनाओं के बाद लंदन में उनकी बेटी और दामाद ने यूके पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. वेस्ट हर्टफोर्डशायर आतंकवाद विरोधी यूनिट 22 अप्रैल को अदिति पटेल पर हुए हमले की समीक्षा कर रही है.