भारत में इन दिनों E20 पेट्रोल को लेकर काफी बवाल मचा हुआ है. दूसरी तरफ, ईरान-अमेरिका संघर्ष के चलते पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों ने भी आम जनता की जेब टाइट कर रखी है. ईंधन की जरूरत सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए ही नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है. कई बार भारतीय सेना को ऐसे दुर्गम इलाकों में वाहनों को ले जाना पड़ता है, जहां अलग-अलग चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में वाहन के पहिये को लगातार चलाने के लिए ईंधन बेहद आवश्यक हो जाता है. ऐसे में जब बात -40 डिग्री सेल्सियस में सैन्य वाहन चलाने की बात आए तो, मामला और भी गंभीर हो जाता है.
क्या है एक्सट्रीम वेदर ग्रेड डीजल?
हालांकि अब भारतीय सेना को इस समस्या से निजात मिल गई है. सियाचिन, लद्दाख, काराकोरम और पूर्वी लद्दाख जैसे इलाकों में सर्दियों के दौरान तापमान कई बार माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. ऐसी परिस्थितियों में सामान्य डीजल जमने लगता है, जिससे टैंक, ट्रक, बख्तरबंद वाहन और रसद पहुंचाने वाले सैन्य वाहन बंद पड़ सकते हैं. इसी समस्या का समाधान निकालते हुए भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने भारतीय सेना के सहयोग से एक्सट्रीम वेदर ग्रेड (XWG) डीजल विकसित किया है, जिसे बहुत ज्यादा ठंड में भी प्रभावी ढंग से काम करने के लिए तैयार किया गया है.
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ठंड में क्यों नहीं जमता XWG डीजल?
दरअसल, सामान्य डीजल में मौजूद पैराफिन वैक्स कम तापमान पर क्रिस्टल का रूप लेने लगता है. ये क्रिस्टल फ्यूल फिल्टर और पाइपलाइन को जाम कर देते हैं, जिससे इंजन तक ईंधन नहीं पहुंच पाता और वाहन स्टार्ट होने में दिक्कत आती है. इसी वजह से दुनिया के ठंडे देशों में अलग-अलग मौसम के अनुसार समर, विंटर और एक्सट्रीम वेदर ग्रेड डीजल का इस्तेमाल किया जाता है. भारत में वर्ष 2019 में इंडियन ऑयल ने पहली बार विंटर ग्रेड डीजल पेश किया था, जो करीब माइनस 33 डिग्री सेल्सियस में भी लिक्विड फॉर्म में रहता था.
चीन के खिलाफ भारत का बड़ा हथियार
हालांकि भारतीय सेना को चीन के खिलाफ हर मोर्चे पर तैयार रहने के लिए इससे कहीं ज्यादा कम तापमान में काम करने वाले ईंधन की जरूरत थी. नई तकनीक से तैयार किया गया एक्सट्रीम वेदर ग्रेड डीजल लगभग माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक प्रभावी रहता है और इसका पोर प्वाइंट करीब माइनस 42 डिग्री सेल्सियस है. यानी इतनी भीषण ठंड में भी यह तरल अवस्था में बना रहता है और इंजन तक बिना रुकावट पहुंचता है.
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इसकी एक और खासियत यह है कि इसे मौजूदा बीएस-6 इंजनों में बिना किसी तकनीकी बदलाव के इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा यह फ्यूल फिल्टर जाम होने की संभावना कम करता है, इंजन और फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम की सुरक्षा बढ़ाता है और लंबे समय तक स्टोर रखने के बाद भी इसकी क्वॉलिटी जस की तस बनी रहती है.
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