मिडिल ईस्ट में पिछले कुछ समय से ठंडे बस्ते में पड़ा सऊदी अरब और यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का पुराना विवाद एक बार फिर भड़क उठा है. दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ किए गए हमलों के बाद इस क्षेत्र में एक नया मोर्चा खुलने की आशंका तेज हो गई है. इस नए तनाव ने परमाणु संपन्न देश पाकिस्तान को बेहद मुश्किल धर्मसंकट में डाल दिया है, जिसने पिछले साल ही सऊदी अरब के साथ एक बेहद खास द्विपक्षीय समझौता साइन किया है.
4 साल पुराना सीजफायर टूटा
इस ताजा विवाद की शुरुआत तब हुई जब हूतियों ने सऊदी अरब पर यमन की राजधानी सना के हवाई अड्डे पर बमबारी करने का आरोप लगाया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी समर्थन हासिल था. दरअसल, सऊदी अरब को इनपुट मिले थे कि ईरान की महान एयर की एक फ्लाइट हूती प्रतिनिधिमंडल को लेकर आ रही है, जिसका इस्तेमाल यमन में हथियारों या ईरानी सैन्य कर्मियों को पहुंचाने के लिए किया जा सकता था.
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सऊदी लड़ाकू विमानों की घेराबंदी के बावजूद यह विमान आखिरकार हूती कब्जे वाले एयरपोर्ट पर उतरा. लेकिन सना एयरपोर्ट पर हुई इस बमबारी ने साल 2022 से चले आ रहे सीजफायर को तोड़ दिया. जवाब में हूतियों ने सऊदी अरब के आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाते हुए मिसाइलें और ड्रोन्स दागे.
क्यों उड़ी पाकिस्तान की नींद?
सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. हालांकि, इस समझौते की पूरी कॉपी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन इसके मुताबिक किसी भी एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने यह भी कहा था कि इस समझौते के तहत पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम भी सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए उपलब्ध रहेगा.
इससे पहले जब ईरान ने सऊदी के ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया था, तब पाकिस्तान ने बड़ी चालाकी से अपने पड़ोसी देश अफगानिस्तान के साथ सीमा पर विवाद शुरू कर दिया था, ताकि वह इस समझौते के तहत सऊदी की मदद करने से बच सके.
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दोराहे पर पाकिस्तान
पाकिस्तान इस समय बेहद गंभीर दोराहे पर खड़ा है. आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान ने कभी भी यमन में हूतियों के खिलाफ सीधी जंग नहीं लड़ी है. साल 2015 में भी जब सऊदी ने यमन में सैन्य हस्तक्षेप किया था, तब पाकिस्तान ने अपनी सेना भेजने से साफ इनकार कर दिया था, जिससे दोनों देशों के रिश्ते खटास में आ गए थे.
लेकिन इस बार स्थितियां बदल चुकी हैं. मौजूदा समझौते के तहत वर्तमान में पाकिस्तान के करीब 8,000 सैनिक, 16 लड़ाकू विमान और चीन निर्मित एयर डिफेंस सिस्टम पहले से ही सऊदी अरब की धरती पर तैनात हैं. पाकिस्तान खुद इस समय बलूचिस्तान में उग्रवाद, पीओके में जारी विरोध प्रदर्शनों और अफगानिस्तान सीमा पर जारी तनाव से जूझ रहा है. ऐसे में अगर हूती विद्रोही सऊदी अरब पर अपने हमलों को तेज करते हैं, तो पाकिस्तान पर सऊदी की रक्षा के लिए युद्ध में सीधे उतरने का अंतरराष्ट्रीय दबाव चरम पर होगा.
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