उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुए विधान परिषद चुनाव में भाजपा सबसे आगे जरूर रही है, लेकिन विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने काफी दमदार कमबैक किया है. अखिलेश यादव ने शानदार मजबूती दिखाते हुए अपनी जमीन काफी मजबूत कर ली है. उत्तर प्रदेश में कुल 11 शिक्षक और स्नातक सीटों पर चुनाव हुए हैं. इनमें से 10 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं. भाजपा ने 6 और सपा ने 4 सीटें जीती हैं. वहीं, वाराणसी स्नातक सीट पर फिलहाल सपा आगे चल रही है. इस चुनाव के नतीजे इसलिए अहम हैं, क्योंकि करीब पांच महीने बाद उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.
विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों के चुनाव को आगामी यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले जमीनी मिजाज परखने के तौर पर देखा जा रहा है. और विधान परिषद चुनाव में भाजपा बेशक सबसे आगे है, लेकिन ताकतवर बने हैं अखिलेश यादव.
वाराणसी और आगरा जैसे गढ़ों में सपा की जीत
सपा ने उन सीटों पर भी जीत हासिल की है जिन्हें लंबे समय से सत्तापक्ष या गैर-सपा खेमे का मजबूत आधार माना जाता था. सपा ने पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को अपने हिस्से में करके खुद को मजबूत किया है. वहीं, आगरा-अलीगढ़ शिक्षक सीट पर सपा समर्थित उम्मीदवार आकाश अग्रवाल ने जीत हासिल की. इसके अलावा इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट और अन्य क्षेत्रों में भी सपा उम्मीदवारों ने भाजपा प्रत्याशियों को कड़ी टक्कर देते हुए अपनी सीटों में इजाफा किया. मेरठ शिक्षक और स्नातक दोनों सीटों पर भाजपा ने अपना दबदबा बरकरार रखा और जीत दर्ज की है.
नतीजों के सियासी मायने
कर्नाटक के एमएलसी चुनाव में जहां कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया और वह शून्य पर सिमट गई. वहीं, उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सपा का यह प्रदर्शन विपक्षी खेमे के लिए संजीवनी माना जा रहा है. शिक्षक और स्नातक सीटों पर सपा का खाता बढ़ने से जाहिर होता है कि समाजवादी पार्टी खुद को जनता तक पहुंचाने में कामयाब रही है. चाहें हो राज्य स्तर पर योगी सरकार के खिलाफ मुद्दे उठाने हों या फिर केंद्र सरकार को घेरना हो. सपा लोगों को अपनी बात समझाने में कामयाब हुई है.
इन नतीजों की वजह से समाजवादी पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति बनाने में मदद मिल सकती है. समाजवादी पार्टी अब दमदार रणनीति के साथ विधानसभा चुनाव लड़ सकती है, ताकि वह जनता की नब्ज को अच्छे से समझ सके. उन्हें इस बात का भली भांति अंदाजा हो गया होगा कि किन मुद्दों पर विधानसभा चुनाव लड़ा जाना चाहिए और जनता तक अपनी बात पहुंचानी चाहिए.
कार्यकर्ताओं में नई फुर्ती
इसके साथ ही इस जीत से पार्टी के कार्यकर्ताओं में भी उत्साह बढ़ेगा. पिछले दो विधानसभा चुनाव में हार का सामना कर रही पार्टी के कार्यकर्ताओं में इस जीत की वजह से एक नई ऊर्जा और उत्साह भरेगा, जिसका इस्तेमाल विधानसभा चुनाव में किया जा सकता है.
कांग्रेस पर दबाव में आएगा काम
वहीं, विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा के गठबंधन की चर्चा है. अगर दोनों पार्टियां साथ आती हैं तो समाजवादी पार्टी बड़े भाई की भूमिका खुद को पेश करेगी. ऐसे में समाजवादी पार्टी सीट शेयरिंग में ज्यादा सीटें अपने पास रख सकती है. इन नतीजों की वजह से कांग्रेस को इस भूमिका से कोई दिक्कत भी नहीं होनी चाहिए. इन चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा, लेकिन सपा ने अच्छा प्रदर्शन किया है.
कांग्रेस के प्रदर्शन की बात करें तो कर्नाटक जैसे राज्य जहां कांग्रेस की सरकार है, वहां कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई. कर्नाटक की चार सीटों में से तीन भाजपा और एक सीट एनडीए सहयोगी दल जेडीएस ने जीती है. ऐसे में कांग्रेस बैकफुट पर नजर आ रही हैं. लेकिन कांग्रेस ने महाराष्ट्र की नागपुर की सीट जरूर जीत ली. नागपुर का आरएसएस का गढ़ माना जाता है. वहीं, यह महाराष्ट्र सीएम देवेंद्र फडणवीस का गृह नगर और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का लोकसभा क्षेत्र है.
पीएम मोदी का तंज, कांग्रेस का पलटवार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को एमएलसी चुनाव के नतीजों को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा था. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था, ‘उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक जैसे चार बड़े राज्यों की 28 सीट पर विधान परिषद चुनाव हुए. चुनाव मतपत्रों से कराए गए. अंदाजा लगाइए कि कांग्रेस ने कितनी सीट जीतीं?’
इसके जवाब में कांग्रेस के जयराम रमेश ने पलटवार करते हुए पीएम मोदी से कहा कि जरा वाराणसी और कर्नाटक के नतीजों पर भी गौर कर लिजिए. उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘प्रवचनमंत्री जी को आत्मविश्लेषण की जरूरत है, लेकिन वे दूसरों को प्रवचन दे रहे हैं! कांग्रेस की सीटें गिनने से पहले काश यह भी विचार कर लेते कि उनके अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी की दोनों सीटों पर भाजपा क्यों हारी और RSS के गढ़ नागपुर में कांग्रेस ने भाजपा को कैसे हराया?’
साथ ही उन्होंने लिखा, ‘मोदी जी, ट्रोलिंग बंद कीजिए. करोड़ों परिवार कमरतोड़ महंगाई से त्रस्त हैं, युवा बेरोज़गार हैं और निजी निवेश ठप पड़ा है. अहंकार छोड़कर इन मुद्दों पर विचार करिए! वाराणसी और नागपुर से लेकर लखनऊ, प्रयागराज, पटना की जनता ने स्पष्ट रूप से आपकी नीतियों के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया है.’