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भूख हड़ताल करना भारत में है कानूनी? जानिए क्या सरकार जबरन तुड़वा सकती है अनशन, क्या कहता देश का है कानून

NEET paper leak: भारत में पहले भी कई चर्चित भूख हड़तालें हुई हैं. इरोम शर्मिला को सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) के विरोध में लंबे अनशन के दौरान हिरासत में नाक के जरिए तरल आहार दिया गया था.

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नीट पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के साथ आंदोलन में शामिल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने 26 दिनों बाद अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी. उन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह द्वारा 3 मांगों पर लिखित में सहमति मिलने के बाद अपना अनशन खत्म किया. सोनम वांगचुक को पिछले सप्ताह दिल्ली पुलिस ने कोर्ट का हवाला देते हुए जंतर-मंतर से उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया था. वर्तमान में सोनम गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती है. सोनम वांगचुके का अनशन समाप्त होने के बाद लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रह हैं.

सोशल मीडिया पर ऐसे दावे किए जा रहे हैं कि सरकार ने जबरन सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से उठाया और उनका अनशन तुड़वाया. हालांकि सोनम वांगचुक ने खुद एक वीडियो जारी कर बताया कि उन्होंने सरकार द्वारा तीन मांगें पूरी किए जाने के बाद ही अनशन समाप्त किया है. सोनम वांगचुक के अनशन के बाद लोग इससे जुड़े कानून के बारे में सर्च कर रहे हैं. क्या सरकार किसी का अनशन जबरन तुड़वा सकती है, इसे लेकर क्या है कानून? ऐसे कई सवाल लोग इंटरनेट पर सर्च कर रहे हैं.

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भूख हड़ताल करना भारत में है कानूनी?


आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक को जबरन खाना खिलाने का कोई आदेश नहीं दिया था. अदालत ने यह भी कहा था कि हर नागरिक का जीवन बहुमूल्य है और उसकी रक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है. आपको बता दें कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार देते हैं. हालांकि भूख हड़ताल को लेकर कोई कानून नहीं है, ये अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़ा फैसला है. हालांकि अनशन पर बैठने से पहले व्यक्ति को प्रशासन को सूचित जरूर करना पड़ता है. भूख हड़ताल को लंबे समय से लोकतांत्रिक विरोध के एक महत्वपूर्ण और गंभीर प्रदर्शन के तौर पर देखा जाता रहा है.

क्या आत्महत्या मानी जाएगी भूख हड़ताल से मौत?


महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इसे अहिंसक संघर्ष का प्रभावी हथियार बनाया था. 2021 में मद्रास हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट किया था कि केवल भूख हड़ताल पर बैठना आत्महत्या का प्रयास नहीं माना जा सकता. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने रामलीला मैदान मामले में कहा था कि उपवास सत्याग्रह की परंपरा से जुड़ा संवैधानिक रूप से स्वीकार्य विरोध है.

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क्या जबरन अनशन तुड़वा सकती है सरकार?


संविधान का अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार भी देता है. इसी वजह से जब किसी अनशनकारी की जान पर गंभीर खतरा मंडराने लगता है, तब सरकार पूरी तरह मूकदर्शक नहीं रह सकती. 2024 में किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के अनशन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और पंजाब सरकार को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था, लेकिन साथ ही यह भी कहा था कि जब तक स्थिति जिंदगी और मौत की ना हो, तब तक अनशन तुड़वाने के लिए बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए.

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अनशन तुड़वाने का कोई नियम नहीं


भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है जो हर भूख हड़ताल करने वाले व्यक्ति को जबरन खाना खिलाने की अनुमति देता हो. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस विषय पर कोई सार्वभौमिक नियम तय नहीं किया है. अदालतें व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, डॉक्टरों की राय, वह सरकारी हिरासत में है या नहीं और संबंधित न्यायिक आदेश जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर फैसला करती हैं. भारत में पहले भी कई चर्चित भूख हड़तालें हुई हैं. इरोम शर्मिला को सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) के विरोध में लंबे अनशन के दौरान हिरासत में नाक के जरिए तरल आहार दिया गया था.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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