आगामी 8 जून को होने वाली विपक्षी गठबंधन 'इंडिया ब्लॉक' की अहम बैठक से पहले गठबंधन के भीतर एक बहुत बड़ा भूचाल आ गया है. हाल ही के चुनाव नतीजों के बाद एकजुटता का दावा करने वाले इस मोर्चे में अब ऐसी दरारें उभर आई हैं, जिसने कांग्रेस नेतृत्व की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

तमिलनाडु की द्रमुक की ओर से बैठक का बहिष्कार करने के ऐलान के ठीक बाद, अब कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) और झारखंड में सरकार चला रही झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी कांग्रेस के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है एक तरफ जहां माकपा ने राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं हेमंत सोरेन की पार्टी जेएमएम ने कांग्रेस पर मनमानी करने का आरोप लगाया है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें : कनार्टक CM की कैबिनेट में बगावत, वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने मंत्री पद से दिया इस्तीफा, जानें क्यों नाराज हुए रामलिंगा रेड्डी?

---विज्ञापन---

केरल में लेफ्ट का गुस्सा

माकपा के महासचिव एम ए बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को बेहद कड़े शब्दों में एक पत्र लिखा है. इस विवाद को और हवा तब मिली जब माकपा ने यह पत्र केवल कांग्रेस भेजा, बल्कि गठबंधन के सभी सहयोगी दलों को फॉरवर्ड कर दिया.

---विज्ञापन---

चिट्ठी में माकपा ने साफ तौर पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि केरल चुनाव के दौरान खुद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने वामपंथियों पर निशाना साधा था. कांग्रेस ने बकायदा कैंपेन चलाया था कि माकपा और भाजपा के बीच 'डील' हो गई है. राहुल गांधी ने तो चुनावी मंचों से यहां तक पूछ डाला था कि 'ईडी केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को गिरफ्तार क्यों नहीं कर रही है?'

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें : कांग्रेस की रणनीति ने कैसे ध्वस्त किया लेफ्ट का आखिरी किला, जानिए- केरल में कैसे बह गई वामपंथ की ‘लाल लहर’

---विज्ञापन---

माकपा ने खरगे से सवाल किया है कि क्या एक साथी विपक्षी नेता के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों से अवैध कार्रवाई की मांग करना 'भाजपा-विरोधी' स्टैंड है? माकपा का कहना है कि जब तक कांग्रेस इन विघटनकारी कदमों पर स्थिति साफ नहीं करती, तब तक इस गठबंधन के औचित्य पर ही सवाल बना रहेगा।

झारखंड में तकरार

गठबंधन में दूसरा बड़ा झटका झारखंड से लगा है, जहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ झामुमो कांग्रेस से बुरी तरह बिफर गई है. विवाद आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर शुरू हुआ है. झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन के पास आसानी से दोनों सीटें जीतने का संख्याबल मौजूद है. जेएमएम चाहती थी कि दोनों सीटों पर उसके उम्मीदवार उतरें. लेकिन कांग्रेस ने जेएमएम को भरोसे में लिए बिना, 'एकतरफा' फैसला करते हुए खरगे के करीबी प्रणव झा को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया. कांग्रेस की इस मनमानी से नाराज जेएमएम ने शनिवार को अपने उम्मीदवार बैद्यनाथ राम के नाम का ऐलान कर दिया और दूसरी सीट को लेकर संशय बरकरार रखा है, जिससे दोनों सहयोगियों के बीच सीधी भिड़ंत के आसार बन गए हैं.

यह भी पढ़ें : राज्यसभा चुनाव से पहले BJP का बड़ा फैसला, आंध्र प्रदेश की इकलौती सीट छोड़ी, जानें 10 राज्यों में कितनी सीटें जीतने के समीकरण?

तमिलनाडु में DMK दर्द

इस पूरे घमासान की शुरुआत इस हफ्ते की शुरुआत में तब हुई थी, जब डीएमके ने 8 जून की बैठक में शामिल होने से साफ मना कर दिया था. डीएमके की इस नाराजगी के पीछे कांग्रेस का तमिलनाडु में उठाया गया एक कदम है. हालिया चुनाव के बाद कांग्रेस ने द्रमुक (DMK) के साथ अपना सालों पुराना नाता तोड़कर, अभिनेता से नेता बने सुपरस्टार विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' से हाथ मिला लिया था. कांग्रेस के इस पाला बदलने से नाराज एमके स्टालिन की पार्टी अब कांग्रेस के साथ मंच साझा करने को बिल्कुल तैयार नहीं है.

यह भी पढ़ें : झारखंड राज्यसभा चुनाव: CM हेमंत सोरेन के आश्वासन से कांग्रेस उत्साहित, दावेदारों की लॉबिंग तेज

संसद में तो रहेंगे साथ, लेकिन…

हालांकि, माकपा ने साफ किया है कि वे संसद के भीतर मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता का हिस्सा बने रहेंगे, लेकिन बैठक से ऐन पहले तीन बड़े राज्यों (केरल, झारखंड और तमिलनाडु) के क्षेत्रीय दलों की इस नाराजगी ने 8 जून की बैठक की हवा निकाल दी है.