दुनिया भर में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल को एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाने का काम विशालकाय टैंकर जहाज करते हैं. बहुत से लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या ये जहाज भी हमारी कारों की तरह पेट्रोल या डीजल से चलते हैं लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग है. ये समुद्री टैंकर मुख्य रूप से ‘हैवी फ्यूल ऑयल’ (HFO) या जिसे ‘बंकर फ्यूल’ भी कहा जाता है, उसका इस्तेमाल करते हैं. यह तेल कच्चे तेल को रिफाइन करने के बाद बचा हुआ सबसे गाढ़ा और चिपचिपा हिस्सा होता है. यह तेल इतना गाढ़ा होता है कि इसे इंजन तक भेजने से पहले लगभग 80 डिग्री सेल्सियस तक गरम करना पड़ता है ताकि यह बहने लायक हो सके. कम कीमत और ज्यादा ऊर्जा देने की क्षमता की वजह से ही बड़े जहाजों के इंजन इसी खास ईंधन के लिए तैयार किए जाते हैं.
ईरान से भारत का सफर और तेल का खर्च
ईरान के खार्ग आइलैंड से भारत के गुजरात स्थित वादीनार पोर्ट तक की दूरी लगभग 1,100 से 1,200 नॉटिकल मील है जिसे तय करने में एक जहाज को करीब 4 से 6 दिन का समय लग सकता है. एक सामान्य आकार का टैंकर जहाज अपनी रफ्तार और वजन के हिसाब से प्रतिदिन लगभग 30 से 60 मीट्रिक टन ईंधन की खपत कर सकता है. इस हिसाब से ईरान से भारत तक की एक तरफ की यात्रा में करीब 150 से 300 मीट्रिक टन यानी लगभग 1.5 लाख से 3 लाख लीटर ईंधन जल सकता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में बंकर फ्यूल की कीमतें भले ही बदलती रहती हैं लेकिन अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार इस एक यात्रा का कुल ईंधन खर्च करोड़ों रुपये में बैठता है.
यह भी पढ़ें: चीन में कुछ बड़ा होने वाला है! 40 दिनों के लिए क्यों बंद हुआ ताइवान का एयरस्पेस?
आधुनिक तकनीक और प्रदूषण पर लगाम
बदलते वक्त के साथ जहाजों में ईंधन के इस्तेमाल की तकनीक भी बदल रही है ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे. अब कई आधुनिक जहाज तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) या लो-सल्फर फ्यूल का उपयोग करने लगे हैं जिससे जहरीला धुआं और प्रदूषण कम होता है. हालांकि हैवी फ्यूल ऑयल आज भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला विकल्प है क्योंकि यह सामान्य डीजल के मुकाबले करीब 30 प्रतिशत तक सस्ता पड़ता है. जहाजों के विशाल इंजनों को चलाने के लिए जितनी भारी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत होती है उसे पूरा करने के लिए यह तेल सबसे कारगर साबित होता है. भारी भरकम टैंकरों के संचालन में ईंधन की यह बचत ही तेल कंपनियों के मुनाफे और ट्रांसपोर्टेशन की लागत को तय करती है.
सात साल बाद फिर शुरू हुआ सिलसिला
भारत और ईरान के बीच कच्चे तेल का व्यापार एक बार फिर रफ्तार पकड़ रहा है जो रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. अप्रैल 2026 में करीब 7 साल के लंबे इंतजार के बाद ईरान से कच्चे तेल की खेप भारत पहुंचना शुरू हुई है. हाल ही में ‘पिंग शुन’ नामक एक बड़ा जहाज लगभग 6,00,000 बैरल कच्चा तेल लेकर ईरान से गुजरात के वादीनार पोर्ट पर सफलतापूर्वक पहुंचा है. यह खेप भारत की ऊर्जा सुरक्षा और बढ़ती जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. इन विशाल टैंकरों का सुरक्षित और किफायती सफर ही देश के पेट्रोल पंपों तक पहुंचने वाले ईंधन की उपलब्धता और कीमतों को काफी हद तक प्रभावित करता है.
संबंधित खबरें
जेपी आंदोलन से CJP प्रदर्शन तक का सफर
1 day agoरेलवे स्टेशन का नाम कैसे बदला जाता है? जानें क्या है पूरी प्रक्रिया
2 days agoनोबेल पुरस्कार विजेताओं को 'लॉरिएट' क्यों कहा जाता है? दिलचस्प है कहानी
3 days agoविदेश यात्रा पर क्यों जाते हैं CM, उन्हें भी लेनी पड़ती है किसी की मंजूरी?
4 days agoब्राजील के चुनाव में फंसा पेंच, क्या है 'रनऑफ' प्रक्रिया जिसमें होगा फैसला?
5 days agoCEC ज्ञानेश कुमार हो सकते हैं गिरफ्तार? केरलम केस में कितनी हो सकती सजा
5 days agoकिन्हें दिया जाता है नोबेल पुरस्कार, अब तक कितने भारतीयों को मिला ये अवॉर्ड
6 days agoटैक्स अधिकारियों की अरेस्ट पावर क्यों खत्म करना चाहती है केंद्र सरकार?
6 days agoक्या है अमेरिका का वीजा बॉन्ड और 50 देशों पर क्यों हुआ लागू ? भारत को छूट
7 days agoक्यों हुई अजय राय की छुट्टी, कैसे मिली आराधना को UP की कमान?
8 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines