‘मौत की घड़ी’…क्या है और कैसे काम करती, जिसने वैज्ञानिकों को बताया कब खत्म होगी दुनिया?
Doomsday Clock The University of Chicago: मौत की घड़ी ने भविष्यवाणी कर दी है कि दुनिया मेे प्रलय आने में सिर्फ 90 सेकेंट बचे हैं। जानें इस घड़ी के बारे में और यह कैसे काम करती है?
Edited By : Khushbu Goyal|Updated: Jan 27, 2024 18:07
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'मौत की घड़ी' डूम्सडे क्लॉक में सिर्फ 90 सेकेंड बचे हैं।
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Doomsday Clock Predicts Universal Devastation: रूस-यूक्रेन वार, इजराइल-हमास वार, हूती विद्रोहियों की समुद्र कब्जाने की कोशिश, ईरान-पाकिस्तान में तनाव, नेचुरल डिजास्टर, भूकंप जैसी घटनाएं...किसी न किसी तरह धरती पर तबाही मच रही है। जिंदगियां खत्म हो रही हैं, क्योंकि पूरी दुनिया 'महाविनाश' की ओर है। प्रलय आने वाली है।
'मौत की घड़ी' ने भविष्यवाणी कर दी है कि प्रलय आने वाली जी हां, ऐसी स्मार्ट वॉच दुनिया में हैं, जो 'मौत' का वक्त बता देती है। 1947 से यह घड़ी पहले से खतरों का संकेत दे रही है। पिछले कुछ सालों में इस घड़ी की रफ्तारी तेज हो गई है।
Bulletin of Atomic Scientists surprisingly keep the 2024 #DoomsdayClock set at 90 seconds to midnight even with the increased risk worldwide.
In 2023 it moved from 100 seconds to midnight to 90 seconds. pic.twitter.com/3DuknP8DjW
2023 जनवरी में 10 सेंकेंड आगे किया टाइम
बात हो रही है 'डूम्सडे क्लॉक' की, जिसने वैज्ञानिकों को संकेत दिया है कि दुनिया में प्रलय आने वाली है। इस घड़ी में अभी 90 सेंकेड बजे हैं। जैसे ही इस घड़ी में ठीक 12 बजेंगे तो प्रलय शुरू हो जाएगी और तबाही-विनाश के मंजर देखने को मिलेंगे।
2023 में भी जनवरी महीने में घड़ी का टाइम सेट किया गया था तो रूस-यूक्रेन, इजराइल-हमास में युद्ध हुए। दिसंबर खत्म होते-होते इनसे थोड़ी राहत मिली, लेकिन वे खत्म नहीं हुए। अब एक बार फिर ऐसे ही तबाही के मंजर दिखने की संभावना है। एक बार फिर आपदाएं आएंगी। इंसान आपस में ही लड़ेंगे और मरेंगे।
यह भी पढ़ें: Doomsday Clock: क्या खत्म होने की कगार पर है दुनिया! वैज्ञानिकों की चेतावनी के पीछे ये वजह तो नहीं
अल्बर्ट आइंस्टीन और छात्रों ने बनाई थी घड़ी
डूम्सडे क्लॉक 1945 में दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने शिकागो विश्वविद्यालय के छात्रों और परमाणु वैज्ञानिकों के साथ मिलकर बनाई थी। इस घड़ी का समय 13 नोबेल पुरस्कारों का पैनल तय करता है। 1947 में पहली बार इसका टाइम सेट किया गया था, तब दुनिया को परमाणु हमलों और हथियारों से खतरा पैदा हुआ था।
अब यह घड़ी जलवायु संकट, प्राकृतिक आपदाओं, प्रदूषण, भुखमरी, हिंसा, एलियन्स और रोबोट का खतरा भी बताने लगी है। पिछले साल घड़ी ने संकेत दिए तो युद्ध शुरू हो गए हैं। देश और लोग आपस में लड़ने लगे।
शिकागो यूनिवर्सिटी में लगी इस घड़ी का टाइम वैज्ञानिक हर साल बदलते हैं। एक बार सेट करने के बाद जब घड़ी में 12 बजे जाते हैं तो प्रलय आने का संकेत मिलता है। 2020 में जब कोरोना महामारी फैली, तब से लेकर दिसंबर 2023 तक यह घड़ी आधी रात से 100 सेकेंड पहले रुकी रही, यानी 3 साल महामारी का खतरा रहर।
जनवरी 2023 में घड़ी का टाइम 10 सेकेंड आगे बढ़ाकर 90 सेकेंड सेट किया गया तो युद्ध हो गए और आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस का खतरा मंडराया। दिसंबर खत्म होते-होते भूकंप की त्रासदियां बढ़ गई हैं, ऐसे में अब घ़ड़ी में 12 बजे तो क्या होगा?
Today, the Bulletin’s Science and Security Board once again sets the #DoomsdayClock at 90 seconds to midnight.
डूम्सडे वॉच को कुछ इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसमें 12 बजते ही प्रलय आ जाएगी। अभी घड़ी 90 सेकेंड पर स्थिर है, जिस दिन इसमें 12 बजेंगे प्रलय आना तय है। घड़ी का समय आज तक 25 बार बदला जा चुका है। 1945 में बनने और सरकार से मंजूरी मिलने के बाद 1947 में आधी रात से ठीक पहले इसमें 12 बजे में 7 मिनट थे।
1949 में सोवियत रूस ने न्यूक्लियर बम बनाया तो 3 मिनट बचे थे। 1953 में अमेरिका ने हाइड्रोजन बम टेस्ट किया तो 2 मिनट बचे। 1991 में शीत युद्ध खत्म होने पर इसमें 17 मिनट बच गए। 1998 में भारत-पाकिस्तान के परमाणु बमों की टेस्टिंग की तो इसमें 9 मिनट बचे। 2023 में यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ तो घड़ी में 12 बजने में 90 सेकेंड बच गए।
विनाशकारी घड़ी(DoomsdayClock) को विश्व में मानव के द्वारा संकट के स्तर को यह समय से बताता है।
अमेरिका में सभी विद्वानों ने मिलकर परमाणु हथियार को केवल युद्धशांति के लिए बनाया, किंतु उसका दुरुपयोग होने पर इन्होंने पछतावे पर विनाशकारी घड़ी(DoomsdayClock) बना दिया। pic.twitter.com/LgUYZYy4hb
Doomsday Clock Predicts Universal Devastation: रूस-यूक्रेन वार, इजराइल-हमास वार, हूती विद्रोहियों की समुद्र कब्जाने की कोशिश, ईरान-पाकिस्तान में तनाव, नेचुरल डिजास्टर, भूकंप जैसी घटनाएं…किसी न किसी तरह धरती पर तबाही मच रही है। जिंदगियां खत्म हो रही हैं, क्योंकि पूरी दुनिया ‘महाविनाश’ की ओर है। प्रलय आने वाली है।
‘मौत की घड़ी’ ने भविष्यवाणी कर दी है कि प्रलय आने वाली जी हां, ऐसी स्मार्ट वॉच दुनिया में हैं, जो ‘मौत’ का वक्त बता देती है। 1947 से यह घड़ी पहले से खतरों का संकेत दे रही है। पिछले कुछ सालों में इस घड़ी की रफ्तारी तेज हो गई है।
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Bulletin of Atomic Scientists surprisingly keep the 2024 #DoomsdayClock set at 90 seconds to midnight even with the increased risk worldwide.
In 2023 it moved from 100 seconds to midnight to 90 seconds. pic.twitter.com/3DuknP8DjW
बात हो रही है ‘डूम्सडे क्लॉक‘ की, जिसने वैज्ञानिकों को संकेत दिया है कि दुनिया में प्रलय आने वाली है। इस घड़ी में अभी 90 सेंकेड बजे हैं। जैसे ही इस घड़ी में ठीक 12 बजेंगे तो प्रलय शुरू हो जाएगी और तबाही-विनाश के मंजर देखने को मिलेंगे।
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2023 में भी जनवरी महीने में घड़ी का टाइम सेट किया गया था तो रूस-यूक्रेन, इजराइल-हमास में युद्ध हुए। दिसंबर खत्म होते-होते इनसे थोड़ी राहत मिली, लेकिन वे खत्म नहीं हुए। अब एक बार फिर ऐसे ही तबाही के मंजर दिखने की संभावना है। एक बार फिर आपदाएं आएंगी। इंसान आपस में ही लड़ेंगे और मरेंगे।
डूम्सडे क्लॉक 1945 में दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने शिकागो विश्वविद्यालय के छात्रों और परमाणु वैज्ञानिकों के साथ मिलकर बनाई थी। इस घड़ी का समय 13 नोबेल पुरस्कारों का पैनल तय करता है। 1947 में पहली बार इसका टाइम सेट किया गया था, तब दुनिया को परमाणु हमलों और हथियारों से खतरा पैदा हुआ था।
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अब यह घड़ी जलवायु संकट, प्राकृतिक आपदाओं, प्रदूषण, भुखमरी, हिंसा, एलियन्स और रोबोट का खतरा भी बताने लगी है। पिछले साल घड़ी ने संकेत दिए तो युद्ध शुरू हो गए हैं। देश और लोग आपस में लड़ने लगे।
शिकागो यूनिवर्सिटी में लगी इस घड़ी का टाइम वैज्ञानिक हर साल बदलते हैं। एक बार सेट करने के बाद जब घड़ी में 12 बजे जाते हैं तो प्रलय आने का संकेत मिलता है। 2020 में जब कोरोना महामारी फैली, तब से लेकर दिसंबर 2023 तक यह घड़ी आधी रात से 100 सेकेंड पहले रुकी रही, यानी 3 साल महामारी का खतरा रहर।
जनवरी 2023 में घड़ी का टाइम 10 सेकेंड आगे बढ़ाकर 90 सेकेंड सेट किया गया तो युद्ध हो गए और आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस का खतरा मंडराया। दिसंबर खत्म होते-होते भूकंप की त्रासदियां बढ़ गई हैं, ऐसे में अब घ़ड़ी में 12 बजे तो क्या होगा?
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Today, the Bulletin’s Science and Security Board once again sets the #DoomsdayClock at 90 seconds to midnight.
Humanity continues to face an unprecedented level of danger.
— Bulletin of the Atomic Scientists (@BulletinAtomic) January 23, 2024
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12 बजा देंगी सूइयां तो क्या होगा?
डूम्सडे वॉच को कुछ इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसमें 12 बजते ही प्रलय आ जाएगी। अभी घड़ी 90 सेकेंड पर स्थिर है, जिस दिन इसमें 12 बजेंगे प्रलय आना तय है। घड़ी का समय आज तक 25 बार बदला जा चुका है। 1945 में बनने और सरकार से मंजूरी मिलने के बाद 1947 में आधी रात से ठीक पहले इसमें 12 बजे में 7 मिनट थे।
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1949 में सोवियत रूस ने न्यूक्लियर बम बनाया तो 3 मिनट बचे थे। 1953 में अमेरिका ने हाइड्रोजन बम टेस्ट किया तो 2 मिनट बचे। 1991 में शीत युद्ध खत्म होने पर इसमें 17 मिनट बच गए। 1998 में भारत-पाकिस्तान के परमाणु बमों की टेस्टिंग की तो इसमें 9 मिनट बचे। 2023 में यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ तो घड़ी में 12 बजने में 90 सेकेंड बच गए।
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विनाशकारी घड़ी(DoomsdayClock) को विश्व में मानव के द्वारा संकट के स्तर को यह समय से बताता है।
अमेरिका में सभी विद्वानों ने मिलकर परमाणु हथियार को केवल युद्धशांति के लिए बनाया, किंतु उसका दुरुपयोग होने पर इन्होंने पछतावे पर विनाशकारी घड़ी(DoomsdayClock) बना दिया। pic.twitter.com/LgUYZYy4hb