Doomsday Clock The University of Chicago

'मौत की घड़ी'...क्या है और कैसे काम करती, जिसने वैज्ञानिकों को बताया कब खत्म होगी दुनिया?

Doomsday Clock The University of Chicago: मौत की घड़ी ने भविष्यवाणी कर दी है कि दुनिया मेे प्रलय आने में सिर्फ 90 सेकेंट बचे हैं। जानें इस घड़ी के बारे में और यह कैसे काम करती है?

Doomsday Clock Predicts Universal Devastation: रूस-यूक्रेन वार, इजराइल-हमास वार, हूती विद्रोहियों की समुद्र कब्जाने की कोशिश, ईरान-पाकिस्तान में तनाव, नेचुरल डिजास्टर, भूकंप जैसी घटनाएं…किसी न किसी तरह धरती पर तबाही मच रही है। जिंदगियां खत्म हो रही हैं, क्योंकि पूरी दुनिया ‘महाविनाश’ की ओर है। प्रलय आने वाली है।

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‘मौत की घड़ी’ ने भविष्यवाणी कर दी है कि प्रलय आने वाली  जी हां, ऐसी स्मार्ट वॉच दुनिया में हैं, जो ‘मौत’ का वक्त बता देती है। 1947 से यह घड़ी पहले से खतरों का संकेत दे रही है। पिछले कुछ सालों में इस घड़ी की रफ्तारी तेज हो गई है।

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2023 जनवरी में 10 सेंकेंड आगे किया टाइम

बात हो रही है ‘डूम्सडे क्लॉक‘ की, जिसने वैज्ञानिकों को संकेत दिया है कि दुनिया में प्रलय आने वाली है। इस घड़ी में अभी 90 सेंकेड बजे हैं। जैसे ही इस घड़ी में ठीक 12 बजेंगे तो प्रलय शुरू हो जाएगी और तबाही-विनाश के मंजर देखने को मिलेंगे।

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2023 में भी जनवरी महीने में घड़ी का टाइम सेट किया गया था तो रूस-यूक्रेन, इजराइल-हमास में युद्ध हुए। दिसंबर खत्म होते-होते इनसे थोड़ी राहत मिली, लेकिन वे खत्म नहीं हुए। अब एक बार फिर ऐसे ही तबाही के मंजर दिखने की संभावना है। एक बार फिर आपदाएं आएंगी। इंसान आपस में ही लड़ेंगे और मरेंगे।

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अल्बर्ट आइंस्टीन और छात्रों ने बनाई थी घड़ी

डूम्सडे क्लॉक 1945 में दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने शिकागो विश्वविद्यालय के छात्रों और परमाणु वैज्ञानिकों के साथ मिलकर बनाई थी। इस घड़ी का समय 13 नोबेल पुरस्कारों का पैनल तय करता है। 1947 में पहली बार इसका टाइम सेट किया गया था, तब दुनिया को परमाणु हमलों और हथियारों से खतरा पैदा हुआ था।

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अब यह घड़ी जलवायु संकट, प्राकृतिक आपदाओं, प्रदूषण, भुखमरी, हिंसा, एलियन्स और रोबोट का खतरा भी बताने लगी है। पिछले साल घड़ी ने संकेत दिए तो युद्ध शुरू हो गए हैं। देश और लोग आपस में लड़ने लगे।

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‘मौत की घड़ी’ कैसे काम करती है?

शिकागो यूनिवर्सिटी में लगी इस घड़ी का टाइम वैज्ञानिक हर साल बदलते हैं। एक बार सेट करने के बाद जब घड़ी में 12 बजे जाते हैं तो प्रलय आने का संकेत मिलता है। 2020 में जब कोरोना महामारी फैली, तब से लेकर दिसंबर 2023 तक यह घड़ी आधी रात से 100 सेकेंड पहले रुकी रही, यानी 3 साल महामारी का खतरा रहर।

जनवरी 2023 में घड़ी का टाइम 10 सेकेंड आगे बढ़ाकर 90 सेकेंड सेट किया गया तो युद्ध हो गए और आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस का खतरा मंडराया। दिसंबर खत्म होते-होते भूकंप की त्रासदियां बढ़ गई हैं, ऐसे में अब घ़ड़ी में 12 बजे तो क्या होगा?

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12 बजा देंगी सूइयां तो क्या होगा?

डूम्सडे वॉच को कुछ इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसमें 12 बजते ही प्रलय आ जाएगी। अभी घड़ी 90 सेकेंड पर स्थिर है, जिस दिन इसमें 12 बजेंगे प्रलय आना तय है। घड़ी का समय आज तक 25 बार बदला जा चुका है। 1945 में बनने और सरकार से मंजूरी मिलने के बाद 1947 में आधी रात से ठीक पहले इसमें 12 बजे में 7 मिनट थे।

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1949 में सोवियत रूस ने न्यूक्लियर बम बनाया तो 3 मिनट बचे थे। 1953 में अमेरिका ने हाइड्रोजन बम टेस्ट किया तो 2 मिनट बचे। 1991 में शीत युद्ध खत्म होने पर इसमें 17 मिनट बच गए। 1998 में भारत-पाकिस्तान के परमाणु बमों की टेस्टिंग की तो इसमें 9 मिनट बचे। 2023 में यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ तो घड़ी में 12 बजने में 90 सेकेंड बच गए।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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